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लखनऊ का मूड: अटल को चाहने वाले शियाओं का इस बार किसकी तरफ है रुझान?

Amit Tiwari | News18 Uttar Pradesh
Updated: April 25, 2019, 9:32 AM IST
लखनऊ का मूड: अटल को चाहने वाले शियाओं का इस बार किसकी तरफ है रुझान?
फाइल फोटो

2019 का लोकसभा चुनाव अटल की विरासत को सहेजने के लिए भी है. यह पहली बार है जब अटल का कोई संदेश लखनऊ के लोगों के लिए नहीं आया.

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पूर्व प्रधानमंत्री और भारत रत्न दिवंगत अटल बिहारी वाजपेयी की कर्मभूमि रही उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ बीजेपी का एक मजबूत किला मानी जाती है. नवाबों के इस शहर से अटल को जितना लगाव था, उतना ही प्यार यहां की जनता ने भी उन्हें सूद समेत लौटाया. अटल के लिए सम्मान यहां के हर वर्ग में देखने को आज भी मिलता है. 2019 का लोकसभा चुनाव अटल की विरासत को सहेजने के लिए भी है. यह पहली बार है, जब अटल का कोई संदेश लखनऊ के लोगों के लिए नहीं आया. सक्रिय राजनीति से संन्यास लेने के बाद भी चुनाव में अटल अपना संदेश जरूर भेजते थे. जनता उस संदेश का सम्मान करते हुए बीजेपी प्रत्याशी को जीत का तोहफा देती रही.

अटल का जुड़ाव पुराने लखनऊ से कुछ ज्यादा ही रहा. यह वह इलाका है, जहां मुस्लिमों में शिया समुदाय की अच्छी खासी संख्या है. पुराना लखनऊ ही राजधानी में चुनावों के नतीजों को तय करता आया है. जब तक अटल चुनाव मैदान में रहे शियाओं के साथ सुन्नी मुसलामानों का भी समर्थन उन्हें मिलता रहा. उनके संन्यास लेने के बाद 2009 में उनकी विरासत को लालजी टंडन ने संभाला. उन्हें भी शियाओं का समर्थन हासिल हुआ. 2014 के चुनाव में राजनाथ सिंह मैदान में खड़े हुए उनके सिर भी जीत का सेहरा बांधने का काम लखनऊ के शिया मुसलमानों ने किया.

बीजेपी का इस सीट पर दो दशकों से कब्ज़ा है. लेकिन इस बार परिस्थिति विपरीत है. राजनाथ सिंह के सामने कांग्रेस के आचार्य प्रमोद कृष्णम ताल ठोक रहे हैं. आचार्य प्रमोद कृष्णम संभल के कल्कि धाम के पीठाधीश्वर हैं. गठबंधन की तरफ से शत्रुघ्न सिन्हा की पत्नी पूनम सिन्हा मैदान में हैं. लिहाजा सवाल यह उठता है कि पुराना लखनऊ और वहां के वाशिंदों खासकर मुसलामानों के मन में इस बार क्या है?

एक बात तो तय है कि इस सीट पर बीजेपी को मात देनी है तो विपक्षी पार्टी को पुराने लखनऊ का दिल जीतना होगा. लिहाजा कांग्रेस प्रत्याशी आचार्य प्रमोद का भी पूरा फोकस पुराना लखनऊ है. ये यहां शिया और सुन्नी धर्मगुरुओं से भी मिल रहे हैं. गठबंधन की प्रत्याशी पूनम सिन्हा की नजरें भी पुराने लखनऊ पर टिकीं हैं. सभी दलों की चुनावी रणनीति के केंद्र में इस वक्त पुराना लखनऊ है. यहां के वोटरों का समर्थन मिला तो आधा काम पूरा समझिए.

