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1977 के बाद यूपी में कांग्रेस की सबसे बुरी हार, 4 सीटें छोड़ बाकी जगह जमानत जब्त

Amit Tiwari | News18 Uttar Pradesh
Updated: May 24, 2019, 3:46 PM IST
1977 के बाद यूपी में कांग्रेस की सबसे बुरी हार, 4 सीटें छोड़ बाकी जगह जमानत जब्त
राहुल गांधी

1977 के जनता लहर में कांग्रेस का खाता भी नहीं खुला था. इस बार भी कांग्रेस का खाता न खुलता अगर सोनिया गांधी ने रायबरेली से जीत न हासिल की होती.

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उत्तर प्रदेश के लोकसभा चुनाव परिणाम में अगर सबसे ज्यादा फजीहत किसी पार्टी की हुई तो वह कांग्रेस पार्टी की रही. प्रियंका गांधी के मैदान में उतरने के बावजूद कांग्रेस ने यूपी में 1977 के बाद सबसे निम्न प्रदर्शन करते हुए महज एक ही सीट पर जीत हासिल की. 1977 के जनता लहर में कांग्रेस का खाता भी नहीं खुला था. इस बार भी कांग्रेस का खाता न खुलता अगर सोनिया गांधी ने रायबरेली से जीत न हासिल की होती. उन्होंने रायबरेली से बीजेपी के दिनेश प्रताप सिंह को हराया.

सोनिया के अलावा कोई अन्य प्रत्याशी जीत हासिल न कर सका. खुद कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी अमेठी से स्मृति ईरानी के हाथों हार गए. इतना ही नहीं 2014 के मुकाबले कांग्रेस का वोट शेयर भी घाट गया. 2014 में कांग्रेस का वोट शेयर 7.5 था जो इस बार 6.22 फ़ीसदी पर सिमट गया. कांग्रेस प्रत्याशियों की हार का अंतर भी कांग्रेस के लिए चिंता की बात है. हारने वालों में अमेठी, फतेहपुर सिकरी और कानपुर में ही कांग्रेस के प्रत्याशी दूसरे नंबर पर रहे. शेष स्थानों पर कांग्रेस सभी दलों से अंतिम पायदान पर रही और उनके हार-जीत का अंतर भी लाखों में रहा. कईयों की तो जमानत भी नहीं बची.

बता दें कांग्रेस ने इस बार 73 सीटों पर प्रत्याशी खड़े किए थे, जिसमें से उसके तीन प्रत्याशियों का पर्चा खारिज हो गया था. 70 प्रत्याशियों में से अगर बात करें तो कांग्रेस ने 30 सीटों पर दूसरे दलों से आए प्रत्याशियों को टिकट दिया था.

अगर बात करें तो राहुल गांधी, श्रीप्रकाश जायसवाल और राजबब्बर को छोड़ दें तो कोई भी प्रत्याशी अपनी जमानत भी नहीं बचा सका.  पूर्वांचल के बड़े नेता आरपीएन सिंह ने भी अपनी जमानत गंवा दी है. कुशीनगर सीट पर उन्हें जमानत बचाने के लिए 1 लाख 75 हजार वोट चाहिए थे लेकिन, मिले सिर्फ 1 लाख 46 हजार. सलमान खुर्शीद फर्रूखाबाद सीट पर भी जमानत गंवा बैठे हैं. उन्हें सिर्फ 55 हजार 258 वोट मिले जबकि जमानत बचाने के लिए डेढ़ लाख से ज्यादा चाहिए थे. अब बात बीएसपी से पाला बदलकर कांग्रेस में आए नसीमुद्दीन सिद्दीकी की. बिजनौर में नसीमुद्दीन को महज 25 हजार 833 वोट ही मिल पाए. जमानत बचाने के लिए जरूरी 16.66 फीसदी वोटों की तुलना में उन्हें सिर्फ 2.35 फीसदी वोट ही मिले हैं.

उन्नाव में अन्नू टण्डन बड़ा नाम हैं लेकिन, वे भी भगवा लहर में गायब हो गईं. अन्नू को 1 लाख 85 हजार वोट मिले लेकिन, जमानत बचाने के लिए जरूरी 2 लाख 6 हजार वोटों के आंकड़े से वे भी पीछे रह गईं. धौरहरा सीट से जितिन प्रसाद की भी यही कहानी है. इस सीट पर उन्हें महज 1 लाख 62 हजार वोट मिले. इनकी भी जमानत जब्त हो गई है. बाराबंकी से कांग्रेस के सांसद रहे पीएल पूनिया के बेटे तनुज पूनिया बुरी तरह हारे हैं. 1 लाख 59 हजार वोट पाकर उन्होंने भी अपनी जमानत गंवा दी है.

सभी 30 बाहरी प्रत्याशी तीसरे नंबर पर रहे

ऐन वक्त पर दूसरे दलों के नेताओं को टिकट देने का कांग्रेस का फ़ॉर्मूला भी फ्लॉप साबित हुआ. संतकबीर नगर से प्रत्याशी बनाए गए भालचंद्र यादव को छोड़ दें तो कोई भी प्रत्याशी एक लाख का आंकड़ा नहीं पार कर पाया. सभी 30 बाहरी प्रत्याशी तीसरे स्थान पर रहे.सपा से भालचंद्र को 1.28 लाख वोट मिले. इनके अलावा, दुसरे दलों से कांग्रेस में आए 12 प्रत्याशियों को ही 50 हजार से ज्यादा वोट मिला. 17 प्रत्याशी ऐसे हैं, जिन्हें सिर्फ मामूली वोट मिले हैं. 50 हजार से ज्यादा मत पाने वाले प्रत्याशियों में मुरादाबाद से इमरान प्रतापगढ़िया, आंवला से सर्वराज सिंह, झांसी से शिवसरन कुशवाहा, सीतापुर से कैसरजहां, मोहनलालगंज से आरके चौधरी, बांदा से बाल कुंवर पटेल, फतेहपुर से राकेश सचान, श्रावस्ती से धीरेन्द्र प्रताप सिंह, डुमरियागंज से डॉ चंद्रेश उपाध्याय, बस्ती से राज किशोर सिंह और देवरिया से नियाज अहमद शामिल हैं.

इसके अलावा बीजेपी छोड़कर कांग्रेस में आईं बहराइच सांसद सावित्री बाई फुले को 34454 और गोंडा से कांग्रेस के समर्थन से लड़ीं अपना दल के संस्थापक सोनेलाल की पत्नी कृष्णा पटेल को 25686 मत ही मिले.

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First published: May 24, 2019, 3:37 PM IST
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