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...तो इसलिए मुसलमानों के वोट नहीं बंटने देना चाहतीं मायावती

मायावती (फाइल फोटो)

मायावती (फाइल फोटो)

दरअसल मायावती को पता है कि कांग्रेस के अलग मैदान में उतरने से कुछ सीटों पर मुकाबला त्रिकोणीय हो गया है. ऐसे में मुस्लिम वोटों में बिखराव की संभावना है. जिसका फायदा बीजेपी को मिल सकता है.

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सहारनपुर के देवबंद में रविवार को गठबंधन की पहली संयुक्त रैली में मायावती ने कांग्रेस और बीजेपी पर तीखा हमला बोलते हुए अपील की कि मुसलमानों का वोट नहीं बंटना चाहिए. उन्होंने कहा कि कुछ लोग भ्रमित करेंगे, लेकिन एक भी मुस्लिम वोट नहीं बंटना चाहिए. दरअसल, मायावती के सियासी समीकरण के तहत यूपी में दलित, मुसलमान और पिछड़ों का एक साथ आना किसी भी पार्टी के लिए जीत सुनिश्चित कर सकता है. इसी फैक्टर के तहत उन्होंने सपा और रालोद से गठबंधन भी किया है.

दरअसल मायावती को पता है कि कांग्रेस के अलग मैदान में उतरने से कुछ सीटों पर मुकाबला त्रिकोणीय हो गया है. लिहाजा अगर ऐसे में मुस्लिम वोटों में बिखराव की भी संभावना है. जिसका फायदा बीजेपी को मिल सकता है. इसके अलावा मायावती को यह भी पता है कि कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी जिस तरह से पीएम नरेंद्र मोदी और बीजेपी के प्रति हमलावर हैं, वह मुसलमानों को भी खूब भा रहा है.

लिहाजा मायावती को डर है कि अगर मुस्लिम वोट भ्रमित हुआ और बंटा तो उनके मंसूबों पर पानी फिर सकता है. सहारनपुर में कांग्रेस ने इमरान मसूद को टिकट दिया है. इमरान मसूद ने मोदी लहर में भी बीजेपी के राघव लखनपाल को कड़ी टक्कर दी थी. इस बार इस सीट से गठबंधन की तरफ से बसपा के हाजी फजलुर्रहमान मैदान में हैं. दो मुस्लिम प्रत्याशी होने की वजह से वोटों के विभाजन की संभावना भी दिख रही है.

मायावती की इस अपील पर वरिष्ठ पत्रकार और पॉलिटिकल एक्सपर्ट रतनमणि लाल का मानना है कि इसे इस तरह से देखना होगा कि गठबंधन जिस वोट बैंक को साधने की कोशिश कर रहा है वह कभी कांग्रेस के पास था. मसलन मुसलमान, दलित और पिछड़ा. अब अगर पिक्चर में कांग्रेस न हो तो इन तीनों का कॉम्बिनेशन किसी को भी हराने में सक्षम है. इन तीनों में जो सबसे भ्रमित वोटर है वह है मुस्लिम. क्योंकि उन्हें लग सकता है कि कांग्रेस के पिक्चर में आ जाने से उनके पास एक और विकल्प मौजूद है. इसके अलावा मुसलमान पिछले दो चुनावों में बसपा को नकार चुके हैं. वह पूरी तरह से सपा के साथ है. यह साबित भी हुआ कि मुस्लिम-यादव फैक्टर से जीत भी हासिल हुई है.

लाल का कहना है कि यहां महत्वपूर्ण बात ये है कि यह बात मायावती ने क्यों कही? जबकि ये सपा को कहना चाहिए था. क्योंकि 'एमवाई' फैक्टर का फायदा सबसे ज्यादा सपा को मिलता रहा है. इसलिए यह अपील अखिलेश को करनी चाहिए थी. लेकिन मायावती ने इसकी अपील की. क्योंकि उन्हें कहीं न कहीं यह लग रहा है कि ये वोट बैंक किसी न किसी तरह उनके पास आ सकते हैं. लाल का कहना है कि इस अपील से मायावती ने अखिलेश के मुंह से उनका स्लोगन भी ले लिया है.

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