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... तो इस वजह से शत्रुघ्न सिन्हा की पत्नी को सपा ने राजनाथ के खिलाफ बनाया प्रत्याशी

डिंपल यादव ने पूनम सिन्हा को पार्टी की सदस्यता दिलाई

डिंपल यादव ने पूनम सिन्हा को पार्टी की सदस्यता दिलाई

समाजवादी पार्टी लखनऊ सीट से किसी ऐसे चेहरे को मैदान में उतारने की तैयारी में थी जो राजनाथ सिंह को टक्कर देता दिखे.

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राजधानी लखनऊ की हाई-प्रोफाइल सीट से बीजेपी प्रत्याशी राजनाथ सिंह को गठबंधन की तरफ से सपा प्रत्याशी पूनम सिन्हा टक्कर देंगी. पूनम सिन्हा बीजेपी छोड़कर कांग्रेस में शामिल हुए शत्रुघ्न सिन्हा की पत्नी हैं. मंगलवार (16 अप्रैल) को पूनम सिन्हा ने डिंपल यादव और मुलायम सिंह यादव की मौजूदगी में पार्टी की सदस्यता ग्रहण की. वह 18 अप्रैल को एक रोड शो के बाद नामांकन करेंगी.

पूर्व मंत्री और समाजवादी पार्टी के नेता रविदास मेहरोत्रा ने कहा कि पूनम सिन्हा 18 अप्रैल को नामांकन करेंगी. उन्होंने दावा किया कि पूनम बीजेपी को हरा देंगी. उन्होंने कांग्रेस से भी अपील किया कि वह लखनऊ से कोई प्रत्याशी न उतारे.

दरअसल, समाजवादी पार्टी लखनऊ सीट से किसी ऐसे चेहरे को मैदान में उतारने की तैयारी में थी जो राजनाथ सिंह को टक्कर देता दिखे. पिछले दिनों शत्रुघ्न सिन्हा की सपा मुखिया अखिलेश यादव से मुलाक़ात भी हुई थी. इस मुलाकात के दौरान पूनम सिन्हा को लखनऊ से टिकट देने की बात हुई थी, लेकिन समाजवादी पार्टी चाहती थी कि पहले शत्रुघ्न सिन्हा कांग्रेस में शामिल हो जाएं, ताकि लखनऊ सीट से विपक्ष का एक साझा उम्मीदवार मैदान में हो.

कहा जा रहा है कि शत्रुघ्न सिन्हा ने कांग्रेस हाईकमान को इस बात के लिए सहमत कर लिया है कि पार्टी लखनऊ लखनऊ से कोई प्रत्याशी मैदान में खड़ा नहीं करेगी. जिससे वोटों के बंटवारे को रोका जा सके.

पूनम सिन्हा को मैदान में उतारने के पीछे की एक वजह ये भी है कि लखनऊ में करीब ढाई लाख के आस-पास कायस्थ मतदाता है. साथ ही उनके नाम के साथ शत्रुघ्न सिन्हा का स्टारडम भी है. इतना ही नहीं पूनम सिन्हा खुद सिन्धी परिवार से आती हैं.

उधर, गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने मंगलवार को एक रोड शो के बाद नामांकन किया. लखनऊ में पांचवें चरण के दौरान 6 मई को मतदान होना है. नामांकन की आखिरी तारीख 18 अप्रैल है.

लखनऊ सीट पिछले दो दशक से बीजेपी का एक मजबूत गढ़ रही है. इस सीट पर कब्जे के लिए कांग्रेस समेत समाजवादी पार्टी और बसपा हमेशा से ही जोर आजमाइश करती रही हैं. लेकिन अटल बिहारी वाजपेयी की इस सीट को कब्जाने में कामयाब नहीं रहे. 2007 में अटल के राजनीति से संन्यास लेने के बाद इस सीट से 2009 में लालजी टंडन सांसद बने. उसके बाद 2014 में राजनाथ सिंह यहां से भारी मतों से जीते.

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