आखिर चार चरणों के बाद ही क्यों माया-अखिलेश पर सख्त हुए राहुल गांधी?
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आखिर चार चरणों के बाद ही क्यों माया-अखिलेश पर सख्त हुए राहुल गांधी?
राहुल-प्रियंका की फाइल फोटो

दरअसल पहले के चार चरण में जहां चुनाव हुए वहां कांग्रेस कहीं लड़ाई में नहीं थी. अब बाकी के तीन चरण में पूर्वांचल और अवध क्षेत्र में चुनाव होने है. ये वो सीटें हैं जहां से कांग्रेस ने 2009 में ज्यादातर सीटें हासिल की थी.

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शुरुआत के चार चरणों के मतदान संपन्न होने के बाद बाराबंकी में चुनाव प्रचार के दौरान कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव और बसपा सुप्रीमो मायावती पर पहली बार खुलकर हमला बोला. उन्होंने कहा कि मायावती और अखिलेश का रिमोट कंट्रोल मोदी के पास है, क्योंकि उनकी हिस्ट्री है. मेरी कोई हिस्ट्री नहीं, इसलिए मोदी मुझ पर दबाव नहीं बना सकते. राहुल गांधी के इस हमले के बाद सवाल ये उठने लगा हैं कि चार चरणों का मतदान संपन्न होने के बाद ही राहुल ने गठबंधन पर निशाना क्यों साधा.

न्यूज18 के पॉलिटिकल एडिटर मनमोहन राय कहते हैं दरअसल पहले के चार चरण में जहां चुनाव हुए वहां कांग्रेस कहीं लड़ाई में नहीं थी. अब बाकी के तीन चरण में पूर्वांचल और अवध क्षेत्र में चुनाव होने है. ये वो सीटें हैं जहां से कांग्रेस ने 2009 में ज्यादातर सीटें हासिल की थी. लिहाजा राहुल गांधी कांग्रेस को बीजेपी से मुकाबला करता दिखाना चाहते हैं. इसी वजह से उन्होंने अब सीधा हमला शुरू किया है.

मनमोहन राय कहते हैं कांग्रेस अध्यक्ष ने इसी वजह से पूर्वांचल और अवध क्षेत्र की कमान प्रियंका गांधी को सौंपी है. उन्होंने लगता है कि यूपी की बाकी की बची 41 सीटों पर वह अच्छा कर सकती है. उन्होंने कहा कि 2014 के चुनाव में बीजेपी ने इस क्षेत्र की दो तीन सीटों को छोड़कर सभी पर कब्ज़ा जमाया था. इस बार कांग्रेस को बीजेपी के अलावा गठबंधन से भी चुनौती मिल रही है. लिहाजा कांग्रेस, सपा व बसपा खुद को बीजेपी का प्रतिद्वंदी साबित करने में लगी हुई है.



बता दें 2009 में कांग्रेस को यूपी से 21 सीटें हासिल हुई थीं. इनमे से ज्यादातर सीटें अवध क्षेत्र और पूर्वांचल की थीं. इस बार अकेले चुनाव मैदान में उतरी कांग्रेस की पूरी उम्मीदें इन्हीं क्षेत्रं में पड़ने वाली सीटों से हैं. आखिरी के तीन चरण में कांग्रेस के कई दिग्गजों का भी इम्तिहान होना है. इसमें खुद राहुल गांधी, सोनिया गांधी, संजय सिंह, जितिन प्रसाद, सावित्री बाई फुले, कैसर जहां, तनुज पुनिया, आरपीएन सिंह जैसे नाम शामिल हैं.
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