UP: जानिए कैसे चुने जाते हैं विधान परिषद के शिक्षक और स्नातक कोटे से माननीय? कैसे बनें मतदाता?

लखनऊ में स्थिति उत्तर प्रदेश विधानभवन (File Photo)
लखनऊ में स्थिति उत्तर प्रदेश विधानभवन (File Photo)

विधान परिषद (Legislative Assembly) के सदस्यों की संख्या अलग-अलग राज्यों में अलग-अलग होती है. फिर भी एक कॉमन पैरामीटर है- विधान परिषद में विधानसभा के एक-तिहाई से ज्यादा सदस्य न हों और कम से कम 40 तो हों ही. उत्तरप्रदेश की विधानपरिषद की संख्या 100 है.

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लखनऊ. उत्तर प्रदेश विधानपरिषद (UP Legislative Council) में शिक्षक और स्नातक की 11 सीटों के लिए चुनाव (MLC Election) का ऐलान हो गया है. इसके लिए वोटिंग एक दिसंबर को होगी. ये चुनाव दूसरे विधान परिषद सदस्यों के लिए होने वाले चुनाव से अलग हैं. इसमें वोटिंग डालने का अधिकार भी सभी को नहीं होता. तो आइए जानते हैं उत्तर प्रदेश में कैसे बनते हैं शिक्षक और स्नातक वोटर और कैसे बनते हैं शिक्षक व स्नातक कोटे के विधान परिषद सदस्य?

विधान परिषद के सदस्यों की संख्या अलग-अलग राज्यों में अलग-अलग होती है. फिर भी एक कॉमन पैरामीटर है- विधान परिषद में विधानसभा के एक-तिहाई से ज्यादा सदस्य न हों और कम से कम 40 तो हों ही. उत्तरप्रदेश की विधानपरिषद की संख्या 100 है. इसमें से एक-तिहाई सदस्यों को विधायक मिलकर चुनते हैं. एक-तिहाई सदस्यों को नगर निगम, जिला बोर्ड वगैरह के सदस्य चुनते हैं.

1/12 सदस्यों को टीचर्स और 1/12 सदस्यों को रजिस्टर्ड ग्रेजुएट्स चुनते हैं. बाकी सदस्यों को राज्यपाल नॉमिनेट करते हैं. कार्यकाल 6 साल का होता है. विधान परिषद के शिक्षक और स्नातक क्षेत्र के चुनाव में वोटर्स शिक्षक और रजिस्टर्ड ग्रेजुएट्स ही भाग लेते हैं यानी इस चुनाव में सिर्फ पढ़े-लिखे लोग ही वोट डाल सकते हैं. ये दो अलग-अलग चुनाव हैं.



शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र 
विधान परिषद की 100 सीटों में 8 सीटें शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र की हैं.

ये आठ सीटें हैं-

बरेली-मुरादाबाद डिवीजन

लखनऊ डिवीजन

गोरखपुर-फैजाबाद डिवीजन

वाराणसी डिवीजन

इलाहाबाद-झांसी डिवीजन

कानपुर डिवीजन

आगरा डिवीजन

मेरठ डिवीजन

इनमें से 6 सीटों के लिए मतदान हो रहा है.

ये है प्रक्रिया

शिक्षक कोटे से विधानपरिषद सदस्य रहे उमेश द्विवेदी कहते हैं कि वे शिक्षक, जो कम से कम 3 साल से पढ़ा रहे हैं, वोटर बनने के लिए अप्लाई कर सकते हैं. इसी तरह ऐसे शिक्षक, जिन्हें रिटायर हुए 3 साल से ज्यादा न हुआ हो, वो भी वोट डाल सकते हैं.

-वोटर बनने के लिए शिक्षकों को फॉर्म-19 भरना होता है. इसमें नाम, गांव, स्कूल-कॉलेज का विवरण भरना होता है. इनका प्रूफ देना होता है.

- घर के पते के लिए राशनकार्ड, वोटर आईडी, पासपोर्ट वगैरह.

- जिस स्कूल-कॉलेज में आप पढ़ा रहे हैं, उसका प्रूफ भी लगाना होता है.

इस फॉर्म को प्रूफ के साथ के मतदाता पंजीकरण केन्द्रों पर जमा करना होता है. इसके बाद आगे की प्रक्रिया पूरी करने के बाद लिस्ट में नाम दिखने लगता है. अब इसे आप ऑनलाइन भी चेक कर सकते हैं. उमेश द्विदी कहते हैं कि यह ऐसी प्रक्रिया है, जिसमें दावेदार लोग ही वोटर बन सकते हैं. वे कहते हैं कि वित्तविहिन शिक्षकों को वोटर बनवाने के लिए भी उन्हें लड़ाई लड़नी पड़ी. हर 6 साल में चुनाव होते हैं. जिन टीचर्स के नाम वोटर लिस्ट में आ जाते हैं, वो वोट डालते हैं. ब्लॉक लेवल वोटिंग होती है.

स्नातक क्षेत्र का चुनाव

उत्तर प्रदेश विधान परिषद में स्नातक कोटे की भी 8 सीटें हैं. वोटर लिस्ट में नाम डलवाने के लिए अप्लाई वही लोग कर सकते हैं, जिन्हें ग्रेजुएशन किए हुए 3 साल हो गया हो. एक बार वोटर लिस्ट में नाम आने के बाद वोट डाल सकते हैं. स्नातक क्षेत्र का मतदाता बनने के लिए फार्म नम्बर-18 भरकर मतदाता पंजीकरण केन्द्रों पर जमा करना होता है. फार्म की जांच बीएलओ करते हैं.



ये चुनाव होता क्यों है?

संसदीय लोकतंत्र की पूरी व्यवस्था प्रतिनिधित्व के सिद्धांत पर चलती है. शिक्षकों और ग्रेजुएट को प्रतिनिधित्व देने के लिए इस कोटे से एमएलसी चुने जाते हैं. टीचर्स या ग्रेजुएट कोटे से चुने गए एमएलसी को भी विधायकों जितनी ही शक्तियां मिलती हैं. यहां तक कि वो मंत्री और मुख्यमंत्री भी बन सकते हैं.
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