COVID-19: LU ने तैयार किया 'नैक मॉडल' मूल्यांकन, राज्यपाल बोलीं- सराहनीय पहल
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COVID-19: LU ने तैयार किया 'नैक मॉडल' मूल्यांकन, राज्यपाल बोलीं- सराहनीय पहल
LU ने तैयार किया 'नैक मॉडल' मूल्यांकन

कुलपति प्रो आलोक राय बताते है कि अवधि, भोजपुरी, कुमाऊनी, गढ़वाली आदि भाषाओं के समुदायों के साथ काम करने वाले लोगों से संपर्क में हमारी टीम हैं.

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लखनऊ. पूरे देश में कोरोना (Corona) संक्रमण से लड़ने के लिए सभी अपना भरसक प्रयास कर रहे हैं. इसी क्रम में लखनऊ विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. आलोक कुमार राय ने राज्यपाल और कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल के सामने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के मानक के अनुसार नैक मूल्यांकन के लिए तैयार मॉडल प्रस्तुत किया. राज्यपाल ने इस मॉडल की सराहना करते हुए इसे सभी विश्वविद्यालयों को उपलब्ध कराने का निर्देश दिया.

गौरतलब है कि 11 जनवरी को नैक मूल्यांकन के संबंध में राजभवन में हुई कुलपतियों की बैठक में सभी विश्वविद्यालयों के लिए आदर्श मॉडल तैयार करने की जिम्मेदारी लखनऊ विश्वविद्यालय (LU) को दी गई थी. राज्यपाल ने कहा कि नैक मूल्यांकन और उच्च शिक्षा में गुणात्मक सुधार लाने के लिए एलयू का मॉडल सराहनीय है. उन्होंने कहा कि वर्ष 2020 में जिन विश्वविद्यालयों का नैक मूल्यांकन होना है, उन्हें यह मॉडल भेजा जाए. इससे उन्हें नैक मूल्यांकन की तैयारियों में परेशानियां नहीं आएंगी. इसके अलावा उन्होंने एलयू की ओर से रिसर्च प्रमोशन और इनोवेशन के लिए उठाए जा रहे कदम की भी सराहना की. उन्होंने कहा कि छात्रों की शिकायतों का ऑनलाइन निस्तारण और उनसे सीधा संवाद बनाए शैक्षणिक वातावरण के लिए अच्छा रहेगा और इससे पठन-पाठन में सहूलियत होगी.

पुलिसकर्मियों को मनोवैज्ञानिक सलाह



कोरोना वायरस के चलते लम्बी ड्यूटी कर रहे 112 के पुलिसकर्मियों को लखनऊ विश्वविद्यालय का मनोविज्ञान विभाग निशुल्क परामर्श देगा. इसके लिए कुलपति प्रो आलोक राय और 112 के एडीजी असीम अरूण के बीच एक समझौता भी हुआ. एलयू प्रशासन का कहना है कि लॉक डाउन का पालन करा रहे पुलिसकर्मी काफी लम्बी ड्यूटी कर रहे हैं. इससे उनमें मानसिक अवसाद बढ़ने की आशंका है. ऐसे में इन पुलिसकर्मियों के लिए एक कार्यक्रम की शुरूआत की जाएगी. मनोविज्ञान विभाग की समन्वयक डॉ अर्चना शुक्ला ने पुलिस कर्मियों को मनोवैज्ञानिक परामर्श देने की बात कहीं है
29 भाषाओं में कोरोना से बचाव की देगा जानकारी

लखनऊ विश्वविद्यालय के भाषा विज्ञान विभाग की प्रो कविता रस्तोगी ने अपने NGO सोसाइटी फ़ॉर एंडेन्जेर्ड एंड लैसर नोन लैंग्वेजेज की टीम के साथ मिलकर भारत सरकार द्वारा दिये गए कोरोना वायरस से बचने के उपाय व अन्य सूचना उत्तरी भारत के 15 क्षेत्रीय और लुप्तप्राय भाषाओं में अनुवादित किया है. यह 29 भाषाएं उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखण्ड, छत्तीसगढ़, असम और मेघालय के विभिन्न प्रान्तों में बोली जाति है. प्रो रस्तोगी ने बताया कि क्षेत्रीय और लुप्तप्राय भाषा बोलने वाले समुदाय के लोगो को covid19 के विषय में उन्ही की भाषा मे सूचना पहुंचाना अति आवश्यक है क्योंकि यह समस्या बहुत ही ज्यादा गंभीर है और इसके खिलाफ सबसे बड़ा हथियार इन्फॉर्मेशन ही है.

कुलपति प्रो आलोक राय बताते है कि अवधि, भोजपुरी, कुमाऊनी, गढ़वाली आदि भाषाओं के समुदायों के साथ काम करने वाले लोगों से संपर्क में हमारी टीम हैं. उन्होंने बताया कि जल्दी ही इन सभी समुदायों के लोगों तक COVID19 से लड़ने और बचने के विषय मे सूचना पहुंचाने में हम दृढ़ संकल्प है.

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