लखनऊ यूनिवर्सिटी में पढ़ाया जाएगा 'ट्रिपल तलाक', धर्मगुरुओं ने जताया ऐतराज

लखनऊ विश्वविद्यालय के समाजशास्त्र विभाग में अभी तक तीन तलाक या उससे संबंधित विषय के बारे में नहीं पढ़ाया जाता था, लेकिन यह विषय कानूनी स्वरूप में आते ही अब शिक्षा के क्षेत्र में शामिल कर लिया गया है.

Mohd Shabab | News18 Uttar Pradesh
Updated: July 25, 2019, 12:15 PM IST
लखनऊ यूनिवर्सिटी में पढ़ाया जाएगा 'ट्रिपल तलाक', धर्मगुरुओं ने जताया ऐतराज
लखनऊ यूनिवर्सिटी में शुरू होगा ये खास विषय. (फाइल फोटो)
Mohd Shabab | News18 Uttar Pradesh
Updated: July 25, 2019, 12:15 PM IST
ट्रिपल तलाक बिल को कई बार संसद से पारित कराने में असफल रहने के बाद केंद्र सरकार ने एक बार फिर इसे लोकसभा में पेश किया है. गुरुवार यानी आज एक बार फिर सरकार इस पर चर्चा कराने की तैयारी में है और इसके बाद इस पर वोटिंग कराई जा सकती है. लेकिन दूसरी तरफ अब छात्रों को भी ट्रिपल तलाक और शाह बानों केस को लखनऊ विश्वविद्यालय में पढ़ाया जाएगा. जी हां, ट्रिपल तलाक जैसे मसलों को लखनऊ विश्वविद्यालय के समाजशास्त्र विभाग ने अपने सिलेबस में जगह दी है.

इस कारण समाजशास्त्र विभाग ने उठाया कदम
एमए समाजशास्त्र विषय में ट्रिपल तलाक जैसी व्यवस्थाओं से समाज में इस पर क्या असर है और इसे लेकर लोगो क्या सोचते हैं. इसकी जानकारी के लिए इसको सिलेबस में शामिल किया गया है, जिसे इस साल से पढ़ाया जाएगा.

विभाग के हेड ऑफ डिपार्टमेंट बीआर साहू कहते हैं कि ट्रिपल तलाक के बारे में आने वाले विद्यार्थियों को जानना चाहिए. तीन तलाक की सामाजिक कुरीतियों और समाज में व्यवस्था तथा इस कानून के बारे में भी पढ़ाया जाएगा. इसके लिए खाका तैयार कर यूनिवर्सिटी कमेटी से पास होकर एजुकेशन काउंसिल को भेजा जा चुका है, जो इसी सत्र से शुरू किया जा सकेगा.

बीआर साहू ये भी कहते हैं कि सिर्फ ट्रिपल तलाक नहीं पढ़ाया जा रहा है बल्कि हिन्दु, मुस्लिम, इसाई सभी धर्मों के विवाह और उनमें तलाक के तरीकों को बताया जा रहा है.


जानकारी के मुताबिक लखनऊ विश्वविद्यालय के समाजशास्त्र विभाग में अभी तक तीन तलाक या उससे संबंधित विषय के बारे में नहीं पढ़ाया जाता था, लेकिन यह विषय कानूनी स्वरूप में आते ही अब शिक्षा के क्षेत्र में शामिल कर लिया गया है. जाहिर है कि कोई विषय लगातार शोध में होता है तो सुधार की सतत प्रक्रिया में शामिल हो जाता है.

धर्मगुरुओं को है ऐतराज
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तीन तलाक जब भी इस विषय की चर्चा समाज में हुई कोई न कोई विवाद जरूर सामने आया. एक पक्ष हमेशा ही इसका समर्थन करता रहा तो दूसरा पक्ष इसे लेकर अपना विरोध दर्ज करता रहा है. धर्मगुरू मौलाना खालिद रशीद कहते हैं कि सिर्फ तलाक को पढ़ाया जाता तो बेहतर होता लेकिन जानबूझकर विवादित मुद्दे को लेकर इस तरह सिलेबस में शामिल किया जाना विवाद को पैदा करेगा.

खालिद रशीद ने कहा, 'आप धर्म से जुड़ी चीजों को बच्चों को जरूर बताएं, लेकिन इन सारे गैर जरूरी मुद्दों से बचना चाहिए. ये आने वाले वक्त में विवाद का सबब बनेगा और इससे बच्चों में गलत धारणा बनेगी.

छात्रों का है ये नजरिया
वहीं समाजशास्त्र विभाग के छात्र इस तरह के पाठ्यक्रम को पढ़ने में रुचि दिखाते हुए कहते हैं कि हमें समाज में घट रही सभी विषयों पर जानकारी होनी चाहिए, क्योंकि समाज के तमाम मुद्दों का हम पर सीधा असर पड़ता है. मुद्दे किसी धर्म से जुड़े हो इससे फर्क नहीं पड़ता. इस लिए हिन्दु, मुसलमान सभी धर्मों से जुड़े मुद्दों को पढ़ाया जाना जरूरी है. जबकि ट्रिपल तलाक का मुद्दा समाज का मौजूदा वक्त में सबसे ज्वलंत मुद्दा है और इस कारण इसको पढ़ाया जाना कतई गलत नहीं है.

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First published: July 25, 2019, 12:12 PM IST
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