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यूं ही नहीं है मायावती का अकेले यूपी विधानसभा उपचुनाव लड़ने का फैसला

Amit Tiwari | News18 Uttar Pradesh
Updated: June 6, 2019, 11:35 AM IST
यूं ही नहीं है मायावती का अकेले यूपी विधानसभा उपचुनाव लड़ने का फैसला
बसपा सुप्रीमो मायावती की फाइल फोटो

प्रधानमंत्री बनने का सपना टूटने के बाद अब मायावती 2022 के विधानसभा चुनाव में मुख्यमंत्री बनने का ख्वाब देख रही हैं.

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लोकसभा चुनाव में गठबंधन के बावजूद अपेक्षाकृत सफलता न मिलने के बाद बसपा सुप्रीमो मायावती ने प्रदेश में 12 विधानसभा सीटों पर होने वाले उपचुनाव में अकेले उतरने का ऐलान किया है. दरअसल, गठबंधन तोड़कर पहली बार उपचुनाव लड़ने का फैसला करना मायावती के लिए एक प्रयोग है. जानकारों की मानें तो प्रधानमंत्री बनने का सपना टूटने के बाद अब वह 2022 के विधानसभा चुनाव में मुख्यमंत्री बनने का ख्वाब देख रही हैं. यही वजह है कि उन्होंने गठबंधन अपरोक्ष रूप से तोड़ दिया है. क्योंकि गठबंधन के समय यही तय हुआ था कि मायावती राष्ट्रीय राजनीति में होंगी और अखिलेश प्रदेश की विरासत संभालेंगे.

जब लोकसभा चुनाव के परिणाम अनुकूल नहीं आए तो राजनीति ने दूसरी तरफ करवट ले ली है. सपा और बसपा एक बार फिर नई परिस्थितियों में खुद को आंकने की बात कर रहे हैं. दरअसल मायावती अब फिर से यूपी पर ध्यान केंद्रित करना चाहती हैं. शून्य से 10 पर पहुंची मायावती का पीएम बनने का सपना धराशायी होने के बाद अपने कोर वोटर के साथ मुस्लिम वोट बैंक का प्रयोग उपचुनाव में करना चाहती हैं. मायावती यह देखना चाहती हैं कि दलित-मुस्लिम वोटर उनके लिए कितना फायदेमंद हैं. साथ ही वह उपचुनाव में कुछ सीटें जीतकर राज्यसभा के लिए भी अपनी दावेदारी मजबूत करना चाहती हैं.

10 में से 8 सीटों पर बसपा को मिले 50 फीसदी से ज्यदा वोट
वैसे अगर बात करें वोट शेयर की तो बसपा का मत प्रतिशत कम हुआ है. बावजूद इसके पार्टी 10 सीटें जीतने में कामयाब रही. इतना ही नहीं आठ सीटों पर उसका मत प्रतिशत 50 फ़ीसदी से भी ऊपर रहा है. ये वो सीटें हैं जहां मुस्लिम वोटर निर्णायक भूमिका में है. मसलन सहारनपुर, नगीना, बिजनौर घोसी. यही वजह है कि मायावती आने वाले उपचुनाव में इस प्रयोग को एक बार फिर आजमाना चाहती हैं. ताकि 2022 के विधानसभा चुनाव से पहले वह अपनी रणनीति को अमली जामा पहना सकें.

11 सीटों में 7 पर बीजेपी के कुल वोट सपा-बसपा गठबंधन से अधिक
अकेले उपचुनाव में उतरने की एक वजह ये भी है कि जिन 11 सीटों पर उपचुनाव होने हैं, वहां सपा-बसपा गठबंधन का अंकगणित भी उनके साथ नहीं है. 2017 के चुनाव के मुताबिक 11 में से सात सीटों पर बीजेपी को मिले वोट सपा-बसपा के वोट से ज्यादा हैं. इन 11 सीटों में से बीजेपी के पास 9 सीटें थीं जबकि एक-एक सीट सपा और बसपा के खाते में गई थी. सपा और बसपा की जीती हुई सीट को छोड़ दिया जाए तो जैदपुर और प्रतापगढ़ सीट पर ही गठबंधन के कुल वोट बीजेपी से अधिक हैं.

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First published: June 6, 2019, 11:05 AM IST
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