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शाहीन बाग की तर्ज पर लखनऊ में शुरू प्रदर्शन बनेगा 'पुलिस कमिश्नरी सिस्टम' का पहला लिटमस टेस्ट

News18 Uttar Pradesh
Updated: January 18, 2020, 11:30 PM IST
शाहीन बाग की तर्ज पर लखनऊ में शुरू प्रदर्शन बनेगा 'पुलिस कमिश्नरी सिस्टम' का पहला लिटमस टेस्ट
सीएए-एनआरसी के विरोध में लखनऊ में शांतिपूर्ण प्रदर्शन (फाइल फोटो)

पुराने लखनऊ में CAA और NRC को हटाने की मांग को लेकर शुक्रवार सुबह से ही ठंड और कोहरे के बीच महिलाएं बच्चों के साथ प्रदर्शन में शामिल होने के लिए घंटाघर पर इकट्ठा हो गईं. प्रदर्शनकारियों के समर्थन में समाजवादी पार्टी के कुछ नेता भी प्रदर्शन स्थल पहुंचे. शनिवार को भी पुलिस की तमाम कोशिशों के बावजूद प्रदर्शन बदस्तूर जारी है

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लखनऊ. पूरे देश में नागरिकता संशोधन अधिनियम और एनआरसी ( CAA & NRC) को लेकर चल रहा विरोध प्रदर्शन थमने का नाम नहीं ले रहा है. पुलिस और प्रशासन के लिए इन विरोध प्रदर्शनों से निपटना इसलिए भी मुश्किल हो रहा है क्योंकि इन प्रदर्शनों की अगुवाई महिलाऐं कर रही हैं. वहीं लखनऊ में हाल में ही सीएम योगी ने पुलिस कमिश्नरी (Police Commissionerate) व्यवस्था लागू की है और यह व्यवस्था लागू होने के बाद राजधानी में होने वाला यह पहला बड़ा प्रदर्शन है.

पुराने लखनऊ में CAA और NRC को हटाने की मांग को लेकर शुक्रवार सुबह से ही ठंड और कोहरे के बीच महिलाएं बच्चों के साथ प्रदर्शन में शामिल होने के लिए घंटाघर पर इकट्ठा हो गईं. प्रदर्शनकारियों के समर्थन में समाजवादी पार्टी के कुछ नेता भी प्रदर्शन स्थल पहुंचे. शनिवार को भी पुलिस की तमाम कोशिशों के बावजूद प्रदर्शन बदस्तूर जारी है. प्रदर्शनकारियों का कहना है कि हुसैनाबाद घंटाघर पर यह प्रदर्शन अनिश्चितकालीन चलेगा.

शौचालयों पर जड़े ताले
ताजा सूचना के मुताबिक पुलिस महकमे के अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर प्रदर्शनकारी महिलाओं का खाने पीने का सामान जब्त कर लिया. प्रदर्शनकारी महिलाओं से पुलिस की तीखी नोकझोंक भी हुई. पुलिस प्रदर्शन के आसपास से पुरुषों को तो कुछ दूर तक खदेड़ने में सफल रही, पर महिलाऐं टस से मस नहीं हुईं. दरअसल शुक्रवार से चल रहे प्रदर्शन की कमर तोड़ने के लिए पुलिस ने शनिवार को सार्वजनिक शौचालयों पर ताले जड़ने के साथ खाने पीने के सामान भी जब्त कर लिए, जिससे प्रदर्शनकारियों में अफरा तफरी मच गई.

पुलिस कमिश्नरी में जिला प्रशासन ने बनाई दूरी
पुलिस कमिश्नरी व्यवस्था लागू होने से जिला प्रशासन ने प्रदर्शन को कानून व्यवस्था से जुड़ा मुद्दा बताते हुए पूरी तरीके से अपने कदम पीछे कर लिए हैं. अब प्रदर्शनकारियों पर नियंत्रण करने की पूरी जिम्मेदारी पुलिस कमिश्नरी के अधिकारियों के कन्धों पर आ गई है. जिलाधिकारी सहित पूरा प्रशासनिक अमला यानि एडीएम, एसडीएम और तहसीलदार जिन्हें पहले खुद मौके पर पहुंचकर धरना खत्म कराना होता था, अब धरना स्थल से दूरी बना रहे हैं, क्योंकि जाहिर सी बात है कि योगी की पुलिस कमिश्नरी व्यवस्था में यह अधिकार पुलिस के पास है.

(इनपुट -मोहम्मद शबाब )ये भी पढ़ें- प्रयागराज में CAA-NRC के खिलाफ धरने पर बैठी महिलाओं के समर्थन में पहुंचे रेवती रमण...

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First published: January 18, 2020, 11:25 PM IST
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