UP By-Election Results: कैसे यूपी विधानसभा की ऐतिहासिक जीत हार में बदली?

ये जरूर है कि उपचुनाव के परिणाम के बाद मोदी लहर पर भी सवाल उठने लगे हैं. कहा जा रहा है कि मोदी का जादू ख़त्म होने लगा है.

Amit Tiwari | News18Hindi
Updated: March 14, 2018, 7:26 PM IST
UP By-Election Results: कैसे यूपी विधानसभा की ऐतिहासिक जीत हार में बदली?
प्रतीकात्मक
Amit Tiwari
Amit Tiwari | News18Hindi
Updated: March 14, 2018, 7:26 PM IST
मोदी लहर में 2014 के लोकसभा चुनाव और 2017 के यूपी विधानसभा चुनाव में जबरदस्त प्रदर्शन करने वाली बीजेपी को गोरखपुर और फूलपुर लोकसभा उपचुनाव में हार का सामना करना पड़ा है. जानकार इसे बीजेपी के लिए बड़ी हार बता रहे हैं लेकिन 2014 के लोकसभा और 2017 के विधानसभा चुनाव में में मत-प्रतिशत पर नजर डालें तो उपचुनाव के नतीजे चौंकाने वाले नहीं दिखते.

ये जरूर है कि उपचुनाव के परिणाम के बाद मोदी लहर पर भी सवाल उठने लगे हैं. कहा जा रहा है कि मोदी का जादू ख़त्म होने लगा है. 2017 में उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में चौथाई बहुमत के साथ 311 सीटें जीतने वाली बीजेपी के लिए 2019 लोकसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश काफी मायने रखता है. पार्टी 2014 में 71 सीटों के आंकड़े से और भी आगे बढ़ने की ख्वाहिश जता चुकी है.

लेकिन उपचुनाव में हार को लेकर पार्टी की रणनीति पर असर पड़ेगा. दरअसल 2014 के लोकसभा चुनाव और 2017 के विधानसभा चुनाव में वोटिंग परसेंटेज की बात करें तो नतीजे अप्रत्याशित नहीं हैं. 2014 में बीजेपी को 42.63 फ़ीसदी वोट मिले थे. सपा को 22.35 फ़ीसदी, बसपा को 19.60 फ़ीसदी और कांग्रेस को 7.53 प्रतिशत वोट मिले थे. अगर सपा और बसपा के वोट को मिला लें तो यह प्रतिशत 41.95 होता है. अगर इसमें कांग्रेस का वोट मिला लें तो यह 49 फ़ीसदी पहुंच जाता है. 2017 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी को 39.7 फ़ीसदी वोट मिले, सपा-कांग्रेस गठबंधन को 21.8 प्रतिशत और बसपा को 22.2 फ़ीसदी वोट मिले थे. सपा, बसपा और कांग्रेस के मत प्रतिशत को मिला दें तो यह 44 प्रतिशत होता है.

गोरखपुर और फूलपुर उपचुनाव में बीजेपी की सियासी गणित बिगड़ने के पीछे की वजह भी यही है. 2014 के लोकसभा चुनाव और 2017 के विधानसभा चुनाव में सभी दलों ने अलग—अलग चुनाव लड़ा था. नतीजा रहा कि बीजेपी प्रचंड बहुमत के साथ जीती. 2018 के उपचुनाव में अब बसपा का समर्थन मिलते ही सपा दोनों सीटों पर जीत गई. हालांकि कांग्रेस ने अपने प्रत्याशी मैदान में उतारे थे. लेकिन वह कुछ खास नहीं कर सकी. इस लिहाज से देखा जाए तो 2015 के बिहार विधानसभा चुनाव में महागठबंधन को मिली जीत ही मोदी और अमित शाह की काट है. यह बात उपचुनाव में भी साबित हुई.

हालांकि डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य कहते हैं, “हमने यह उम्मीद नहीं की थी कि बसपा का वोट इस कदर सपा को ट्रांसफर हो जाएगा. हम चुनाव परिणामों की समीक्षा करेंगे और भविष्य में सपा, बसपा और कांग्रेस के साथ आने की स्थिति में उनसे निपटने की रणनीति बनाएंगे. हम इस नतीजे के बाद 2019 में जीत के लिए भी रणनीति बनाएंगे.”
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