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पूर्वांचल में अनुप्रिया और हार्दिक पटेल बढ़ा सकते हैं BJP की मुश्किलें!

Ankit Francis | News18Hindi
Updated: February 22, 2019, 2:05 PM IST
पूर्वांचल में अनुप्रिया और हार्दिक पटेल बढ़ा सकते हैं BJP की मुश्किलें!
अनुप्रिया पटेल (फ़ाइल फोटो)

यूपी के पूर्वांचल इलाके में प्रियंका गांधी के बाद अब अपना दल की अनुप्रिया पटेल और गुजरात के नेता हार्दिक पटेल भी बीजेपी के लिए खतरा बन रहे हैं.

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  • Last Updated: February 22, 2019, 2:05 PM IST
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लोकसभा चुनाव 2019 के लिए यूपी में समाजवादी पार्टी (सपा), बहुजन समाज पार्टी (बसपा) और राष्ट्रीय लोकदल (रालोद) के साथ आने से बीजेपी के खिलाफ मजबूत गठबंधन तैयार हुआ है. उधर यूपी में बीजेपी की अहम् साझेदार अपना दल (सोनेलाल) भी उसका साथ छोड़ती नज़र आ रही है. पार्टी की संरक्षक अनुप्रिया पटेल और अध्यक्ष आशीष पटेल ने गुरुवार को दिल्ली में कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी और ज्योतिरादित्य सिंधिया से लंबी मुलाकात की है.

खबर है कि 28 फ़रवरी को अनुप्रिया एनडीए छोड़कर कांग्रेस का हाथ थाम सकती हैं. पूर्वांचल में सिर्फ अनुप्रिया ही नहीं गुजरात के युवा नेता हार्दिक पटेल भी लगातार रैलियां कर रहे हैं और ऐसे कयास लगाए जा रहे हैं कि वो भी जल्द कांग्रेस में शामिल होने जा रहे हैं.

क्यों नाराज़ हैं अनुप्रिया पटेल?
सूत्रों के मुताबिक एक कार्यक्रम में अनुप्रिया को बुलाने से बीजेपी ने परहेज किया जिसके बाद से दोनों पार्टियों के संबंध काफी ख़राब हो गए हैं. मामला ये है कि एक मेडिकल कॉलेज के उद्घाटन कार्यक्रम में केंद्रीय स्वास्थ्य राज्य मंत्री अश्विनी चौबे को बुलाया गया था लेकिन अनुप्रिया को इसमें नहीं बुलाया गया. अनुप्रिया लगातार इस तरह के आरोप लगाती रही हैं कि 2017 में जब से राज्य में योगी सरकार आई है उनकी और उनकी पार्टी की उपेक्षा की जा रही है.



बीते कुछ महीनों में मिर्जापुर में भी बीजेपी नेताओं और अपना दल के स्थानीय नेताओं के बीच कहासुनी बढ़ी है. उधर, सुहेलदेव पार्टी के ओम प्रकाश राजभर ने ओबीसी आरक्षण में बंटवारे को लेकर बीजेपी नेतृत्व के खिलाफ मोर्चा खोले हुए हैं और अपना दल ने भी इस मामले को सुलझाने के लिए बीजेपी को 20 फरवरी तक का वक़्त दिया था लेकिन बात बन नहीं पाई.

अनुप्रिया पटेल ने 28 फ़रवरी को पार्टी की अहम बैठक बुलाई है. इस बैठक में कांग्रेस संग गठबंधन और एनडीए से अलग होने का फैसला लिया जा सकता है. हालांकि प्रियंका से मुलाकात को लेकर किसी भी तरह की टिप्पणी से इनकार करने वाले आशीष पटेल ने कहा कि हमारी नहीं सुनी गई, अब हम निर्णय लेने के लिए स्वतंत्र हैं. उन्होंने कहा कि गठबंधन धर्म ईमानदारी से निभाने के बावजूद हमारी नहीं सुनी गई. हमें सम्मान तक के लायक नहीं समझा गया. अब हम निर्णय के लिए स्वतंत्र हैं. बरेली में अनुप्रिया पटेल ने केंद्र सरकार और बीजेपी पर जमकर निशाना साधा. अनुप्रिया ने कहा कि बीजेपी को सहयोगी दलों की समस्याओं से कोई लेना-देना नहीं. अब अपना दल स्वतंत्र है अपना रास्ता चुनने के लिए. पार्टी की बैठक में आगे की रणनीति तय होगी.
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हार्दिक पटेल भी बढ़ा रहे हैं मुश्किलें
भले ही गुजरात के युवा पाटीदार नेता हार्दिक पटेल ने समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश को खुलकर अपना समर्थन दे दिया हो लेकिन वो लगातार कांग्रेस नेताओं के लिए इलाके में चुनावी सभाएं कर रहे हैं. हार्दिक का कहना है कि वो उन सभी के हैं जो बीजेपी के खिलाफ हैं. हार्दिक ने कहा, 'मैं यूपी के दौरे पर हूं. बुधवार को प्रतापगढ़, सुलतानपुर, मीरजापुर व सोनभद्र गया. लोग बीजेपी के शासन से त्रस्त हैं और उससे छुटकारा चाहते हैं.' हार्दिक पटेल पहले ही लोकसभा चुनाव 2019 लड़ने का एलान कर चुके हैं लेकिन वो किस पार्टी से मैदान में होंगे इस पर अभी सस्पेंस बना हुआ है. भले ही यूपी में हार्दिक अखिलेश का समर्थन करें या फिर कांग्रेस का, लेकिन कुर्मी वोटों के मामले में बीजेपी को ही नुकसान पहुंचाने जा रहे हैं.

