जहरीली शराब का फिर तांडव, जानिए पिछले 10 सालों में UP में कितने लोगों ने गंवाई जान

बुलंदशहर में जहरीली शराब पीने से अब तक 5 लोगों की मौत हो चुकी है. (सांकेतिक तस्वीर)

बुलंदशहर में जहरीली शराब पीने से अब तक 5 लोगों की मौत हो चुकी है. (सांकेतिक तस्वीर)

हर साल यूपी में जहरीली शराब से दर्जनों परिवार उजड़ जाते हैं. बीते साल 2020 में ही लखनऊ (Lucknow) से लेकर प्रयागराज और मेरठ तक कई घटनायें हुईं, जिसमें दर्जनों लोगों की जान चली गई

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बुलंदशहर. उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर (Bulandhahr) में जहरीली शराब पीने से अभी तक 5 लोगों की मौत हो चुकी है. कई लोग जिंदगी और मौत के बीच झूल रहे हैं. नये साल 2021 का ये पहला मामला है लेकिन, पिछले सालों की घटनाओं पर नजर दौड़ायें तो पता चलेगा कि हर साल ही यूपी में जहरीली शराब से दर्जनों परिवार उजड़ जाते हैं. बीते साल 2020 में ही लखनऊ से लेकर प्रयागराज और मेरठ तक कई घटनायें हुईं, जिसमें दर्जनों लोगों की जान चली गयी.

घटनाओं के लिहाज से इसे गनीमत ही मानेंगे कि पिछले साल 2020 में लम्बे समय तक लॉकडाउन रहा, जिससे जहरीली शराब का शिकार होने वालों की संख्या और सालों की तुलना में कम रही. तो आइये जानते हैं कि पिछले साल जहरीली शराब का प्रदेश के किन-किन जिलों में तांडव रहा

प्रयागराज- डेढ़ महीने पहले ही 21 नवम्बर को प्रयागराज के फूलपुर में 6 लोगों की जहरीली शराब पीने से जान चली गयी. फूलपुर के अमिलिया गांव में सरकारी ठेके से ही शराब खरीदकर लोगों ने पी थी.

लखनऊ- 13 नवम्बर को लखनऊ में जहरीली शराब पीने से 6 लोगों की मौत हो गयी थी. बंथरा इलाके में सरकारी ठेके से शराब खरीदने की बात सामने आयी थी.
फिरोजाबाद- लखनऊ की घटना के चंद दिनों बाद ही 17 नवम्बर को फिरोजाबाद में भी जहरीली शराब से 3 लोगों की मौत हो गयी थी.

बागपत, मेरठ- 10 सितम्बर को बागपत और मेरठ में जहरीली शराब के कारण 7 लाशें गिर गईं थीं. बागपत के चमरावल गांव में 5 जबकि मेरठ के जानी हलके में 2 की मौत हो गयी थी.

कानपुर- 12 अप्रैल 2020 को कानपुर के घाटमपुर में जहरीली शराब से 2 लोगों की मौत हो गई थी. इस तरह सभी मौतों को जोड़ दिया जाये तो ये संख्या 24 पर जाकर रूकती है. इसमें कुछ इजाफा ही हुआ होगा क्योंकि बड़ी संख्या में लोग इलाज के दौरान मौत से जूझ रहे थे.



यूपी की हर साल की यही कहानी है. पिछले कुछ सालों के आंकड़ों पर आईये गौर करते हैं कि जहरीली शराब से कितनी जिंदगियां मिट गयी.

हर साल दर्जनों लोगों की होती है मौत

2008- 16 लोगों की मौत

2009- 53 लोगों की मौत

2010- 62 लोगों की मौत

2011- 13 लोगों की मौत

2012- 18 लोगों की मौत

2013- 52 लोगों की मौत

2014- 5 लोगों की मौत

2015- 59 लोगों की मौत

2016- 41 लोगों की मौत

2017- 18 लोगों की मौत

2018- 17 लोगों की मौत

इसके अलावा साल 2019 में भी बड़े पैमाने पर मौतें हुई थीं. सहारनपुर और कुशीनगर में दर्जनों लोग मौत की नींद सो गये थे.

ये रहीं बड़ी घटनायें

2009 में सहारनपुर में 32, 2010 में वाराणसी में 20, 2013 में आजमगढ़ में 40, 2016 में लखनऊ में 36 और साल 2016 में ही एटा में 41 लोगों की जान गई थी. हर घटना के बाद आबकारी विभाग और पुलिस के अफसरों पर गाज गिरती है लेकिन ये सिलसिला थमने का नाम ही नहीं ले रहा है.
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