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संतकबीर नगर: BJP सांसद-विधायक में जूतम-पैजार यूं ही नहीं हुआ, ये है अहम वजह!
Lucknow News in Hindi

Amit Tiwari | News18 Uttar Pradesh
Updated: March 7, 2019, 2:50 PM IST
संतकबीर नगर: BJP सांसद-विधायक में जूतम-पैजार यूं ही नहीं हुआ, ये है अहम वजह!
सांसद और विधायक में हुई जूतम-पैजार

दरअसल, दोनों ही नेताओं के बीच लंबे समय से वर्चस्व की लड़ाई चली आ रही है. कहा जा रहा है कि 2017 में राकेश सिंह बघेल के विधायक बनने के बाद यह लड़ाई अंदर ही अंदर और तेज होने लगी.

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संतकबीर नगर से बीजेपी सांसद शरद त्रिपाठी और मेहदावल से विधायक राकेश सिंह बघेल के बीच जूतम-पैजार अचानक या आकस्मक हुई घटना नहीं थी. दरअसल दोनों के बीच तनातनी पिछले करीब दो वर्षों से चली आ रही थी. बुधवार शाम को यह पुरानी अदावत जूतों की बारिश के साथ ही आम लोगों के सामने आ गई.

योगी सरकार बनने के बाद बघेल की तूती बोलने लगी

दरअसल, दोनों ही नेताओं के बीच लंबे समय से वर्चस्व की लड़ाई चली आ रही है. कहा जा रहा है कि 2017 में राकेश सिंह बघेल के विधायक बनने के बाद यह लड़ाई अंदर ही अंदर और तेज होने लगी. यहां तक कि सूबे में योगी सरकार बनते ही राकेश सिंह बघेल की जिले में तूती बोलने लगी. पुलिस और जिला प्रशासन भी उन्हें तवज्जो देने लगा. इसकी वजह यह भी बताई जाती है कि बघेल मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के करीबी माने जाते हैं. इसके अलावा 2018 में राकेश सिंह बघेल का कथित ऑडियो भी वायरल हुआ था, जिसमें वे ब्राह्मण को विटामिन-बी बता रहे थे. उनका कहना था कि शहर से विटामिन-बी को बाहर करना है.



पीएम मोदी के दौरे के बाद एकजुट हो गए जिले के तीनों विधायक



संसद और विधायक के बीच यह तनातनी और बढ़ गई जब पिछले साल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कबीरदास के परिनिर्वाण स्थल मगहर गए थे. बीजेपी के सांसद शरद त्रिपाठी ने मगहर की जनसभा के मंच पर अपने संसदीय क्षेत्र के तीनों विधायकों को जगह नहीं दी थी. सांसद के इस रवैए से तीनों विधायक खिन्न हो गए और शरद त्रिपाठी के खिलाफ अपनी नाराजगी सार्वजनिक रूप से जाहिर की साथ ही वे एक हो गए. इसके बाद फिर नाम क्रेडिट लेने का सिलसिला शुरू हुआ. राज्य सरकार के निर्माण कार्यों से सांसद का नाम हटाया जाने लगा तो सांसद निधि से हुए कार्यों में विधायक को कोई क्रीडत नहीं दी गई. बीजेपी सांसद और मेंहदावल के विधायक के बीच अहम का टकराव जिले में पार्टी के 'मेरा बूथ सबसे मजबूत' सहित कई कार्यक्रमों के दौरान साफ तौर पर दिखाई दिया.

टिकट की दावेदारी को लेकर तेज हुई लड़ाई

दोनों के बीच तनातनी की एक वजह 2019 के लोकसभा टिकट की दावेदारी भी है. दरअसल, सपा-बसपा गठबंधन के तहत यह सीट बसपा के खाते में गई है. जिसकी वजह से सपा के दिग्गज भालचंद्र यादव खफा हैं और बीजेपी से टिकट की बात कर रहे हैं. कहा जा रहा है कि उनकी मुलाकात बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह से हो चुकी अहि और उन्होंने आश्वासन भी मिला है. इतना ही नहीं यह भी कहा जा रहा है कि संतकबीर नगर लोकसभा क्षेत्र के तहत आने वाली मेंहदावल विधानसभा सीट से विधायक राकेश सिंह बघेल सांसद शरद त्रिपाठी के टिकट का विरोध कर रहे थे. यह खबर भी शरद त्रिपाठी तक पहुंच चुकी थी. बुधवार को मीटिंग में बात शिलापट पर नाम न होने से शुरू हुआ. जिसके बाद सांसद जेई से सवाल पूछ रहे थे कि नाम क्यों नहीं ही. इस पर बघेल ने बीच में ही टोका. जिसके बाद बात इतनी बढ़ी की जूते मारने तक पहुंच गई.

अब देखना दिलचस्प होगा की पार्टी आला कमान इस मामले में क्या कार्रवाई करता है. दोनों ही नेताओं को प्रदेश अध्यक्ष डॉ महेंद्र नाथ पाण्डेय ने लखनऊ तलब किया है. लेकिन बीजेपी की अंदरूनी कलह लोकसभा चुनाव से पहले उसके मंसूबों पर पानी फेर सकता है.

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First published: March 7, 2019, 2:50 PM IST
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