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तीसरा फेज: यूपी की 10 सीटों पर बीजेपी को मिल रही कड़ी चुनौती, एडवांटेज महागठबंधन

फाइल फोटो

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मोदी लहर में बीजेपी ने इनमें से 7 सीटें जीतीं थी, जबकि तीन सपा के खाते में गई थी. इस बार सपा का बसपा और रालोद के साथ गठ ...अधिक पढ़ें

    लोकसभा चुनाव के तीसरे फेज में यूपी की 10 सीटों पर 23 अप्रैल को मतदान होना हैं. पहले दो चरण के मुकाबले यूपी के रण का तीसरा चरण बीजेपी के लिए सबसे अधिक चुनौती वाला है. दरअसल, इस चरण में 10 लोकसभा की वो सीटें हैं जो सपा का गढ़ मानी जाती हैं. मोदी लहर में बीजेपी ने इनमें से 7 सीटें जीतीं थी, जबकि तीन सपा के खाते में गई थी. इस बार सपा का बसपा और रालोद के साथ गठबंधन है, लिहाजा बीजेपी के लिए अपना प्रदर्शन दोहराने की बड़ी चुनौती है.

    तीसरे चरण में मुरादाबाद, रामपुर, संभल, फिरोजाबाद, मैनपुरी, एटा, बदायूं, आंवला, बरेली और पीलीभीत में मतदान होना है. इनमें से 2014 में बीजेपी ने बदायूं, मैनपुरी और फिरोजाबाद को छोड़कर सभी सीटों पर कमल खिला था. लेकिन 2019 में महागठबंधन से मिल रही चुनौती के बाद बीजेपी की राह आसान नहीं दिख रही.

    पीतल की नगरी मुरादाबाद में इस बार त्रिकोणीय मुकाबला देखने को मिल रहा है. हालांकि इस सीट पर बीजेपी और महागठबंधन के बीच ही मुकाबला है. बीजेपी ने एक बार फिर मौजूदा सांसद कुंवर सर्वेश सिंह को उतारा है. गठबंधन के तहत स्पा के डॉ एसटी हसन और कांग्रेस के प्रतापगढ़ी मैदान में हैं. सर्वेश मौजूदा सांसद हैं और डॉ. हसन को 2014 में करीब 87 हजार वोटों से शिकस्त दे चुके हैं. लेकिन इस बार मुस्लिम और अनुसूचित जाति के मतों का गठबंधन की तरफ जाना उनके लिए मुश्किल खड़ी कर सकता है.

    2014 के मोदी लहर में संभल लोकसभा सीट पहली बार बीजेपी के खाते में गई थी. मुस्लिम बहुल इस सीट पर मुकाबला कांटेदार रहा था. भारतीय जनता पार्टी के सत्यपाल सैनी और समाजवादी पार्टी के शफीक उर रहमान बर्क के बीच जीत-हार में सिर्फ 5,000 वोटों का अंतर था. इस बार बीजेपी ने प्रत्याशी बदलते हुए परमेश्वर लाल सैनी को मैदान में उतारा है. उनका मुकाबला समाजवादी पार्टी के डॉक्टर शफीकुर रहमान बार्क और कांग्रेस के मेजर जगत पाल सिंह से होगा. पिछले चुनाव में सपा और बसपा में यहां मुस्लिम वोट बंट गए थे, यही कारण रहा कि बीजेपी को फायदा मिला और वह जीत गई थी. हालांकि इस बार सपा और बसपा एकसाथ हैं, ऐसे में बीजेपी के लिए इस बार लड़ाई आसान नहीं होने वाली है.

    रामपुर लोकसभा सीट बीजेपी प्रत्याशी जयाप्रदा के मैदान में उतरने से एक बार फिर से सुर्ख़ियों में हैं. इस सीट पर सीधा मुकाबला सपा के कद्दावर नेता आजम खान और जयाप्रदा के बीच है. पिछली बार सीट से बीजेपी के नेपाल सिंह जीते थे. रामपुर संसदीय सीट पर 50 फीसदी से भी अधिक जनसंख्या मुस्लिम आबादी की है. जयाप्रदा पर आजम खान की अश्लील टिप्पणी के बाद मुकाबला टक्कर माना जा रहा है.

    सुहाग की नगरी फिरोजाबाद में इस बार यादव परिवार के बीच सीढ़ी लड़ाई है. सपा के मौजूदा सांसद अक्षय यादव का मुकाबला उनके पाने ही चाचा शिवपाल यादव से है. बीजेपी की तरफ से डॉ चंद्रसेन जादौन मैदान में हैं. पिछले लोकसभा चुनाव में फिरोजाबाद उन सीटों में शामिल थी जहां बीजेपी नहीं जीती थी. इस बार भी सीधा मुकाबला अक्षय और शिवपाल यादव में ही है.

