UP: पश्चिम और पूर्वांचल में सफल रहा सपा-बसपा गठबंधन, अवध, ब्रज और बुंदेलखंड में बीजेपी को लाभ

वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव में पश्चिमी उत्‍तर प्रदेश की सभी 16 सीटों पर बीजेपी ने कब्‍जा किया था, इस बार गठबंधन ने 7 सीटें छीन लीं.

News18 Uttar Pradesh
Updated: May 25, 2019, 8:06 AM IST
UP: पश्चिम और पूर्वांचल में सफल रहा सपा-बसपा गठबंधन, अवध, ब्रज और बुंदेलखंड में बीजेपी को लाभ
फाइल फोटो
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Updated: May 25, 2019, 8:06 AM IST
उत्तर प्रदेश में लोकसभा चुनाव में सपा-बसपा-रालोद गठबंधन का क्षेत्रफल विश्लेषण करें तो प्रचंड मोदी लहर में उसे जिन 15 सीटों पर जीत हासिल हुई, उनमें पश्चिम और पूर्वांचल की सीटें शामिल हैं. पश्चिम की 16 सीटों में से गठबंधन ने बीजेपी से 7 सीटें छीन लीं. वहीं, पूर्वांचल और अवध में उसे 9 सीटों पर जीत हासिल हुई.

वर्ष 2014 के चुनाव में पश्चिम की 16 सीटों में से बीजेपी ने सभी पर जीत दर्ज की थी. इस बार गठबंधन ने उससे 7 सीटें छीन ली. गठबंधन ने यहां मुरादाबाद, संभल, बिजनौर, नगीना, अमरोहा, रामपुर और सहारनपुर सीटें बीजेपी से छीनी हैं. उधर, ब्रज क्षेत्र की 13 सीटों में से बीजेपी को 12 सीटों पर जीत हासिल हुई है. पिछले चुनाव के मुकाबले इस बार बीजेपी को दो सीटें ज्‍यादा मिली हैं. इस बार बीजेपी ने सपा से फिरोजाबाद और बदायूं की सीटें छीन ली हैं.

बुंदेलखंड में भी गठबंधन को झटका

इतना ही नहीं कानपुर और बुंदेलखंड में भी गठबंधन को झटका लगा है. बीजेपी ने इस बार सभी 10 सीटों पर जीत हासिल की है. भाजपा ने इस बार कन्नौज सीट भी सपा से छीन ली है. अवध क्षेत्र की बात करें तो बीजेपी ने अमेठी सीट कांग्रेस से छीनकर मुख्‍य विपक्षी पार्टी को बड़ा झटका दिया है. पूर्वांचल में सपा-बसपा गठबंधन सफल दिखा. यहां बीजेपी को अम्बेडकरनगर, श्रावस्ती, आजमगढ़, जौनपुर, लालगंज, गाजीपुर और मऊ में उसे जीत हासिल हुई.

बसपा को सबसे ज्‍यादा फायदा

क्षेत्रीय विश्लेषण से स्पष्ट है कि पश्चिम और पूर्वांचल में गठबंधन ने सात-सात सीटें जीतीं, जबकि ब्रज और बुंदेलखंड क्षेत्र में उसे नुकसान उठाना पड़ा है. बीजेपी और उसकी सहयोगी अपना दल ने इस बार यूपी की 80 सीटों में से 64 पर जीत दर्ज की है. पिछले चुनाव के मुकाबले उसे 9 सीटों का नुकसान हुआ है. इस बार गठबंधन में सर्वाधिक फायदा बसपा को हुआ है. पिछली बार उसका खाता भी नहीं खुला था. इस बार सपा के साथ मिलकर चुनाव लड़ने की वजह से उसे 10 सीटें हासिल हुईं. वहीं, पिछली बार पांच सीटें जीतने वाली समाजवादी पार्टी इस बार भी पांच सीटें ही जीत सकी. हालांकि, यादव परिवार के तीन सदस्य को हार का सामना करना पड़ा. डिंपल यादव, अक्षय यादव और धर्मेंद्र यादव को हार का सामना करना पड़ा.

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