नेहरू की सीट पर 4 फीसदी वोट भी हासिल नहीं कर सकी कांग्रेस

Ravishankar Singh | News18Hindi
Updated: May 28, 2019, 9:22 PM IST
नेहरू की सीट पर 4 फीसदी वोट भी हासिल नहीं कर सकी कांग्रेस
फाइल फोटो- राहुल गांधी और सोनिया गांधी एक बैठक में बातचीत करते हुए.

पिछले लोकसभा चुनाव में यूपी में कांग्रेस का वोट शेयर 7.5 प्रतिशत था, लेकिन इस बार यह आंकड़ा 6.31 प्रतिशत पर सिमट गया. वहीं, राज्य में बीजेपी का मत-प्रतिशत कांग्रेस से आठ गुना ज्यादा है.

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लोकसभा चुनाव 2019 के परिणाम सामने आने के बाद कांग्रेस पार्टी एक बार फिर उत्तर प्रदेश में 'निरुत्तर' हो गई है. इस लोकसभा चुनाव में भी कांग्रेस पार्टी की शर्मनाक हार हुई है. कांग्रेस पार्टी का वोट शेयर सिर्फ 6.31 प्रतिशत तक ही सिमट कर रह गया है. बीजेपी से तुलना करें तो उसका वोट प्रतिशत कांग्रेस के वोट प्रतिशत से तकरीबन 8 गुना ज्यादा है. ऐसे में सवाल यह उठता है कि एक राष्ट्रीय पार्टी के यूपी में खराब प्रदर्शन के कारण क्या हैं?

अगर हम 2009 को अपवाद के रूप में छोड़ दें तो पिछले कई लोकसभा चुनावों में कांग्रेस पार्टी यूपी में अपने ही निराशजनक प्रदर्शन का रिकॉर्ड तोड़ती और दोहराती चली आ रही है. पिछले कई लोकसभा चुनावों के दौरान नतीजों से कुछ महीने पहले तक कांग्रेसी नेताओं के तरफ से बड़े-बड़े दावे किए जाते रहे हैं, लेकिन जब परिणाम सामने आता है तो हर बार बुरी स्थिति होती है. सिर्फ साल 2009 के लोकसभा चुनाव में ही कांग्रेस ने दहाई का आंकड़ा हासिल किया था.

कांग्रेस की रैली में एक समर्थक पार्टी का झंडा लहराते हुए.


यूपी में कांग्रेस सिंगल डिजिट से आगे नहीं बढ़ रही है 

गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश की 80 लोकसभा सीटों में कांग्रेस सिर्फ एक सीट रायबरेली ही जीत पाई. इस सीट से सोनिया गांधी चुनाव लड़ी थीं. कांग्रेस के सारे दिग्गज जिसमें राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी अमेठी से और प्रदेश अध्यक्ष राज बब्बर फतेहपुर सीकरी से चुनाव हार चुके हैं.

फाइल फोटो - कांग्रेस के यूपी अध्यक्ष राज बब्बर की भी इस चुनाव में जमानत जब्त हो गई.


बता दें कि राहुल गांधी के लिए सबसे बुरी बात यह है कि वह अमेठी से चुनाव हारे हैं. इससे पहले अमेठी से वह लगातार तीन बार सांसद चुने जा चुके थे. आपातकाल के बाद हुए चुनाव में अमेठी से संजय गांधी और उसके बाद 1984 में मेनका गांधी के हारने के बाद यह तीसरा मौका है, जब गांधी परिवार का कोई सदस्य चुनाव हारा है. इस लोकसभा चुनाव में अमेठी, रायबरेली और कानपुर सीट को छोड़ दें तो बाकी सभी सीटों पर कांग्रेसी उम्मीदवारों की जमानत जब्त हो गई.
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पश्चिमी उत्तर प्रदेश में कांग्रेस के 22 उम्मीदवारों में 21 की जमानत जब्त 

अगर हम पश्चिमी उत्तरप्रदेश की बात करें तो यहां पर कांग्रेस के 22 उम्मीदवारों में से 21 उम्मीदवारों की जमानत जब्त हो गई है. प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष राज बब्बर भी अपनी जमानत नहीं बचा सके. पूर्व केंद्रीय मंत्री सलमान खुर्शीद की भी जमानत जब्त हो गई. सिर्फ सहारनपुर से चुनाव लड़ने वाले इमरान मसूद भी बड़ी मुश्किल से अपनी जमानत बचाने में कामयाब हुए. प्रियंका गांधी ने चुनाव प्रचार के अंतिम दिन इस सीट पर रोड शो की थी. मसूद को इस चुनाव में 16.81% वोट मिले.

