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यूपी में पेंशन का टेंशन: जानिए पिछले 4 महीने में हड़ताल, आश्वासन और फिर हड़ताल की कहानी

Ajayendra Rajan | News18Hindi
Updated: February 5, 2019, 12:08 PM IST
यूपी में पेंशन का टेंशन: जानिए पिछले 4 महीने में हड़ताल, आश्वासन और फिर हड़ताल की कहानी
अक्टूबर में पुरानी पेंशन बहाली को लेकर सीएम योगी से मुलाकात के दौरान कर्मचारियों का प्रतिनिधिमंडल. Photo: News 18

राज्य कर्मचारियों की मांग है कि 1 अप्रैल 2005 से लागू न्यू पेंशन स्कीम (एनपीएस) की जगह पुरानी व्यवस्था लागू की जाए, ताकि रिटायरमेंट के बाद कर्मचारी के परिवार का भविष्य सुनिश्चित हो सके.

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  • Last Updated: February 5, 2019, 12:08 PM IST
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पुरानी पेंशन बहाली को लेकर उत्तर प्रदेश के लाखों कर्मचारी एक बार फिर हड़ताल की तैयारी कर रहे हैं. कर्मचारी नेताओं का कहना है कि सरकार मामले में निर्णय के लिए बार-बार समय मांगती है, समय दिया जा चुका है, अब निर्णायक लड़ाई होगी. उधर सरकार ने भी मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए प्रदेश में हड़ताल पर बैन लगा दिया है.

दरअसल राज्य कर्मचारियों की मांग है कि 1 अप्रैल 2005 से लागू न्यू पेंशन स्कीम (एनपीएस) की जगह पुरानी व्यवस्था लागू की जाए, ताकि रिटायरमेंट के बाद कर्मचारी के परिवार का भविष्य सुनिश्चित हो सके. दरअसल, पुरानी पेंशन बहाली की मांग उठाने वाले संगठनों का कहना है कि एनपीएस पूरी तरह से फेल है. लागू होने के 15 साल बाद भी यह व्यवस्था अभी तक पटरी पर नहीं आ सकी है. ऐसे में रिटायर हो चुके या रिटायर होने वाले कर्मचारियों को मिलने वाला जीपीएफ का पैसा भी फंसा है.

हड़ताल का ऐलान और सरकार ने शुरू किया मान मनौव्वल

दरअसल पिछले साल अक्टूबर के महीने में पुरानी पेंशन व्यवस्था बहाली को लेकर सरकारी कर्मचारियों ने हड़ताल का ऐलान कर दिया. तय हुआ कि 25 अक्टूबर से 27 अक्टूबर तक ये हड़ताल होगी. ऐलान के फौरन बाद यूपी सरकार में हड़कंप मच गया, सरकार की तरफ से हड़ताल ​रोकने के तमाम प्रयास शुरू किए गए. मामले में मुख्य सचिव व आला अधिकारियों से कर्मचारी नेताओं की कई दौर की मुलाकात हुई लेकिन बात नहीं बनी. आखिरकार मामले में खुद सीएम योगी ने दखल दिया और उन्होंने कर्मचारी, शिक्षक अधिकारी पुरानी पेंशन बहाली मंच के प्रतिनिधिमंडल को मुलाकात के लिए बुला लिया.

सीएम योगी ने किया 8 सदस्यीय कमेटी का ऐलान

इसके बाद मुख्यमंत्री योगी ने बैठक में एक 8 सदस्यीय कमेटी बनाने का ऐलान किया. इसके बाद मुख्य सचिव द्वारा जारी आदेश के अनुसार कर्मचारी, शिक्षक, अधिकारी पुरानी पेंशन बहाली मंच द्वारा उत्तर प्रदेश शासन के संज्ञान में लाया गया है कि नई पेंशन व्यवस्था के क्रियान्वयन में आ रही कठिनाइयों और इसके अंतर्गत कर्मचारियों को सेवानिवृत्ति के बाद लाभ स्पष्ट नहीं हैं. यही नहीं इस प्रणाली के लागू होने के कई साल बाद भी अनिश्चितता बनी हुई है. कर्मचारी संगठनों ने मांग की है कि 1 अप्रैल 2005 से पूर्व की तरह सुनिश्चित पेंशन ​का लाभ मिलना चाहिए. इस पूर्ण स्थिति की समीक्षा की जाए.

सीएम योगी के निर्देश पर राज्य सरकार ने कर्मचारियों की इस मांग पर आठ सदस्यीय कमेटी का गठन किया. इसमें अपर मुख्य सचिव, नियुक्ति एवं कार्मिक अध्यक्ष बनाए गए. वहीं अध्यक्ष, पीएफआरडीए, अपर मुख्य सचिव नियोजन, अपर मुख्य सचिव वित्त, प्रमुख सचिव न्याय, निदेशक, पेंशन को सदस्य बनाया गया. यही नहीं डिप्टी सीएम डॉ दिनेश चंद्र शर्मा और पेंशन मंच के संयोजक हरि किशोर तिवारी को विशेष आम़ंत्रित सदस्य बनाया गया. साथ ही तय हुआ कि समिति जरूरत के हिसाब से अन्य लोगों को भी आमंत्रित कर सकेगी. कहा गया कि यह समिति कर्मचारी संगठनों और सभी हित धारकों से विचार-विमर्श कर दो महीने में अपनी संस्तुति उपलब्ध कराएगी.कमेटी ने कोई काम नहीं किया, सिर्फ टाइम पास किया: पेंशन बहाली मंच

मामले में कर्मचारी, शिक्षक अधिकारी पुरानी पेंशन बहाली मंच के संयोजक हरिकिशोर तिवारी कहते हैं कि इस कमेटी ने दो महीने तक कोई काम ही नहीं किया. ये छोटे अधिकारी निर्णय लेने के लिए भेज देते थे. इन्होंने सिर्फ समय पास किया और कुछ नहीं किया.

उन्होंने कहा कि मुख्य सचिव व अन्य आला अधिकारियों के साथ सोमवार रात को करीब दो घंटे मंच के पदाधिकारियों के साथ बैठक हुई लेकिन इसमें कोई निर्णय नहीं हो सका है. अब फिर कह रहे हैं कि समय दे दो. हमने कहा अब तक चुनाव आ गया है. आपने तो चुनावी वादे भी हमारे साथ किए थे. ऐसे में हम समय कैसे दे सकते हैं. हमने तीन महीने का समय दिया, आपने खत्म कर दिया.

हरिकशोर तिवारी ने कहा कि सरकार की तरफ से कहा जा रहा है कि वह 10500 करोड़ रुपए बैकलॉग के दे देंगे. उन्होंने कहा कि ऐसा कहकर सरकार कर्मचारी पर कोई एहसान तो कर नहीं रही है, जो पैसा उसे समय पर डालना चाहिए था, उसने नहीं डाला. ये उसे देना ही है.

हरिकिशोर तिवारी कहते हैं कि हम मंगलवार को प्रदेश भर में कर्मचारियों को लामबंद करने के लिए मोटरसाइकिल जुलूस निकाल रहे हैं. 6 फरवरी से हमारी हड़ताल शुरू हो जाएगी. ये 12 फरवरी तक चलेगी. 12 फरवरी तक सरकार अगर कोई निर्णय नहीं लेती है, हमारी मांगें नहीं मानती है तो 12 फरवरी को ही महा आन्दोलन की घोषणा होगी.

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First published: February 5, 2019, 12:08 PM IST
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