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ANALYSIS: BJP के लिए आसान नहीं यूपी में बाकी के 4 चरणों का इम्तिहान, गठबंधन से कड़ी टक्कर

Amit Tiwari | News18 Uttar Pradesh
Updated: April 24, 2019, 12:14 PM IST
ANALYSIS: BJP के लिए आसान नहीं यूपी में बाकी के 4 चरणों का इम्तिहान, गठबंधन से कड़ी टक्कर
फाइल फोटो

इस बार सपा-बसपा गठबंधन के साथ ही कांग्रेस ने प्रियंका गांधी को सक्रिय राजनीति में उतारकर बीजेपी के लिए मजबूत घेराबंदी की है. लिहाजा पिछली बार के प्रदर्शन को दोहराना बीजेपी के लिए किसी बड़ी चुनौती से कम नहीं है.

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दिल्ली की सत्ता पर काबिज बीजेपी नेतृत्व वाली एनडीए की मोदी सरकार सत्ता में दोबारा वापसी करेगी की नहीं? इसका फैसला यूपी के बाकी के 4 चरणों के नतीजे तय करेंगे. दरअसल, आखिर के इन चार चरण में शामिल 54 सीटों में से बीजेपी ने पिछले लोकसभा चुनाव में 50 सीटों पर कब्ज़ा किया था. यही वजह थी कि बीजेपी ने करीब तीन दशक के बाद केंद्र में पूर्ण बहुमत की सरकार बनाई थी.

लेकिन इस बार सपा-बसपा गठबंधन के साथ ही कांग्रेस ने प्रियंका गांधी को सक्रिय राजनीति में उतारकर बीजेपी के लिए मजबूत घेराबंदी की है. लिहाजा पिछली बार के प्रदर्शन को दोहराना बीजेपी के लिए किसी बड़ी चुनौती से कम नहीं है. दरअसल, बीजेपी के लिए बाकी के चरणों में सबसे बड़ी चुनौती सपा-बसपा गठबंधन से. जातिगत समीकरण को ध्यान में रखकर बनाया गया यह गठबंधन बीजेपी के लिए गले की फांस बना हुआ है.

बीजेपी को अपनों से ही मिल रही चुनौती

बाकी के चार चरणों में जहां चुनाव होने हैं, वहां बीजेपी को अपनों से चुनौती मिल रही है. टिकट काटने की नाराजगी और आपसी मतभेद भी बीजेपी के लिए एक बड़ा सिरदर्द है. इन चरणों में करीब एक दर्जन सीटें ऐसी हैं, जहां बीजेपी ने प्रत्याशी बदल दिए हैं और उन्हें बागियों का सामना करना पड़ रहा है. इनमे हरदोई, बाराबंकी, मिश्रिख, इटावा, बहराइच, मछलीशहर, बलिया, आजमगढ़, देवरिया, संतकबीरनगर, गोरखपुर जैसी सीटें शामिल हैं. यहां पार्टी को अपनों से ही विरोध का सामना करना पड़ रहा है.

वरिष्ठ पत्रकार नवनीत त्रिपाठी के मुताबिक बाकी के चार चरण खासकर पूर्वांचल की राह बीजेपी के लिए आसान नहीं दिख रही है. यहां पार्टी नाराज और बागियों के भितरघात का भी सामना कर रही है. ऐसे में सपा-बसपा गठबंधन एक बड़ी चुनौती है क्योंकि गठबंधन का आधार यादव और दलित वोट है. मुस्लिम वोट उसे वोट करेगा जो बीजेपी को हरा सकता है. ऐसे में गठबंधन उसकी पहली पसंद होगी.

उपचुनाव में गठबंधन ने बिगाड़ा था बीजेपी का खेल

बता दें मोदी को सत्ता में आने से रोकने के लिए यूपी में सपा-बसपा पुरानी अदावत भुलाकर एकजुट हो गए हैं. जातिगत समीकरण के आधार पर बना यह गठबंधन पूर्वांचल में बीजेपी का खेल बिगाड़ने के लिए काफी माना जा रहा है. यादव, दलित और मुस्लिम वोटों का यह गठजोड़ पूर्वांचल के गोरखपुर और फूलपुर लोकसभा उपचुनाव में बीजेपी को चारों खाने चित कर चुका है. वोट ट्रांसफर को लेकर जो कुछ भी शंका जाहिर की जा रही थी, उसे मायावती और मुलायम ने मैनपुरी में मंच साझा कर काफी हद तक दूर भी कर दिया है. लिहाजा बीजेपी के सामने बाकी के चार चरण में गठबंधन की महाचुनौती है.
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सीट बंटवारे का फ़ॉर्मूला भी बीजेपी के लिए चुनौती

महागठबंधन के सहयोगियों के बीच सीटों का तालमेल बहुत कुछ तक 2009 पर आधारित है क्योंकि 2014 में तो विपक्ष पूरी तरह से धराशाई हो गया था. बाकी के चार चरण में सबसे अहम पूर्वांचल का चुनाव है, जहां की 21 सीटें यूपी फतह और दिल्ली का रास्ता साफ करती हैं. 2014 में बीजेपी ने आजमगढ़ सीट छोड़कर बाकी सभी सीटों पर जीत दर्ज की थी. इस बार भी उन ही सीटों पर सपा और बसपा प्रत्याशी मैदान में है, जहां वे दूसरे नंबर पर थे. अगर 2009 के आंकड़ों को देखें तो तब 21 में से सर्वाधिक आठ सीट बसपा को, 7 सपा और 6 सीट कांग्रेस को मिली थीं. लिहाजा यूपी के बदले सियासी मिजाज के तहत बीजेपी के लिए पूर्वांचल को साधना काफी अहम हो गया है.

इन जगहों पर होना है मतदान

चौथा चरण– 29 अप्रैल (13 सीट)

शाहजहांपुर, खीरी, हरदोई, मिश्रिख, उन्नाव, फर्रुखाबाद, इटावा, कन्नौज, कानपुर, अकबरपुर, जालौन, झांसी, हमीरपुर

पांचवां चरण– 6 मई (14 सीट)

धौरहरा, सीतापुर, मोहनलालगंज, लखनऊ, रायबरेली, अमेठी, बांदा, फतेहपुर, कौशांबी, बाराबंकी, फैजाबाद, बहराइच, कैसरगंज, गोंडा

छठा चरण– 12 मई (14 सीट)

सुल्तानपुर, प्रतापगढ़, फूलपुर, इलाहाबाद, अंबेडकरनगर, श्रावस्ती, डुमरियागंज, बस्ती, संतकबीरनगर, लालगंज, आज़मगढ़, जौनपुर, मछलीशहर, भदोही

सातवां चरण– 19 मई (13 सीट)

महराजगंज, गोरखपुर, कुशीनगर, देवरिया, बांसगांव, घोसी, सलेमपुर, बलिया, गाजीपुर, चंदौली, वाराणसी, मिर्जापुर, रॉबर्ट्सगंज

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First published: April 24, 2019, 11:32 AM IST
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