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लखनऊ पोस्टर मामला: HC के फैसले पर अमर्यादित टिप्पणी करने वालों पर FIR की मांग

CAA के विरोध में लखनऊ में 19 दिसंबर को हिंसा की घटना हुई थी. सरकार ने आरोपियों के पोस्टर लखनऊ में लगाए थे.
CAA के विरोध में लखनऊ में 19 दिसंबर को हिंसा की घटना हुई थी. सरकार ने आरोपियों के पोस्टर लखनऊ में लगाए थे.

लखनऊ में पोस्टर लगाने के मामले को लेकर सामाजिक कार्यकर्ता ने पुलिस को प्रार्थना पत्र देकर सोशल मीडिया पर इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले पर अमर्यादित व अशोभनीय टिप्पणी करने वालों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग की है.

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लखनऊ. उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ (Lucknow) में सीएए (CAA) हिंसा के आरोपियों के पोस्टर मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट (Allahabad High Court) पर अमर्यादित टिप्पणी करने वालों पर एफआईआर दर्ज करने की मांग उठी है. सामाजिक कार्यकर्ता नूतन ठाकुर ने लखनऊ पुलिस को एफआईआर दर्ज करने का प्रार्थना पत्र दिया है.

प्रार्थना पत्र में सोशल मीडिया पर इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले को लेकर अमर्यादित व अशोभनीय टिप्पणी करने वालों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग की गई है. बता दें कि 9 मार्च को इलाहाबाद हाईकोर्ट में लखनऊ में लगे हिंसा के आरोपियों के पोस्टर पर फैसला सुनाया था. दरअसल, कोर्ट का यह फैसला जैसे ही आया, उसके बाद से ट्विटर पर लगातार 'वाह रे कोर्ट' और 'इलाहाबाद हाईकोर्ट' ट्रेंड कर रहा है. 'वाह रे कोर्ट' हैशटैग तो कुछ ही देर में टॉप पर पहुंच गया. सोशल मीडिया यूजर कोर्ट के इस फैसले पर अपनी प्रतिक्रिया दे रहे थे.

उधर, इलाहाबाद हाईकोर्ट के इस आदेश के खिलाफ यूपी सरकार आज सुप्रीम कोर्ट में अपील करेगी. इलाहाबाद हाईकोर्ट ने लखनऊ में लगे 57 उपद्रवियों के पोस्टर हटाने के लिए आदेश दिया था. लेकिन सरकार ने अभी तक पोस्टर नहीं हटाया है. मामले में 16 मार्च तक यूपी सरकार को इलाहाबाद हाईकोर्ट में जवाब देना है.



जानकारी के अनुसार बुधवार दोपहर सुप्रीम कोर्ट में यूपी सरकार के अधिवक्ता इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ याचिका दाखिल करेंगे. बता दें लखनऊ में 19 दिसंबर 2019 को सीएए प्रदर्शन के दौरान हिंसा करने वाले 57 उपद्रवियों के कई चौराहे पर तस्वीरें लगी हैं. मामले में 1 करोड़ 55 लाख की वसूली आदेश हुआ है.

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