Analysis: सपा-बसपा गठबंधन में कांग्रेस के शामिल होने के क्या होंगे फायदे-नुकसान...

गठबंधन के रणनीतिकार ये भी मानते हैं कि प्रियंका का असर उम्मीद से ज्यादा हुआ तो गठबंधन के लिए मुश्किल हालात पैदा हो जाएंगे. इसलिए गठबंधन में कांग्रेस का कद बढ़ना शुरू हो गया है.

Anil Rai | News18Hindi
Updated: February 11, 2019, 11:39 AM IST
Analysis: सपा-बसपा गठबंधन में कांग्रेस के शामिल होने के क्या होंगे फायदे-नुकसान...
प्रियंका गांधी (File Photo)
Anil Rai
Anil Rai | News18Hindi
Updated: February 11, 2019, 11:39 AM IST
समाजवादी पार्टी-बहुजन समाज पार्टी गठबधंन में कांग्रेस के शामिल होने की खबरें एक बार फिर आने लगी हैं. ये ख़बर उस समय आई हैं, जब कांग्रेस महसचिव प्रियंका गांधी वाड्रा महासचिव बनने के बाद अपने पहले लखनऊ दौरे पर हैं. ये ख़बरें यू ही नहीं हैं, दरअसल प्रियंका गांधी की एंट्री के बाद बीजेपी और एसपी-बीएसपी दोनों अपने फायदे नुकसान आंकने में लगे हैं. बीजेपी नेता ये दावा कर रहे हैं कि प्रियंका गठबंधन का नुकसान करेंगीं. जबकि गठबंधन के नेता बीजेपी के नुकसान की बात कर रहे हैं.

साफ है, दोनों दल ये मान रहे हैं कि प्रियंका गांधी के आने के बाद कांग्रेस का वोट शेयर बढ़ेगा और पार्टी मजबूत होगी. इन बयानों के बाद एक बात तो साफ है कि प्रियंका की एंट्री के बाद का पहला राउंड कांग्रेस के पक्ष में रहा है. लेकिन ये सीटों में कितना बदलेगा, इसका अंदाजा लगाना अभी मुश्किल है. प्रियंका का कांग्रेस में आने के बाद भले ही गठबंधन नेता ये दावा कर रहे हों कि नुकसान बीजेपी का होगा, लेकिन गठबंधन के रणनीतिकार ये भी मानते हैं कि प्रियंका का असर उम्मीद से ज्यादा हुआ तो गठबंधन के लिए मुश्किल हालात पैदा हो जाएंगे. इसलिए गठबंधन में कांग्रेस का कद बढ़ना शुरू हो गया है.

दरअसल गठबंधन का मुख्य आधारा ही एंटी बीजेपी वोट बैंक है. और उत्तर प्रदेश में कांग्रेस की हालात पहले ऐसी थी जहां से उसे लड़ाई में माना ही नहीं जा रहा था. ऐसे में सपा-बसपा गठबंधन इस बात को लेकर पूरी तरह आश्वस्त था कि सरकार और बीजेपी विरोधी पूरा वोट गठबंधन को ही मिलेगा. इसमें सबसे बड़ा वोट बैंक अल्पसंख्यक वोट बैंक था. लेकिन प्रियंका के आने के बाद कांग्रेस के कार्यकर्ता जिस तरह उत्साहित हैं, उसमें एक बात साफ है कि कांग्रेस उत्तर प्रदेश की करीब आधी सीटों पर लड़ाई को त्रिकोणीय बना रही है. ऐसे में अगर एंटी बीजेपी वोट कंफ्यूज होता है तो इसका नुकसान गठबंधन को होगा.



कांग्रेस को गठबंधन से दूर रखने वालों का अपना तर्क है. उनका मानना है कि प्रियंका के आने से कांग्रेस सबसे पहले अपने पुराने वोट बैंक में वापसी की कोशिश करेगी. इसमें सबसे पहले सवर्ण मतदाता कांग्रेस के साथ जाएगा क्योंकि वो सरकार से नाराज तो है लेकिन किसी हालात में वो गठबंधन के साथ नहीं जाएगा. बीएसपी और समाजवादी पार्टी अपने परंपरागत वोट बैंक को लेकर काफी आश्वस्त हैं. बाकि बचे अल्पसंख्यक मतदाता तो उसी के साथ ही जाएंगे जो बीजेपी के सामने सीधी टक्कर देगा. लेकिन ये गणित इतना आसान भी नहीं है, जितना कागजों पर दिख रहा है. कागजी गणित और मैदानी लड़ाई में बहुत अंतर है. ऐसे में बीजेपी के खिलाफ खड़ी सभी ताकतें ये चाहती हैं कि उत्तर प्रदेश में एसपी-बीएसपी, कांग्रेस के साथ मिलकर लड़े. ताकि वोटों का बटवारा न हो सके. शायद यही सबसे बड़ा कारण है कि गठबंधन में कांग्रेस में शामिल होने की बात एक बार फिर शुरू हो गई है.

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