    सपा के सबसे मजबूत किले मैनपुरी से पांचवीं बार मुलायम सिंह यादव मैदान में हैं. अपना आखिरी चुनाव लड़ रहे मुलायम के सामने प्रेम सिंह शाक्य हैं. इस सीट पर बसपा सुप्रीमो मायावती भी मुलायम के लिए वोट मांग चुकी हैं. बीजेपी इस सीट को कब्जाने की कोशिश करती रही है, लेकिन इस बार गठबंधन के सामने यह चुनौती और भी बड़ी है.

    एटा सीट पर एक बार भी पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह के बेटे राजवीर सिंह मैदान में हैं. उनका मुकाबला स्पा-बसपा की जोड़ी से है. गठबंधन के तहत इस सीट पर सपा के देवेंद्र यादव मैदान में हैं. कांग्रेस ने यूपी में 3 क्षेत्रीय दलों के साथ गठबंधन कर रखा है. इसी गठबंधन के तहत कांग्रेस ने यह सीट राष्ट्रीय जन अधिकार पार्टी (आरजेएपी) के लिए छोड़ी है और आरजेएपी ने सूरज सिंह को मैदान में उतारा है. कभी यादवलैंड के लिए विख्यात इस सीट पर किसी भी किस्मत का फैसला लोधी और शाक्य ही करते हैं. लिहाजा मुख्य मुकाबला बीजेपी और गठबंधन के बीच ही है.

    बदायूं उत्तर प्रदेश के उन चंद लोकसभा सीटों में शामिल है जिसे समाजवादी पार्टी का अजेय दुर्ग कहा जाता है. एक बार फिर सपा यहां से फतह हासिल करना चाहेगी तो भारतीय जनता पार्टी ने भी दमदार उम्मीदवार उतारकर कड़ी चुनौती देने की कोशिश की है, अब देखना होगा कि इस बार सपा अपना दुर्ग बचाने में कामयाब होती है या फिर बीजेपी यहां सेंध लगाने में सफल हो पाती है. पश्चिमी उत्तर प्रदेश के बदायूं लोकसभा क्षेत्र से 9 उम्मीदवार मैदान में हैं. मुख्य मुकाबला सपा के उम्मीदवार धर्मेंद्र यादव और बीजेपी की संघमित्रा मौर्य से है. कांग्रेस ने सलीम इकबाल शेरवानी को मैदान में उतारा है.

    उत्तर प्रदेश की आंवला लोकसभा सीट पर अभी भारतीय जनता पार्टी का कब्जा है. अभी तक यहां हुए चुनाव में भारतीय जनता पार्टी 5 बार चुनाव जीती है. अब एक बार फिर बीजेपी के सामने 2019 में कमल खिलाने की चुनौती है. BJP के धर्मेंद्र कुमार कश्यप पिछले चुनाव में 40 फीसदी से अधिक वोट पाकर अव्वल रहे थे. रुहेलखंड का हिस्सा आंवला में समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी के गठबंधन के बाद मुकाबला और भी कड़ा हो गया है. बीजेपी का मुकाबला कुंवर सर्वराज सिंह और गठबंधन की रूचि वीरा से है.

    बरेली लोकसभा सीट बीजेपी का गढ़ माना जाता है. इस सीट से संतोष गंगवार लगातार जीत हासिल करते रहे हैं. एक बार फिर संतोष गंगवार मैदान में हैं. उनके सामने कांग्रेस के प्रवीण सिंह तथा समाजवादी पार्टी के भगवत शरण गंगवार चुनाव मैदान में हैं. बरेली लोकसभा सीट पर वैश्य, दलित और मुस्लिम वोटरों का वर्चस्व रहा है. अगर दलित और मुस्लिम वोट एकमुश्त गठबंधन के पक्ष में जाता है तो संतोष गंगवार के लिए मुश्किल खड़ी हो सकती है.

    पीलीभीत लोकसभा सीट पर पिछले तीन दशक से इंदिरा गांधी के दूसरे बेटे संजय गांधी की पत्नी मेनका गांधी और बेटे वरुण गांधी का ही राज रहा है. पिछली बार मेनका गांधी ने यहां से चुनाव लड़ा था और इस बार उनके बेटे वरुण गांधी अपनी किस्मत आजमा रहे हैं. मुख्य मुकाबला बीजेपी के वरुण गांधी, समाजवादी पार्टी के हेमराज वर्मा. सपा और बसपा के एक साथ आने से वरुण की राह आसान नहीं दिख रही.

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