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EXCLUSIVE: जानिए पूर्व ब्लॉक प्रमुख अजीत सिंह को आखिर क्यों मारी गईं 25 गोलियां?

पूर्व ब्लॉक प्रमुख अजीत सिंह को आखिर क्यों मारी गई 25 गोलियां? (फाइल फोटो)
पूर्व ब्लॉक प्रमुख अजीत सिंह को आखिर क्यों मारी गई 25 गोलियां? (फाइल फोटो)

अपराधियों ने बताने की कोशिश की है कि वे कितने हिम्मती हैं. कभी ऐसी हिम्मत श्रीप्रकाश शुक्ला (Shri Prakash Shukla) ने यूपी की सड़कों पर दिखाई थी.

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लखनऊ. उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में सनसनीखेज अजीत सिंह हत्याकांड (Ajeet Singh Murder Case) के बाद भी पुलिस के हाथ खाली हैं. पूर्व ब्लॉक प्रमुख अजीत सिंह की हत्या विधायक कृष्णानंद राय मर्डर केस की याद ताजा कराती है. क्योंकि 15 साल पहले 2005 में हुई कृष्णानंद राय की हत्या के बाद से इतनी वीभत्स हत्या की दूसरी घटना यही हुई है. कृष्णानंद राय पर भी गोलियों की बौछार हुई थी और अजीत सिंह पर भी ताबड़तोड़ गोलियां चलायी गयी हैं.

कृष्णानंद राय के शरीर से 35 गोलियां निकाली गयी थीं और अजीत सिंह के शरीर से 21. अब यही सवाल लोगों को मथ रहा है कि आखिर अजीत सिंह को इतनी गोलियां क्यों मारी गयीं? जहां दो-चार गोलियों से काम चल सकता था, वहां 25 गोलियां अजीत सिंह को क्यों मारी गयीं. इसे कई पहलुओं में समझा जा सकता है.

1. मौत सुनिश्चित करना
मारने के लिए भेजे गए शूटरों को ये साफ निर्देश थे कि किसी भी सूरत में अजीत सिंह बचना नहीं चाहिए. हर हाल में मौत होनी चाहिए. यही वजह रही कि अजीत सिंह पर तीन लोगों ने गोलियों की बौछार कर दी. शरीर के जिस जिस हिस्से में गोली लगने से एक इनसान की मौत हो जाती है, अजीत सिंह के हर उस हिस्से में गोली मारी गयी है. यानी मकसद साफ था, बचने नहीं देना है. हालांकि 25 गोलियां मारने का मतलब सिर्फ मौत को ही सुनिश्चित करना नहीं था.
2. दहशत कायम करना


यूपी पुलिस के डीजीपी से रिटायर हुए विक्रम सिंह ने कहा कि इजरायल की खुफिया एजेंसी मोसाद भी अपने टारगेट को 6 गोलियां मारती है. 5 सीने में और एक खोपड़ी में. किसी इंसान की मौत के लिए ये काफी है. फिर अजीत सिंह को 25 क्यों? इस सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि इसके पीछे दहशत कायम करना बड़ा मकसद दिखाई दे रहा है. जब चौराहे पर सबसे ज्यादा भीड़भाड़ थी तभी हमला करना और निश्चिंत होकर डेढ़-दो मिनट तक फायरिंग करना, इसी माइंडसेट को दर्शाता है. दहशत ही वो संजीवनी है जिसके दम पर माफिया जिंदा रहता है.

3. पूरी यूपी को आंख दिखाने की कोशिश
अजीत सिंह की हत्या को अंजाम देने वालों ने पूरी यूपी को अपना जलजला दिखाने की कोशिश की है. वसूली हो या फिर ठेकों में दखलअंदाजी, ऐसा लगता है कि इस जघन्य हत्याकांड को अंजाम देकर मार्केट में अपना सिक्का जमाने की कोशिश की गयी है.

4. दूसरे माफियाओं पर दबदबे का मैसेज
गोलियों की ज्यादा बारिश और वो भी बेखौफ अंदाज में, हमेशा से ही वर्चस्व को कायम करने का हथियार रही है. अजीत सिंह की हत्या प्लान करने वालों ने यूपी के दूसरे माफियाओं को ये मैसेज देने की कोशिश की है कि रास्ता खाली करो. अजीत सिंह को 25 गोलियां मारकर ये जताने की कोशिश की गयी है कि जो रास्ते में आएगा उसका अंजाम क्या होगा.

5. श्रीप्रकाश शुक्ला के स्टाइल की कॉपी
अजीत सिंह की हत्या करने वाले और करवाने वाले लोगों ने इस घटना से अपने दुस्साहस का भी परिचय दिया है. चौकी के सामने भयंकर भीड़वाले बाजार में डेढ़ मिनट तक फायरिंग करना कितने बड़े दुस्साहस की बात है. हमलावरों को न पुलिस का डर था न पब्लिक का. चश्मदीदों ने तो ये भी बताया है कि हत्या के बाद बाकायदा तस्दीक की गयी कि अजीत सिंह में जान नहीं बची है. वारदात की जगह पर इतना समय बीताना कोई हंसी-खेल नहीं है. अपराधियों ने बताने की कोशिश की है कि वे कितने हिम्मती हैं. कभी ऐसी हिम्मत श्रीप्रकाश शुक्ला ने यूपी की सड़कों पर दिखाई थी. अपराधी जानते हैं कि जितनी हिम्मत उतनी दहशत.

आरोपियों की तलाश में ताबड़तोड़ छापेमारी
इससे पहले घटना पर लखनऊ के पुलिस कमिश्नर डीके ठाकुर ने कहा कि मामले के खुलासे के लिए 5 टीमें लगाई गई हैं. मऊ, आजमगढ़ और पूर्वांचल के जिलों में भेजी गई हैं. सर्विलांस पर भी काम किया जा रहा है. कुंटू सिंह, अखंड प्रताप सिंह और गिरधारी विश्वकर्मा और तीन अज्ञात पर एफआईआर दर्ज हुई है. एक हत्या के मामले में गवाही से रोकने के लिए अजीत की हत्या हुई है. शूटर्स जहां रुके थे, उसकी जानकारी पुलिस को मिल गई है. जल्द ही आरोपियों की गिरफ्तारी की जाएगी. 2 साजिशकर्ता कुंटू सिंह और अखंड प्रताप सिंह फिलहाल जेल में ही बंद हैं.
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