...तो इस बार भी दिल्ली का रास्ता उत्तर प्रदेश से होकर जाएगा?

लखनऊ से भाजपा के वरिष्ठ नेता व गृहमंत्री राजनाथ सिंह चुनाव मैदान में है, जबकि सपा-बसपा गठबंधन ने पूर्व फिल्म नायिका पूनम सिन्हा को मैदान में उतारा है.

News18 Uttar Pradesh
Updated: May 20, 2019, 10:57 AM IST
...तो इस बार भी दिल्ली का रास्ता उत्तर प्रदेश से होकर जाएगा?
फाइल फोटो
News18 Uttar Pradesh
Updated: May 20, 2019, 10:57 AM IST
कहा जाता है कि दिल्ली की सत्ता तक जाने वाला रास्ता उत्तर प्रदेश से होकर गुजरता है. उत्तर प्रदेश ही केंद्र में सरकार बनाने में अहम रोल अदा करता है, क्योंकि यहां अन्य राज्यों के मुकाबले सबसे ज्यादा 80 सीटें हैं. ऐसे में जो पार्टी इस राज्य में ज्यादा से ज्यादा सीटों पर जीत दर्ज करती है लगभग केंद्र में उसकी ही सरकार बनती है. यही वजह है कि लोकसभा के चुनाव में पूरे देश की नजर यूपी पर रहती है.

राजनीतिक जानकारों का कहना है कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश और पूर्वी उत्तर प्रदेश की जनता को एक साथ नहीं समझा जा सकता है क्योंकि दोनों हिस्से की जनता के मुद्दे और मांग अलग-अलग हैं. यही वजह है कि यह चुनाव इस बार जातीय व साम्प्रदायिक गोलबंदी में जकड़े पूर्वांचल को नई दिशा दे सकता है. बता दें कि पूर्वांचल के प्रवेश द्वार फैजाबाद (अयोध्या) से शुरू होकर लखनऊ, गोरखपुर, आजमगढ़ और बनारस के रास्ते ही दिल्ली पहुंचने का सफर पूरा होता है.

ऐसे में यूपी का पूर्वांचन किसी भी पार्टी के लिए और महत्वपूर्ण हो जाता है, क्योंकि पूर्वी उत्तर प्रदेश में कुल 40 संसदीय सीटें है, जिन पर कब्जा पाने के लिए राजनीतिक दलों में बीच विकट सियासी जंग जारी रहती है. पुश्तैनी विरासत बचाने के लिए गांधी परिवार अमेठी, रायबरेली और सुल्तानपुर की चुनावी मैदान में है. अमेठी में राहुल गांधी, रायबरेली में सोनिया गांधी और सुल्तानपुर से मेनका गांधी ने चुनाव लड़ा है.

वहीं, लखनऊ से भाजपा के वरिष्ठ नेता व गृहमंत्री राजनाथ सिंह चुनाव मैदान में है, जबकि सपा-बसपा गठबंधन ने पूर्व फिल्म नायिका पूनम सिन्हा मैदान में हैं. आजमगढ से सपा-बसपा गठबंधन के साझा प्रत्याशी अखिलेश यादव हैं, जबकि उनके खिलाफ भाजपा ने भोजपुरी गायक व हीरो दिनेश लाल उर्फ निरहुआ को उतारा है.

गोरखपुर संसदीय सीट खुद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की प्रतिष्ठा का सवाल बन चुकी है. बात यदि बनारस की करें तो यहां पहले शालिनी यादव को टिकट देना फिर नकारना और मजबूरी में फिर घोषित करना उनके प्रतिबद्ध वोटरों को बहुत बुरा लगा. खासतौर से यादव नेताओं ने इसकी खुलकर आलोचना भी की, जिसका खामियाजा उन्हें इन सभी सीटों पर उठाना पड़ सकता है.

ये भी पढ़ें- 

Bihar Exit Poll Results 2019: बिहार एग्जिट पोल में BJP-JDU को 34-36 सीटें, कांग्रेस गठबंधन को 4-6 सीटें
बिहार: तेजस्‍वी कर रहे थे संविधान बचाने की लड़ाई लड़ने का दावा, खुद नहीं डाला वोटExit Poll

Results 2019: बिहार-झारखंड में महागठबंधन फेल, NDA को बढ़त!

थोड़ी देर में आएंगे Exit polls 2019 के नतीजे, बिहार के इन दिग्गजों पर टिकी निगाहें

गोपालगंज: ट्रेन की चपटे में आने से 70 वर्षीय बुजुर्ग की मौत
Loading...
पूरी ख़बर पढ़ें अगली ख़बर
Loading...