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यूपी में कांग्रेस की नैया पर लगाएंगे कभी बीजेपी, सपा व बसपा के झंडाबरदार रहे नेता!

प्रियंका गांधी की फाइल फोटो

प्रियंका गांधी की फाइल फोटो

जानकारों की मानें तो प्रियंका गांधी को राष्ट्रीय महासचिव बनाकर पूर्वांचल की कमान सौंपने के बाद भी कांग्रेस की समस्या जस की तस ही है.

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उत्तर प्रदेश में अकेले चुनाव लड़ रही कांग्रेस जमीनी स्तर पर कितनी मजबूत है इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उसके पास चुनाव लड़ने के लिए खुद के प्रत्याशी भी नहीं है. कांग्रेस की यूपी में नैया पार लगाने की जिम्मेदारी उनके कन्धों पर है जो कभी सपा-बसपा और बीजेपी के झंडाबरदार हुआ करते थे.

दरअसल, कांग्रेस ने सर्वाधिक टिकट ऐसे उम्मीदवारों को दिया है जो कभी बीजेपी, सपा या बसपा में शामिल थे. मसलन बिजनौर से बसपा के पूर्व राष्ट्रीय महासचिव व मंत्री रहे नसीमुद्दीन सिद्दीकी, नगीना से पूर्व बीजेपी सांसद ओमवती जाटव, बहराइच से मौजूदा सांसद सावित्री बाई फुले, सीतापुर से पूर्व बसपा सांसद कैसर जहां, फतेहपुर से पूर्व सपा सांसद राकेश सचान, भदोही से पूर्व बीजेपी सांसद रमाकांत यादव, बदायूं से पूर्व सपा सांसद सलीम इकबाल शेरवानी, मिश्रिख से बीजेपी के पूर्व सांसद रामलाल राही की बहू मंजरी राही, इटावा से मौजूदा सांसद बीजेपी के अशोक दोहरे और मोहनलालगंज से बसपा के पूर्व नेता आरके चौधरी शामिल हैं. इसी तरह बसपा सरकार में मंत्री रहे बाबु लाल कुशवाहा के भाई शिव शरण को झांसी से मैदान में उतरा है तो चंदौली से बाबु सिंह कुशवाहा की पत्नी शिव कन्या को टिकट दिया गया है.

जानकारों की मानें तो प्रियंका गांधी को राष्ट्रीय महासचिव बनाकर पूर्वांचल की कमान सौंपने के बाद भी कांग्रेस की समस्या जस की तस ही है. स्थानीय बड़े चेहरे की कमी और कमजोर संगठन की वजह से भी कांग्रेस ने दल-बदलुओं पर भरोसा जताया है. दरअसल, इन नेताओं की अपनी बिरादरी में पकड़ है, जिससे कांग्रेस को लगता है कि वह बीजेपी को नुकसान पहुंचकर अपरोक्ष रूप से गठबंधन को फायदा पहुंचा सकती है.

वरिष्ठ पत्रकार सुरेंद्र दुबे कहते हैं कि कांग्रेस के पास सबसे बड़ी समस्या बड़े चेहरे की रही है. पिछले दो तीन चुनाव में उसे हार का ही मुंह देखना पड़ा है, लिहाजा 10-12 नामों के अलावा उसके पास और कोई चेहरा नहीं था. लिहाजा यह स्वाभाविक है कि वह अन्य दलों के बड़े चेहरों को टिकट देकर चुनावी मैदान में अपनी उपस्थिति दर्ज कराए. इसलिए कांग्रेस ने उन नेताओं पर भरोसा जताया है, जो दूसरे दलों में कभी कद्दावर थे.

कांग्रेस के अपने बड़े चेहरे

कांग्रेस के पास यूपी में गिनती के ही नेता हैं. जिनमें प्रमोद तिवारी, निर्मल खत्री, जितिन प्रसाद, आरपीएन सिंह, श्रीप्रकाश जायसवाल, सलमान खुर्शीद, राजबब्बर, इमरान मसूद, संजय सिंह, रानी रत्ना सिंह, राजेश मिश्रा शामिल हैं. अब गठबंधन में जगह न मिलने के बाद कांग्रेस के पास सबसे बड़ी चुनौती सभी 80 लोकसभा सीटों पर प्रत्याशी को खड़ा करने की थी. लिहाजा दूसरे दलों के असंतुष्टों को टिकट देकर ही कांग्रेस ने अपना काम चलाया है.

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