आचार्य प्रमोद कृष्णम को मैदान में उतारकर कांग्रेस ने राजनाथ को घेरने की कोशिश की है. क्योंकि आचार्य प्रमोद के लिए कहा जाता है कि वे शिया संप्रदाय के बारे में अच्छी जानकारी रखते हैं. वे इराक में शियाओं के प्रसिद्द धर्मस्थल के नजफ़ भी रहे हैं. लिहाजा इस बार राजनाथ के लिए परिस्थितियां उतनी अनुकूल नहीं है, प्रमोद कृष्णम राजधानी में शियाओं के चार बड़े धर्मगुरु मौलाना सैफ अब्बास, मौलाना यासूब अब्बास, और मौलाना कल्बे जव्वाद से भी मिल चुके हैं. इतना ही नहीं वरिष्ठ कांग्रेस नेता और शिया संप्रदाय से आने वाली जीशान हैदर नामांकन के दौरान उनके प्रस्तावक भी बने.

न्यूज18 से बातचीत में जीशान हैदर ने बताया, "आचार्य जी अभी तक सभी धर्मगुरुओं से मिल चुके हैं. और सभी को एक ही बात की शिकायत है कि वे मुख्यमंत्री के अली और बजरंगबली वाले बयान से आहत हैं. पूरा समुदाय इस बात से नाखुश है." उन्होंने कहा कि सीएम योगी के इस ब्यान से बीजेपी मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान का चुनाव हार चुकी है और इस बार भी उसे हार का सामना करना पड़ेगा.

उधर वरिष्ठ पत्रकार हुसैन अफसर जो खुद शिया संप्रदाय से हैं कहते हैं. यह धारणा गलत है कि पूरा संप्रदाय बीजेपी को हमेशा सपोर्ट करता है. कुछ नाम हैं, जिन्होंने समर्थन किया है. लेकिन इसे आम धारणा मानना कि शिया मुस्लिम बीजेपी के साथ है तो यह गलत है. उनका कहना है कि मौजूदा सांसद ने शियाओं के लिए या फिर पूरे लखनऊ के लिए कुछ ख़ास नहीं किया. उधर आचार्य प्रमोद कृष्णम की बात करें तो वह हज़रत अली और पैगंबर मोहम्मद के अनुयायी हैं. वे समानता, न्याय और प्यार की बात करते हैं. ये सभी बातें एक नेता को लोगों से जोड़ती हैं. गठबंधन प्रत्याशी पूनम सिन्हा को लेकर वे कहते हैं कि उन्हें पैराशूट प्रत्याशी समझा जा रहा है. लिहाजा इस समय आचार्य प्रमोद कृष्णम संप्रदाय के लिए उपयुक्त प्रत्याशी दिखाई दे रहे हैं.शिया लीडर सैफ अब्बास का कहना है कि केवल शिया या सुन्नी ही नहीं, हिंदू भी मुख्यमंत्री के अली और बजरंगबली के बयान से नाखुश हैं. हमें उम्मीद थी कि राजनाथ सिंह इस पर कोई बयान देंगे ताकि मुसलामानों के गुस्से को शांत किया जा सके, लेकिन ऐसा नहीं हुआ. व्यक्तिगत रूप से राजनाथ सिंह से मेरा कोई बैर नहीं है. वे एक अच्छे इंसान हैं, लेकिन जिस पार्टी का वह प्रतिनिधत्व करते हैं, उसने पूरे मुस्लिम संप्रदाय की भावनाओं को दुखी किया है. जहां तक आचार्य प्रमोद कृष्णम की बात है तो वह खुद संत हैं और प्यरा व भाईचारे की बात करते हैं. वे मुस्लिमों के कार्यक्रम में शामिल होते रहे हैं और मुस्लिम वक्ताओं से अच्छा बोलते भी हैं. उनके वीडियो को भी यू ट्यूब पर खूब देखा जाता है. आचार्य की ये सब बातें उन्हें लोगों से जोड़ती हैं.

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First published: April 25, 2019, 9:04 AM IST
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