बीजेपी क्या कह रही है ?
अनुप्रिया पटेल की नाराजगी पर यूपी के डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्या ने कहा- 'जो भी सहयोगी 2014 और 2017 में साथ थे वो 2019 में भी साथ ही लड़ेंगे. किसी को कोई नाराजगी होगी, किसी को कुछ कहना होगा, पार्टी नेतृत्व उसे सुनेगा और दूर भी करेगा. सबको उचित सम्मान भी दिया जाएगा. जो नाराजगी है, मुझे पता है लेकिन उसे दूर कर लिया जाएगा.'

कितने जिलों में हैं कुर्मी वोटों का असर?
यूपी के पूर्वांचल और सेंट्रल यूपी के इलाके की करीब 32 विधानसभा सीटें और 8 लोकसभा सीटें ऐसी हैं जिन पर कुर्मी, पटेल, वर्मा और कटियार मतदाता चुनावों में निर्णायक भूमिका निभाते रहे हैं. पूर्वांचल के कम से कम 16 जिलों में इन वोटर्स की संख्या 8 से लेकर 12 प्रतिशत तक है. कानपुर, कानपुर देहात और आसपास के क्षेत्रों में कटियार और वर्मा खेती के साथ-साथ राजनीति में अच्छी हैसियत रखते हैं. राम स्वरूप वर्मा के बाद अपना दल के संस्थापक सोने लाल पटेल इलाके के सबसे बड़े कुर्मी नेताओं में गिने जाते थे.



सोने लाल पटेल ने कुर्मी वोटों को आधार बनाकर ही पार्टी की स्थापना भी की थी. उनकी असमय मृत्यु के बाद उनकी पत्नी कृष्णा पटेल और बेटी अनुप्रिया पटेल ने पार्टी को आगे बढ़ाया. हालांकि बाद में अपना दल राजनीतिक महत्वाकांक्षा और वर्चस्व कि लड़ाई का शिकार होकर दो भागों में बंट गया. कुर्मी जाति के बड़े नेताओं में बेनी प्रसाद वर्मा, आरपीएन सिंह, बसपा के लाल जी वर्मा, ओम प्रकाश सिंह, स्वतंत्र देव सिंह, केंद्रीय मंत्री संतोष गंगवार, बजरंग दल के नेता विनय कटियार शामिल हैं. हालांकि अनुप्रिया पटेल बीते सालों में सबसे मजबूत कुर्मी नेता के तौर पर सामने आई हैं.

इन जिलों में है ज्यादा प्रभाव
यूपी में कुर्मी जाति के वोटर्स संत कबीर नगर, मिर्जापुर, सोनभद्र, बरेली, उन्नाव, जालौन, फतेहपुर, प्रतापगढ़, कौशांबी, इलाहाबाद, सीतापुर, बहराइच, श्रावस्ती, बलरामपुर, सिद्धार्थ नगर, बस्ती और सेंट्रल यूपी में कानपुर, अकबरपुर, एटा, बरेली और लखीमपुर जिलों में सबसे ज्यादा मौजूद हैं.

2 लोकसभा और 9 विधानसभा सीटों पर है कब्ज़ा
बता दें कि अपना दल ने साल 2014 के लोकसभा चुनावों में 7 सीटों पर प्रत्याशी उतारे थे जिनमें से दो सीटों पर उसे जीत हासिल हुई थी. अनुप्रिया खुद मिर्जापुर लोकसभा से जबकि कुंवर हरिबंश सिंह ने प्रतापगढ़ से जीत हासिल की थी. 2017 के यूपी विधानसभा चुनावों में अपना दल ने 11 सीटों पर उम्मीदवार उतारे थे जिनमें से 9 पर उसे जीत हासिल हुई थी. इन 9 सीटों में प्रतापगढ़, विश्वनाथगंज, छानबे, सेवापुरी, मरियाहू, सोराओं, जहानाबाद, दुद्धी, शोहरतगंज शामिल हैं.



कुर्मी भी बंटे हुए हैं!
बता दें कुर्मी में भी कई गुट बंटे हुए हैं और ये सभी अलग-अलग पार्टियों को भी वोट करते हैं. इसी के चलते कुर्मियों का कोई एक नेता नहीं बन पाया. जैसे कि रुहेलखंड में गंगवार कुर्मी हैं और संतोष गंगवार को यहां से पूरा समर्थन मिलता है. कानपुर मंडल के कुर्मी कटियार और सचान हैं, यहां बीजेपी की बड़ी नेता प्रेमलता कटियार पहले कुर्मियों की नेता हुआ करती थीं. इलाहाबाद मंडल में कुर्मी पटेल हैं और कांग्रेस के दिग्गज नेता रामपूजन पटेल और बाद के दिनों में अपना दल के नेता सोनेलाल पटेल इधर के सबसे बड़े कुर्मी नेता थे.

फैजाबाद मंडल में कुर्मी वर्मा हैं और बसपा के रामलखन वर्मा और बेनी प्रसाद वर्मा इनके बड़े नेताओं में गिने जाते हैं. पूर्वांचल में ओम प्रकाश सिंह और कांग्रेस के आरपीएन सिंह जैसे नेताओं को कुर्मी वोटर का सपोर्ट मिलता है तो बुंदेलखंड में नरेश उत्तम और निरंजन कुर्मी मतों का बंटवारा करते हैं. भले ही कोई भी कुर्मियों का नेता होने का वादा करे लेकिन ये जाति एकमुश्त किसी भी पार्टी को वोट करती नज़र नहीं आती.

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First published: February 22, 2019, 1:45 PM IST
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