धौरहरा लोकसभा सीट: त्रिकोणीय मुकाबले में किसका होगा पलड़ा भारी

एक चुनावी कार्यक्रम के दौरान कांग्रेस प्रत्याशी जीतिन प्रसाद
एक चुनावी कार्यक्रम के दौरान कांग्रेस प्रत्याशी जीतिन प्रसाद

धौरहरा लोक सभा सीट का इतिहास भले ही बहुत पुराना न हो, लेकिन अहमियत बहुत है. इसकी एक वजह जितिन प्रसाद का यहां से खड़ा होना है, जो पिछली बार चौथे स्थान पर आए थे

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धौरहरा लोक सभा सीट का इतिहास भले ही बहुत पुराना न हो, लेकिन अहमियत बहुत है. इसकी एक वजह जितिन प्रसाद का यहां से खड़ा होना है, जो पिछली बार चौथे स्थान पर आए थे. जितेंद्र प्रसाद के पुत्र जितिन को एक समय कांग्रेस में भविष्य के बड़े नेताओं में गिना जाता था. इस बीच उनकी नाराजगी की खबर रही. पिछले दिनों उनके बीजेपी से जुड़ने की अफवाह ने माहौल काफी गर्म कर दिया था. हालांकि ऐसा कुछ हुआ नहीं और जितिन प्रसाद ने इसे महज अफवाह करार दिया. अब वो चुनाव लड़ रहे हैं. ऐसी सीट से जो 2008 परिसीमन के बाद शाहजहांपुर से अलग होकर आई.

2009 में यहां पहली बार चुनाव हुआ. कांग्रेस के जितिन प्रसाद जीते. अगले चुनाव में वो सीट बरकरार नहीं रख पाए. मोदी लहर में उन्हें हार का सामना करना पड़ा. अब 2019 के चुनाव में समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी का गठबंधन होने के साथ ही यहां की लड़ाई दिलचस्प हो गई है. पिछले लोकसभा चुनाव में यहां से बीजेपी की रेखा ने जीत दर्ज की. 2019 के चुनाव में कांग्रेस के जितिन प्रसाद यहां चौथे नंबर पर रहे थे, उन्हें सिर्फ 16 फीसदी ही वोट मिले थे.

इस बार इस सीट पर त्रिकोणीय मुकाबला देखने को मिल रहा है. एसपी-बीएसपी-आरएलडी गठबंधन में यह सीट समाजवादी पार्टी के खाते में है. 2019 के लोकसभा चुनाव में इस सीट पर बीजेपी, कांग्रेस और एसपी-बीएसपी गठबंधन के बीच कांटे का मुकाबला माना जा रहा है।



सीट का समीकरण
धौरहरा लोकसभा सीट सीतापुर जिले के अंतर्गत आती है. 2014 के चुनाव के अनुसार यहां पर करीब 17 लाख मतदाता हैं. सीतापुर जिला देश के 250 सबसे पिछड़े जिलों में से एक है.

इस लोकसभा क्षेत्र में कुल 5 विधानसभा सीटें आती हैं. ये हैं धौरहरा, कास्ता, मोहम्मदी, मोहाली और हरगांव. 2017 में हुए विधानसभा चुनाव में सभी सीटों पर भारतीय जनता पार्टी ने जीत दर्ज की थी. 2014 के चुनाव के आंकड़ों के अनुसार, यहां करीब 15,58,041 मतदाता हैं, जिनमें से 8.4 लाख पुरुष और 7 लाख से अधिक महिला मतदाता हैं.

बीजेपी प्रत्याशी रेखा वर्मा


क्या हुआ था पिछली बार

2014 के चुनाव में इस सीट पर मोदी लहर का असर साफ देखने को मिला. बीजेपी की ओर से रेखा ने करीब 34 फीसदी वोट हासिल किए और बड़ी जीत दर्ज की. उनके सामने खड़े बहुजन समाज पार्टी के उम्मीदवार दूसरे, समाजवादी पार्टी तीसरे और कांग्रेस की ओर से पूर्व सांसद जितिन प्रसाद चौथे नंबर पर रहे. रेखा वर्मा को 3 लाख 60 हजार से अधिक वोट मिले थे. दूसरे नंबर पर बसपा के दाऊद अहमद को 2,34,000 वोट मिले थे. जितिन प्रसाद को महज 16 प्रतिशत मत मिले. इसके पहले 2009 में जितिन प्रसाद ने अपने निकटतम प्रतिद्वंदी को एक लाख पचासी हजार से अधिक मतों से पराजित किया था.

कौन हैं प्रत्याशी

अबकी बार सपा की ओर से अरशद इलियास सिद्दीकी चुनाव मैदान में हैं, भाजपा ने अपनी सांसद को रेखा वर्मा को फिर से मौका दिया है. रेखा वर्मा ने 2014 के चुनाव में ही संसदीय राजनीति में कदम रखा. चुनाव जीतने के बाद वह संसद की कमेटियों की सदस्य भी बनीं.

मलखान सिंह


कांग्रेस से जितिन प्रसाद तो प्रगतिशील समाज पार्टी से मलखान सिंह राजपूत मैदान में हैं. मलखान सिंह के आने से लोगों में उत्सुकता बढ़ी है. चंबल के बागियों में उनका नाम लिया जाता था. बाद में उन्होंने आत्मसमर्पण किया था. मुख्य मुकाबला बीजेपी, कांग्रेस और समाजवादी प्रत्याशी के बीच माना जा रहा है.

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