कांग्रेस ने पश्चिमी उप्र की 28 में से 22 सीटों पर चुनाव लड़ा था. पार्टी ने एक रणनीति के तहत 28 सीटों में से 4 पर महागठबंधन के खिलाफ प्रत्याशी नहीं उतारे थे. कांग्रेस ने अजीत सिंह और उनके बेटे जयंत चौधरी के खिलाफ भी प्रत्याशी नहीं उतारे थे. सपा संरक्षक मुलायम सिंह यादव और उनके भतीजे अक्षय यादव के खिलाफ भी उम्मीदवार नहीं उतारे थे. पीलीभीत और एटा सीट पर कांग्रेस समर्थित प्रत्याशी चुनाव लड़ रहे थे, जिनकी भी जमानत जब्त हो गई.

फाइल फोटो - सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव और बीएसपी सुप्रीमो मायावती चुनाव से पहले मीडिया से बात करते हुए.


अगर बात करें पूर्वी उत्तर प्रदेश की तो यहां पर सारा दारोमदार कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा के कंधों पर था, लेकिन पूर्वी उत्तर प्रदेश में प्रियंका गांधी भी पार्टी को दुर्गति से बचा नहीं पाई. लोकसभा चुनाव 2019 में तुरुप के इक्के की तरह कांग्रेस को बचाने के लिए प्रियंका गांधी मैदान में उतरी थीं.

बता दें कि पूर्वी उत्तर प्रदेश में भी इस बार पार्टी का न केवल वोट बैंक घटा, वरन पुश्तैनी गढ़ अमेठी को भी बचाया नहीं जा सका. प्रियंका गांधी के महासचिव तथा प्रभारी रहते राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी को पहली बार पराजय का सामना करना पड़ा.

रायबरेली में सोनिया गांधी की जीत जरूर हुई, लेकिन 2014 की तुलना में जीत का अंतर घट गया. साल 2014 के लोकसभा चुनाव में सोनिया गांधी 3 लाख 52 हजार 713 वोट के अंतर से विजयी हुई थीं, लेकिन इस बार ये अंतर मात्र 1 लाख 67 हजार 178 तक ही सिमट गया.



इसी तरह पिछले लोकसभा चुनाव में कांग्रेस पार्टी का वोट शेयर 7.5 प्रतिशत था, लेकिन इस बार यह आंकडा 6.31 प्रतिशत पर सिमट गया. यानी एक सीट घटी और मत प्रतिशत भी नहीं बढ़ सका. इस बार यूपी की 19 ऐसी सीटें हैं, जहां पर कांग्रेस को 3 प्रतिशत से भी कम वोट प्रतिशत मिले. 19 लोकसभा की सीट ऐसी हैं, जहां पर कांग्रेस को वोट प्रतिशत 3 से 6 प्रतिशत के बीच है. वहीं, 13 सीटें ऐसी हैं जहां पर कांग्रेस का वोट शेयर 6 से 10 प्रतिशत के बीच में रहा. वहीं 11 लोकसभा क्षेत्रों में 10 से 16 प्रतिशत तक वोट पड़े.

3 प्रतिशत से भी कम वाले संसदीय क्षेत्र
अमरोहा-1.07, भदोई-2.46, बिजनौर-2.35, बुलंदशहर-2.62, कौशांबी-1.69, इटावा-1.61, घोसी-2.09, गोंडा-2.78, गोरखपुर-1.94, हरदोई-1.89, गाजीपुर-1.79, हथरस-2.08, जौनपुर-2.61, मथुरा-2.55, मेरठ-2.83, मिसरख-2.58, नगीना-1.99, सलेमपुर-2.96, संभल-1.02



3 से 6 प्रतिशत वाले संसदीय सीट
आगरा-3.94, अलीगढ़-4.37, इलाहाबाद-3.59, आंवला-5.94, बदायूं-4.8, बहराइच-3.48, देवरिया-5.03, फैजाबाद-4.9, फर्रुखाबाद-5.51, गौतमबुद्धनगर-3.02, कैसरगंज-3.78, महाराजगंज-5.91, मोहनलालगंज-4.73, मोरादाबाद-4.62, फूलपुर-3.35, रामपुर-3.3, रॉबर्ट्सगंज-3.57, श्रावस्ती-5.82, सुल्तानपुर-4.17

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First published: May 28, 2019, 7:29 PM IST
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