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लोकसभा चुनाव 2019: खिलाफ चुनाव लड़कर भी कांग्रेस गठबंधन के साथ

लोकसभा चुनाव 2019: खिलाफ चुनाव लड़कर भी कांग्रेस गठबंधन के साथ

राहुल गांधी और प्रियंका गांधी फाइल फोटो

राहुल गांधी और प्रियंका गांधी फाइल फोटो

वरिष्ठ पत्रकार अंबिका नंद सहाय का मानना है कि कांग्रेस की रणनीति किसी भी कीमत पर बीजेपी को हराना है. इसके लिए वह उन सीटों पर तो मजबूत उम्मीदवार खड़े कर रही है, जहां उसे जीत की उम्मीद है.

उत्तर प्रदेश की जिन 8 लोकसभा सीटों पर पहले चरण में मतदान है, उनमें कांग्रेस और सपा-बसपा गठबंधन के बीच मैच फिक्स नजर आ रहा है. बीजेपी, गठबंधन और कांग्रेस के उम्मीदवारों की फाइनल लिस्ट देखें तो 8 में से 2 सीटों पर कांग्रेस ने गठबंधन को सीधे-सीधे वॉकओवर दिया. वहीं 3 सीटों पर कांग्रेस उम्मीदवार सीधे-सीधे बीजेपी उम्मीदवार का वोट काटते हुए दिख रहे हैं. इसके अलावा एक सीट पर बीजेपी ने ऐन वक्त पर उम्मीदवार की घोषणा कर कांग्रेस के दांव को सफल होने नहीं दिया. हालांकि दो सीटों पर कांग्रेस गठबंधन से भी दो-दो हाथ करती दिख रही है.

वरिष्ठ पत्रकार अंबिका नंद सहाय का मानना है कि कांग्रेस की रणनीति किसी भी कीमत पर बीजेपी को हराना है. इसके लिए वह उन सीटों पर तो मजबूत उम्मीदवार खड़ा कर रही है, जहां उसे जीत की उम्मीद है, लेकिन जहां कांग्रेस खुद को लड़ाई में नहीं है, वहां वह बीजेपी का वोट काटने की कोशिश कर रही है. ताकि गठबंधन को फायदा मिल सके अगर हम पहले चरण की एक-एक सीट के जातीय समीकरण और टिकटों के बंटवारे को देखें तो अंबिका नंद सहाय की बात पर मुहर लगती नजर आ रही है.

बीजेपी का वोट काट रहे हैं कांग्रेस उम्मीदवार
सबसे पहले गौतमबुद्धनगर लोकसभा सीट की बात करें तो इस सीट से उम्मीदवारों के ऐलान से पहले लड़ाई गठबंधन बनाम बीजेपी बताई जा रही थी. जिसमें बीजेपी का पलड़ा भारी दिख रहा था, लेकिन कांग्रेस ने जैसे ही उम्मीदवार का ऐलान किया, बीजेपी खेमे में बेचैनी बढ़ गई. कांग्रेस ने इस सीट से अरविंद सिंह चौहान को उम्मीदवार बनाया है. अरविंद ठाकुर बिरादरी से आते हैं. ऐसे में माना ये जा रहा है कि वो ठाकुर वोट अगर अपने पक्ष में लाने में कामयाब होते हैं तो इसका फायदा गठबंधन के उम्मीदवार को होगा. दरअसल ठाकुर बीजेपी का परंपरागत वोटर रहा है. पिछले चुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार रमेश चन्द्र तोमर को ऐन मौके पर बीजेपी में शामिल कराकर पार्टी ने ठाकुर मतदाताओं को अपनी ओर कर लिया था.

