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लखनऊ CAA हिंसा: रिकवरी नोटिस मामले में मौलाना सैफ अब्बास को हाईकोर्ट से मिली फौरी राहत

इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच
इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच

CAA-NRC Case: हाईकोर्ट (HC) की लखनऊ बेंच में दाखिल याचिका में मौलाना सैफ अब्बास की तरफ से कहा गया था कि रिकवरी आदेश बिना अधिकार के पारित किया गया है. इसी प्रकार के अन्य मामलों में याची को अंतरिम राहत दी गई थी, ऐसे में उन्हें भी राहत प्रदान की जाए.

  • News18Hindi
  • Last Updated: December 5, 2020, 2:09 AM IST
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लखनऊ. इलाहाबाद हाईकोर्ट (Allahabad High Court) की लखनऊ बेंच (Lucknow Bench) ने मौलाना सैफ अब्बास नकवी (Maulana Saif Abbas Naqvi) के खिलाफ रिकवरी नोटिस (Recovery Notice) के मामले में किसी भी उत्पीड़नात्मक कार्रवाई पर रोक लगा दी है. दरअसल जिला प्रशासन ने मौलाना सैफ अब्बास के खिलाफ 67 लाख रुपये की रिकवरी की नोटिस जारी की थी. ये रिकवरी नोटिस सीएए, एनआरसी के प्रदर्शन (CAA-NRC Violence) में प्रापर्टी डैमेज पर जारी हुआ था. 3 मार्च और 16 जून के प्रशासन के रिकवरी आदेश को मौलाना ने हाईकोर्ट में चुनौती दी है. कोर्ट ने सरकार को 4 हफ्ते में जवाबी हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है. साथ ही कार्रवाई पर अंतरिम रोक लगा दी है.

कोर्ट ने इस मामले को इसी प्रकार के अन्य मामलों के साथ जनवरी में सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया है. यह आदेश जस्टिस आलोक सिंह व जस्टिस के एस पवार की खंडपीठ ने मौलाना की तरफ से दाखिल रिट याचिका पर दिया है.





मौलाना की तरफ से याचिका में दी गई ये दलील
दरअसल याचिका में मौलाना सैफ अब्बास की तरफ से कहा गया था कि रिकवरी आदेश बिना अधिकार के पारित किया गया है. यह भी कहा गया कि इसी प्रकार के अन्य मामलों में याची को अंतरिम राहत दी गई थी, ऐसे में उन्हें भी अंतरिम राहत प्रदान की जाए. मामले की सुनवाई के बाद कोर्ट ने मोलाना सैफ अब्बास के खिलाफ किसी भी उत्पीड़नात्मक कार्रवाई पर रोक लगा दी, साथ ही प्रदेश सरकार से इस संबंध में जवाबी हलफनामा तलब कर लिया है. सरकार को 4 हफ्ते का समय दिया गया है.
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