मायावती-अखिलेश आज करेंगे UP गठबंधन का ऐलान, ये हो सकता है सीट शेयरिंग फॉर्मूला

एसपी-बीएसपी के बीच गठबंधन होने की स्थिति में सबसे बड़ा पेंच नेता को लेकर है. बीएसपी का मानना है कि मायावती की फॉलोइंग अखिलेश यादव के मुकाबले ज्यादा है. मायावती के पास मुख्यमंत्री बनने का अनुभव भी अखिलेश से ज्यादा है

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Updated: January 12, 2019, 2:35 AM IST
मायावती-अखिलेश आज करेंगे UP गठबंधन का ऐलान, ये हो सकता है सीट शेयरिंग फॉर्मूला
अखिलेश यादव के साथ मायावती (PTI)
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Updated: January 12, 2019, 2:35 AM IST
आगामी लोकसभा चुनाव को लेकर उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी (SP) और बहुजन समाज पार्टी (BSP) की सीटों और गठबंधन का औपचारिक ऐलान शनिवार को होना है. सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव बीएसपी सुप्रीमो मायावती के साथ ज्वॉइंट प्रेस कॉन्फ्रेंस कर इसका ऐलान कर सकते हैं. 'बुआ' (मायावती) और 'भतीजे' (अखिलेश) की ये प्रेस कॉन्फ्रेंस लखनऊ के गोमती नगर स्थित ताज होटल में दोपहर 12 बजे होनी है. बता दें कि 26 साल पहले हुए गेस्ट हाउस कांड से एसपी-बीएसपी में आई दूरी के बाद यह पहला मौका है जब दोनों पार्टी के नेता एक साथ मीडिया से रू-ब-रू होंगे.

आगामी लोकसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश की 80 सीटों पर एसपी-बीएसपी के मिल कर चुनाव लड़ने पर दोनों दलों के शीर्ष नेतृत्व के बीच ‘सैद्धांतिक सहमति’ बन गई है. एसपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता राजेंद्र चौधरी ने पिछले शनिवार को बताया था कि गठबंधन को लेकर पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव और बीएसपी प्रमुख मायावती के बीच कई दौर की बातचीत हो चुकी है.

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चौधरी ने कहा था कि हालांकि, सीट बंटवारे पर अंतिम फैसला तो अखिलेश यादव और मायावती को ही लेना है. लेकिन इतना तो तय है कि कांग्रेस के शीर्ष नेताओं राहुल गांधी और सोनिया गांधी के लिए अमेठी और रायबरेली सीटें छोड़ी जाएंगी.

बता दें कि अखिलेश यादव ने पिछले शुक्रवार को दिल्ली स्थित मायावती के आवास पर आकर मुलाकात की थी. लगभग ढाई घंटे तक चली इस बैठक में दोनों दलों में 37-37 सीटों पर चुनाव लड़ने पर सहमति बनी. छह सीट कांग्रेस, आरएलडी और अन्य के लिए छोड़ी गई हैं.

इस तरह होगा सीटों का बंटवारा
सपा के एक वरिष्ठ नेता के मुताबिक, दोनों नेताओं के बीच मजबूत जनाधार वाले इलाके की सीटों पर अपने प्रत्याशी उतारने पर भी सहमति बन गई है. इस आधार पर पश्चिमी उत्तर प्रदेश की अधिकांश सीटों पर बीएसपी और पूर्वांचल में अधिकतर सीटों पर एसपी के उम्मीदवार उतारे जाएंगे. वहीं, बुंदेलखंड की चार में से दो-दो सीटों पर दोनों दल चुनाव लड़ेंगे.
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छोटे दलों से भी हो रही बात
समाजवादी पार्टी प्रवक्ता राजेंद्र चौधरी ने स्वीकार किया कि गठबंधन में शामिल करने के लिए पश्चिमी उत्तर प्रदेश में असर रखने वाले राष्ट्रीय लोकदल (RLD) से भी बातचीत हो रही है. इसके अलावा समाजवादी पार्टी सुहलदेव समाज पार्टी, अपना दल (कृष्णा पटेल), कौमी एकता दल जैसे छोटे दलों के संपर्क में भी है.

गठबंधन का नेता कौन?
एसपी-बीएसपी के बीच गठबंधन होने की स्थिति में सबसे बड़ा पेंच नेता को लेकर है. गठबंधन का नेता कौन होगा अखिलेश यादव या मायावती? बीएसपी का मानना है कि मायावती की फॉलोइंग अखिलेश यादव के मुकाबले ज्यादा है. मायावती के पास मुख्यमंत्री बनने का अनुभव भी अखिलेश से ज्यादा है. मायावती चार बार यूपी की सीएम रह चुकी हैं. उधर, एसपी भी अपने नेता को आगे बढ़ाना चाहती है. हालांकि, माना जा रहा है कि गठबंधन बनने और चुनाव खत्म होने के बाद जैसी स्थिति होगा, वैसा फैसला लिया जाएगा.

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इन चुनावों में हिट रहा एसपी-बीएसपी गठबंधन
मालूम हो कि एसपी और बीएसपी में गठबंधन के बीज पिछले साल गोरखपुर और फूलपुर लोकसभा उपचुनाव के दौरान ही पड़ गए थे. इन दोनों सीटों पर बीएसपी ने एसपी प्रत्याशियों को समर्थन दिया था. दोनों ही जगह उन्हें कामयाबी मिली थी. उसके बाद कैराना लोकसभा उपचुनाव में आरएलडी उम्मीदवार तबस्सुम हसन ने एसपी के प्रत्यक्ष और बीएसपी के परोक्ष सहयोग से जीत हासिल की थी.

पिछली लोकसभा चुनावों में यूपी में किसको मिली कितनी सीटें?
16वीं लोकसभा में उत्तर प्रदेश से बीजेपी के 68, एसपी के 7, कांग्रेस व अपना-दल के दो-दो और आरएलडी के एक सांसद है. पिछले चुनाव में बीएसपी 19.77 फीसदी वोट हासिल करने के बावजूद एक भी सीट नहीं जीत सकी थी.

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