राहुल गांधी और प्रियंका गांधी (फाइल फोटो)


हालांकि, शिवपाल सिंह यादव ने यहां गुर्जर उम्मीदवार मैदान में उतारकर गठबंधन के वोट बैंक में सेंध लगाने की कोशिश की है. लेकिन उसका प्रभाव उतना नहीं दिख रहा है. गौतमबुद्धनगर के बाद बात की जाए गाजियाबाद लोकसभा सीट की तो यहां ब्राह्मण, बनिया, ठाकुर वोट बैंक बीजेपी का परपंरागत वौट बैंक रहा है. ये तीनों मिलकर बीजेपी की राह आसान बनाते रहे हैं. लेकिन इस बार बीजेपी के परंपरागत बनिया और ब्राह्मण वोटर विपक्ष के निशाने पर हैं. इस सीट से गठबंधन ने पहले सुरेन्द्र कुमार मुन्नी को उम्मीदवार बनाया था, लेकिन जैसे ही कांग्रेस ने ब्राह्मण उम्मीदवार डॉली शर्मा को मैदान में उतारा, सपा ने सुरेन्द्र बंसल को उम्मीदवार बना दिया. यहां बनिया और ब्राह्मण जाति के नाम पर वोट डालते हैं तो फायदा गठबंधन को होता दिख रहा है.

कांग्रेस की नजर बीजेपी के जातिय गणित पर
वहीं, मेरठ लोकसभा सीट पर बीजेपी के राजेन्द्र अग्रवाल और गठबंधन के हाजी याकूब में सीधा मुकाबला था, लेकिन कांग्रेस ने यहां पूर्व मुख्यमंत्री बनारसी दास के बेटे हरेन्द्र अग्रवाल को मैदान में उतार दिया. यानि यहां भी कांग्रेस ने बीजेपी के परंपरागत बनिया वोट का बंटवारा करने की कोशिश की है. जिसका सीधा फायदा अकेले मुस्लिम उम्मीदवार हाजी याकूब को होता दिख रहा है. हालांकि, कैराना सीट पर बीजेपी ने देर से उम्मीदवार घोषित कर कांग्रेस के वोट बांटने की कोशिश कामयाब नहीं होने दी. कांग्रेस ने यहां से जाट नेता हरेंद्र मलिक को उम्मीदवार बनाया है. स्थानीय लोगों का मानना है कि कांग्रेस हुकुम सिंह की बेटी मृगांका सिंह के उम्मीदवार होने की स्थिति में जाट उम्मीदवार बनाया था. मृगांका अपने पिता की मौत के बाद हुए उपचुनाव में भी इस लोकसभा सीट से बीजेपी उम्मीदवार थीं. हालांकि कांग्रेस, एसपी और बीएसपी के साथ आने से उन्हें इस सीट से हार का सामना करना पड़ा. इस बार बीजेपी ने कांग्रेस की चाल को भांपते हुए मृगांका की जगह प्रदीप चौधरी को उम्मीदवार बना दिया.

अखिलेश यादव और मायावती (फाइल फोटो)


हालांकि बिजनौर और सहारनपुर से मुस्लिम उम्मीदवार उतारकर कांग्रेस ने गठबंधन को ये संदेश देने की कोशिश की है कि पार्टी के पास जहां मजबूत उम्मीदवार हो, वहां वह चुनाव जीतने की कोशिश भी करेगी. बिजनौर से नसीमुद्दीन सिद्दीकी को उम्मीदवार बनाकर कांग्रेस ने मुस्लिम वोटों को बाहुल्य वाली इस सीट पर अकेले मुस्लिम उम्मीदवार होने के दांव खेला है. सहारनपुर भी कांग्रेस अपनी सीट मानती है, ऐसे में कांग्रेस ने अपने विवादित नेता इमरान मसूद को मैदान में उतारा है. हालांकि मुस्लिम बाहुल्य इस सीट पर बीएसपी ने भी हाजी फजलुर्रहमान को टिकट देकर बीजेपी की राह आसान कर दी है. बाकी बची दो सीटों बागपत और मुजफ्फरनगर में कांग्रेस ने अपने उम्मीदवार न खड़ा कर जयंत चौधरी और अजीत सिंह को समर्थन का ऐलान कर दिया है.

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Tags: Lok Sabha Election 2019, Lucknow news, Uttar Pradesh Lok Sabha Elections 2019, Uttar pradesh news

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