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लखनऊ हिंसा: रिकवरी नोटिस मिलने पर अदालत में चुनौती देंगे सामाजिक कार्यकर्ता
Lucknow News in Hindi

भाषा
Updated: February 20, 2020, 3:59 PM IST
लखनऊ हिंसा: रिकवरी नोटिस मिलने पर अदालत में चुनौती देंगे सामाजिक कार्यकर्ता
सीएए और एनआरसी के खिलाफ यूपी के कई शहरों में हिंसा भड़क उठी थी. (फाइल फोटो)

संशोधित नागरिकता कानून (CAA) के विरोध में 19 दिसंबर, 2019 को राजधानी लखनऊ (Lucknow) में आयोजित प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा और तोड़फोड़ के मामले में आरोपी सामाजिक कार्यकर्ताओं (Social Workers) ने सिलसिले में जारी होने वाली 'रिकवरी नोटिस' को उच्च न्यायालय में चुनौती देने का गुरुवार को ऐलान किया.

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लखनऊ. संशोधित नागरिकता कानून (CAA) के विरोध में 19 दिसंबर, 2019 को राजधानी लखनऊ (Lucknow) में आयोजित प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा और तोड़फोड़ के मामले में आरोपी सामाजिक कार्यकर्ताओं (Social Workers) ने सिलसिले में जारी होने वाली 'रिकवरी नोटिस' को उच्च न्यायालय में चुनौती देने का गुरुवार को ऐलान किया. हिंसा के मामले में आरोपी बनाए गए पूर्व आईपीएस अफसर आर. एस. दारापुरी (RS Darapuri) ने मीडिया को बताया कि उन्हें ऐसी सूचना मिली है कि हिंसा के दौरान सार्वजनिक संपत्ति को पहुंचे नुकसान की भरपाई के लिए उन्हें रिकवरी नोटिस जारी किया गया है. अभी तक कोई नोटिस उन्हें मिला नहीं है. अगर रिकवरी का कोई नोटिस मिलता है तो वह उसे उच्च न्यायालय में चुनौती देंगे.

सरकार से चाहिए मुआवजा
सामाजिक कार्यकर्ता एवं संस्कृतिकर्मी दीपक कबीर ने 'रिकवरी नोटिस' को लेकर कहा कि हमें उल्टे सरकार से मुआवजा चाहिए क्योंकि हमारी छवि खराब की गयी है. कबीर ने 'भाषा' से बातचीत में कहा, 'रिकवरी नोटिस बेबुनियाद है. आदेश अभी नहीं मिला है. जब मिलेगा तो उसे अदालत में चुनौती देंगे. प्रशासन को भी सोचना चाहिए कि यह नागरिकों का उत्पीड़न है.'

30 दिसंबर को मिला था कारण बताओ नोटिस



दारापुरी ने बताया कि इससे पहले गत 30 दिसंबर को उन्हें कारण बताओ नोटिस दिया गया था जिसके जवाब में उन्होंने कहा था कि वह 19 दिसंबर को वारदात के दिन घर में नजरबंद किए गए थे. ऐसे में उनके खिलाफ हिंसा भड़काने का आरोप पूरी तरह से गलत है.

यूपी सरकार मनमानी पर है उतारू
उधर इसी मामले में आरोपी बनाई गई सामाजिक कार्यकर्ता सदफ जाफर ने भी कहा कि सरकार अगर उन्हें रिकवरी नोटिस जारी करती है तो वह उसे अदालत में चुनौती देंगी.
उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार पूरी तरह मनमानी पर उतारू है और असंवैधानिक तरीके से लोगों को रिकवरी नोटिस भेज रही है.

हिंसा भड़काने का नहीं है कोई सबूत
सदफ ने कहा कि उनके खिलाफ हिंसा भड़काने के कोई सबूत नहीं हैं बल्कि फेसबुक पर पड़ा वीडियो इस बात का गवाह है कि उन्होंने दरअसल पुलिस को बताया था कि दंगाई कौन हैं, मगर पुलिस ने उन अराजक तत्वों के खिलाफ कार्रवाई करने के बजाय खुद उन्हें ही गिरफ्तार कर गंभीर प्रताड़ना दी.

सरकार की छवि भी हो रही खराब
कबीर ने कहा, 'सामाजिक रूप से सक्रिय जागरुक लोगों और बेगुनाहों को पकड़ेंगे. हमें उल्टे सरकार से मुआवजा चाहिए. हमारी छवि खराब की गई है. हम पुलिस के खिलाफ भी अदालत में जाएंगे. हमारा नुकसान हुआ है. पुलिस और प्रशासन की इस तरह की दमनपूर्ण कार्रवाई से सरकार की छवि भी खराब हो रही है.'

19 दिसंबर को हुआ था बवाल
गौरतलब है कि गत 19 दिसंबर को लखनऊ के परिवर्तन चौक इलाके में सीएए के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा में सार्वजनिक संपत्ति को हुए नुकसान की भरपाई के लिए अपर जिलाधिकारी (पूर्वी) केपी सिंह ने पिछले सोमवार को 28 लोगों को 63 लाख रुपये की वसूली के आदेश दिए हैं. उन्हें यह रकम आगामी 20 मार्च तक जमा करने के आदेश दिए गए हैं. अगर वे इसमें नाकाम रहते हैं तो उनकी संपत्ति कुर्क कर इस नुकसान की भरपाई की जाएगी.

28 लोगों के होनी है वसूली
जिन 28 लोगों से यह वसूली की जानी है, उनमें सदफ, कबीर और दारापुरी के साथ-साथ रिहाई मंच के अध्यक्ष मोहम्मद शोएब, सामाजिक कार्यकर्ता रोबिन वर्मा और पवन राव अंबेडकर भी शामिल हैं.

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First published: February 20, 2020, 3:59 PM IST
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