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जानिए राज्यों के चुनाव में कांग्रेस की जीत का यूपी की सियासत पर क्या होगा असर?

जानिए राज्यों के चुनाव में कांग्रेस की जीत का यूपी की सियासत पर क्या होगा असर?

कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी की फाइल फोटो

कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी की फाइल फोटो

विशेषज्ञों का कहना है कि हिंदी हार्टलैंड में कांग्रेस की वापसी से यूपी की सियासी फिजा भी बदलेगी. यूपी में कांग्रेसी कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ेगा. साथ ही सपा और बसपा गठबंधन में भी कांग्रेस की एंट्री मजबूरी होगी. इतना ही नहीं कांग्रेस अगर अकेले भी लड़ती है तो उसकी स्थिति मजबूत होगी.

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    पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव परिणाम के रुझानों में कांग्रेस के बेहतर प्रदर्शन के बाद यूपी की सियासत में भी हलचल तेज हो गई है. हिंदी भाषी प्रदेश मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान में कांग्रेस सरकार में वापसी करती नजर आ रही है. जिसके बाद पॉलिटिकल विशेषज्ञों का मानना है कि लोकसभा चुनाव में इन परिणामों का असर यूपी की सियासत में भी देखने को मिलेगा.

    विशेषज्ञों का कहना है कि हिंदी हार्टलैंड में कांग्रेस की वापसी से यूपी की सियासी फिजा भी बदलेगी. यूपी में कांग्रेसी कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ेगा. साथ ही सपा और बसपा गठबंधन में भी कांग्रेस की एंट्री मजबूरी होगी. इतना ही नहीं कांग्रेस अगर अकेले भी लड़ती है तो उसकी स्थिति मजबूत होगी.

    वरिष्ठ पत्रकार सिद्धार्थ कलहंस के मुताबिक तीन राज्यों छत्तीसगढ़, राजस्थान और मध्य प्रदेश में बीजेपी को भारी नुकसान हो रहा है. जबकि कांग्रेस सत्ता में वापसी करती दिख रही. इन राज्यों के चुनाव परिणाम का असर लोकसभा चुनाव के दौरान यूपी में भी देखने को मिलेगा. पहले जहां कांग्रेस अकेले चुनाव में उतरने डर रही थी अब उसका मनोबल बढ़ेगा और वह अकेले भी मैदान में उतर सकती है.

    उन्होंने कहा कि हार के बाद हार से जिन कांग्रेसी कार्यकर्ताओं का मनोबल टूटा हुआ था इन नतीजों से उसका उत्साह बढ़ेगा. साथ ही राहुल के नेतृत्व को भी मजबूती मिलेगी. यूपी में कांग्रेस के लिए इन राज्यों के चुनाव परिणाम मोरल बूस्टर की तरह काम करेगा.

    कलहंस के मुताबिक सपा और बसपा जिस गठबंधन को लगभग लगभग बना चुकी हैं और कांग्रेस को शामिल करने पर असमंजस में थे अब उन्हें अपनी रणनीति बदलनी पड़ेगी. इन चुनाव नतीजों से सपा और बसपा को अब कांग्रेस को भी तवज्जो देनी पड़ेगी. खासकर सीटों को लेकर सपा और बसपा को रणनीति बदलनी होगी. इसके अलावा ये चुनाव नतीजे बीजेपी के खिलाफ बनने वाले महागठबंधन में भी कांग्रेस की स्वीकार्यता भी बढ़ेगी.

    दरअसल यूपी में हासिए पर पहुंच चुकी कांग्रेस को इन विधानसभा चुनाव के परिणामों से जहां संजीवनी मिलेगी, वहीं लोकसभा चुनाव में होने वाले सपा-बसपा गठबंधन में सीटों के बंटवारे को लेकर उसकी बार्गेन पॉवर भी बढ़ेगी. कलहंस के मुताबिक अगर कांग्रेस अकेले चुनाव लड़ती है तो वह 15 से 25 सीटें जीत सकती है. उन्होंने कहा कि 2014 में भी 9 सीटें पर कांग्रेस उम्मीदवार को 3 लाख से ज्यादा वोट मिले थे. इसके अलावा इन चुनाव परिणामों ने यह भी दिखाया है कि बड़ी संख्या में अल्पसंख्यक और दलित वर्ग कांग्रेस के साथ आया है. यूपी के शहरी सीटों पर भी कांग्रेस की पकड़ रही है, जहां अल्पसंख्यक और दलित वोटर ज्यादा हैं. लिहाजा कांग्रेस अगर अकेले लड़ती है तो भी 25 सीटें जीतने का माद्दा रखती है.

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    Tags: Assembly Election 2018, BJP, Congress, Lucknow news, Up news in hindi

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