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..तो इस वजह से कांग्रेस पर इतनी हमलावर हैं बसपा सुप्रीमो मायावती

मायावती और सोनिया गांधी (File Photo)

मायावती और सोनिया गांधी (File Photo)

आखिर ऐसा क्यों है कि गठबंधन में दोनों बराबरी के साथी हैं, लेकिन एक कांग्रेस के साथ खड़ा है और दूसरा विरोध में? इसके पीछे की राजनीति को समझने के लिए दोनों पार्टियों के उत्तर प्रदेश के वोट बैंक को समझना होगा.

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उत्तर प्रदेश में महागठबंधन और कांग्रेस के बीच गठबंधन की ख़बरों के बीच मायावती कांग्रेस के प्रति और हमलावर होती जा रही हैं. समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव कांग्रेस के प्रति नरम रुख रखे हुए हैं. अखिलेश जब भी मीडिया से बात करते हैं तो कांग्रेस को गठबंधन का साथी बताते हैं. दूसरी ओर मायावती बीजेपी और कांग्रेस के प्रति बराबर हमलावर हैं. आखिर ऐसा क्यों है कि गठबंधन में दोनों बराबरी के साथी हैं, लेकिन एक कांग्रेस के साथ खड़ा है और दूसरा विरोध में? इसके पीछे की राजनीति को समझने के लिए दोनों पार्टियों के उत्तर प्रदेश के वोट बैंक को समझना होगा. कांग्रेस तब तक उत्तर प्रदेश में मजबूत जनाधार में थी जब तक बहुजन समाज पार्टी का उदय नहीं हुआ था.

लखनऊ में कांग्रेस और बीएसपी दोनों की राजनीति को नजदीक से देखने वाले वरिष्ठ पत्रकार योगेश मिश्रा की मानें तो कांग्रेस का वोट बैंक दलित, मुस्लिम और अगड़ी जातियां रही हैं, जिसमें अगड़ी जातियों का एक बड़ा वर्ग बीजेपी का साथ चला गया, मुस्लिम समाजवादी पार्टी के साथ चले गए और दलित बीएसपी के साथ गया. बीएसपी के संस्थापक कांशीराम ने जब से ये पार्टी बनाई तब से दलित उसका बेस वोट बैंक रहा, जिसको आधार बनाकर पार्टी दूसरे वोट बैंकों को अपने पास लाकर सत्ता में आई. ऐसे में मायावती कभी नहीं चाहेंगी की दलित वोट बैंक उनसे दूर जाए.

कांग्रेस अंदर ही अंदर दलित मुस्लिम वोट बैंक को वापस पाने में लगी है. कांग्रेस के रणनीतिकार ऐसा मानते हैं कि अगर दलित वोट बैंक उनके पास आ गया तो मुस्लिम वोट बैंक को वापस लाना मुश्किल नहीं होगा क्योंकि बीजेपी जब भी मजबूत होती है तो मुस्लिम एंटी बीजेपी वोट करता है यानि जो पार्टी बीजेपी को हराए, मुस्लिम वोट उसका हो जाता है. ऐसे में जब कांग्रेस मजबूत होती दिखेगी, तो ये वोट बैंक अपने आप उनके पास आ जाएगा.

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मायावती की चिंता का विषय भी यही है. मायावती जानती हैं कि गठबंधन की राजनीति में अगर दलित वोट बैंक एक बार कांग्रेस के साथ चला गया तो दोबारा उसे वापस पाना मुश्किल होगा, ऐसे में अगर उत्तर प्रदेश की राजनीति में कांग्रेस मजबूत होती है तो दलित वोटों का उस तरफ जाने का खतरा और बढ़ जाएगा. इसलिए मायावती अक्सर बीजेपी और कांग्रेस से बराबर दूरी रखती नजर आती हैं और अपने बयानों में दोनों को दलितों के लिए बराबर खतरा बताती हैं. बात करें समाजवादी पार्टी की तो पार्टी के रणनीतिकार जानते हैं कि मुस्लिम वोटर किसी का भी परंपरागत वोटर नहीं है, वो अक्सर टेक्टिकल और एंटी बीजेपी वोट करता है, ऐसे में लोकसभा के चुनावों में वो भले ही कांग्रेस को वोट कर दे लेकिन विधानसभा चुनाव में उसे वापस सपा के खाते में लाना उतना मुश्किल नहीं होगा.

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