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आखिर पेट्रोल-डीजल के दामों में लगी आग कब बुझेगी? जानिए, क्या सोचते हैं एक्सपर्ट...

(न्यूज़ 18 ग्राफिक्स)
(न्यूज़ 18 ग्राफिक्स)

एक्सपर्ट का मानना है कि 100 रूपये पर तो दिक्कत होने लगी है. इसका कोई तुक तो बनता नहीं है. 100 रूपये के दाम में 72 रूपये तो टैक्स है. रेवेन्यू का सारा सोर्स सरकारों ने पेट्रोल-डीजल (Petrol-Diesel) पर डाल दिया है. दूसरा, तेल कीमतों के बढ़ने का कोई व्यापक विरोध नहीं हो रहा है. तेल कंपनियों (Oil Companies) के दफ्तर पर जाकर कितने लोगों ने यह बात पूछी होगी

  • News18Hindi
  • Last Updated: February 23, 2021, 5:28 PM IST
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लखनऊ. देश के कई शहरों में पेट्रोल का दाम (Petrol Price) 100 रूपये को पार कर गया है जबकि कई जगहों पर यह सेंचुरी (Century) लगाने वाला है. उत्तर प्रदेश में पेट्रोल 90 रूपये प्रति लीटर के पास आ खड़ा हुआ है. चार राज्यों ने टैक्स कम कर के दाम को थोड़ा नीचे लाने का प्रयास किया है. ऐसे में यूपी में भी तेल के दाम (Petrol-Diesel Price) में क्या कमी हो सकती है, इस मुद्दे पर न्यूज़ 18 ने यूपी पेट्रोलियम ट्रेडर्स एसोसिएशन के अंतरिम अध्यक्ष और Empowring Petrolium Dealers Foundation के अध्यक्ष अश्विनी अत्रीश से बातचीत की.

सवाल: सभी लोग यह जानना चाह रहे हैं कि आखिर पेट्रोल-डीजल के बढ़ते दामों से राहत कब तक मिलेगी?

जवाब: राहत तो मिलनी शुरू हो गयी है. देश के चार राज्यों ने पेट्रोल और डीजल पर टैक्स में कमी कर के लोगों को थोड़ी राहत दी है. अब दूसरे राज्यों में भी ऐसी ही कमी करने का दबाव बनेगा. यदि पब्लिक इस बारे में जोर-शोर से बोलने लगेगी तो और राहत मिल जायेगी.



सवाल: तेल कंपनियां आखिर पेट्रोल-डीजल के रेट कैसे कम कर रही हैं कि हर रोज इसमें बढ़ोतरी हो रही है?
जवाब: ऑयल कंपनियां जो रेट तय कर रही हैं वो दुनिया में तैयार माल के रेट के आधार पर तय कर रही हैं. हालांकि कौन से देश के रेट को बेन्चमार्क बनाकर रेट भारत में तय किया जा रहा है, यह तय नहीं है. जो क्रूड यानी कच्चा तेल कंपनियां खरीदती हैं वो करीब छह महीने पहले के रेट के हिसाब से होता है. बताया यह जा रहा है कि तेल कंपनियां दुनिया के बाजार में बिक रहे तेल के दाम के आधार पर अपने यहां दाम तय कर रही हैं, ना कि कच्चे तेल की कीमत के आधार पर दाम तय हो रहा है. अब यह भी समझ नहीं आ रहा है कि आखिर किस देश को बेन्चमार्क मानकर कीमतें तय की जा रही हैं.

सवाल: भारत के पड़ोसी देशों में तेल की कीमतें कम कैसे हैं?

जवाब: नेपाल और भूटान को हम ही तेल देते हैं. पूरा तेल देते हैं. अब यहीं पर टैक्स का खेल सामने आता है, वहां की सरकारें टैक्स कम लगा रही हैं. यही वजह है कि इन देशों से तेल की स्मग्लिंग शुरू हो गयी है.

सवाल: तेल की यह बढ़ती कीमतें कहां जाकर ठहरेंगी?

जवाब: 100 रूपये पर तो दिक्कत होने लगी है. इसका कोई तुक तो बनता नहीं है. 100 रूपये के दाम में 72 रूपये तो टैक्स है. रेवेन्यू का सारा सोर्स सरकारों ने पेट्रोल-डीजल पर डाल दिया है. दूसरा, तेल कीमतों के बढ़ने का कोई व्यापक विरोध नहीं हो रहा है. तेल कंपनियों के दफ्तर पर जाकर कितने लोगों ने यह बात पूछी होगी.

सवाल: आखिर पब्लिक में बढ़ती कीमतों को लेकर कोई दिखायी देने वाला गुस्सा क्यों नहीं है?

जवाब: देखिये तेल की कीमतों का ज्यादा असर मोटरसाइकिल चलाने वालों और ट्रक वालों पर पड़ता है. ट्रक चालक तो अपना बोझ जनता पर दूसरे तरीके से डाल देते हैं लेकिन, मोटरसाइकिल चलाने वाले किस पर अपना बोझ डालें. दूसरी बात यह है कि पब्लिक को शायद यह लगने लगा है कि जब सभी के दाम बढ़ रहे हैं तो इसके बढ़ने में क्या बुराई है. पब्लिक यह भी समझ रही है कि इसी पैसे से तो विकास के काम कराये जा रहे हैं.

सवाल: क्या मौजूदा समय में किसी फॉर्मूले के जरिये पब्लिक को कोई राहत मिल सकती है?

जवाब: देखिये पब्लिक को तो तभी राहत मिलेगी जब सरकारें टैक्स कम करेंगी. अब टैक्स कम करने से सरकारी खजाने पर असर पड़ेगा. इसमें बैलेन्स बनाना बहुत कठिन है. यदि तेल कंपनियों के मार्जिन कम कर देंगे तो तनख्वाह देना भारी पड़ जायेगा. मान लीजिये किसी राज्य ने टैक्स घटा दिया और वहां तेल की कीमतें कुछ कम हो गयीं तो पड़ोसी राज्यों में तेल की तस्करी की चुनौती खड़ी हो जायेगी.

सवाल: भारत ने कितने देशों में अपने तेल उत्पादन को लेकर करार किया है?

जवाब: भारत पेट्रोलियम, इंडियन ऑयल और ओएनजीसी वगैरह ने खाड़ी देशों के अलावा दक्षिण अमेरिका और रूस में कच्चा तेल निकालने का समझौता किया है. उससे बिकने वाले तेल के दामों में कोई फर्क नहीं पड़ने वाला है. अब तेल कहीं से भी आये उसपर लगने वाले टैक्स और मार्जिन मनी तो वही रहेगी. ऐसे में तेल सस्ता मिलने लगेगा, ऐसा नहीं है.
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