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योगी सरकार के बजट पर क्या सोचते हैं UP के अर्थशास्त्री, चुनावी साल में कितना होगा इसका असर?

वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने यूपी सरकार का पांचवां बजट पेश किया, यह पूरी तरह से पेपरलेस बजट था
वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने यूपी सरकार का पांचवां बजट पेश किया, यह पूरी तरह से पेपरलेस बजट था

उत्तर प्रदेश सरकार ने सोमवार को पांचवी बार अपना वार्षिक बजट (UP Budget 2021) पेश किया. पहली बार पेपरलेस बजट (Paperless Budget) में पांच लाख पचास हजार दो सौ सत्तर करोड़ रूपये का बजट पेश किया है

  • News18Hindi
  • Last Updated: February 22, 2021, 8:22 PM IST
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लखनऊ. योगी आदित्यनाथ की सरकार (Yogi Government) ने विधानसभा चुनाव में जाने से पहले अपना आखिरी बजट (UP Budget 2021) पेश कर दिया है. जाहिर है, बजट में ऐसे बिंदुओं पर ध्यान जरूर रहा होगा जो चुनावी साल (Election Year) में सरकार की पौ बारह कर सके. दूसरी तरफ कुछ ऐसी भी बातें होंगी जिनके बारे में यह कहा जायेगा कि थोड़ा और होता तो बेहतर होता. ऐसे में प्रदेश के कुछ अर्थशास्त्रियों (Economists) से जानते हैं कि योगी सरकार का आखिरी बजट कैसा रहा है.

सबसे पहले बात अर्थशास्त्री डॉ. भूपेंद्र बहादुर तिवारी की. लखनऊ के श्री राम स्वरूप मेमोरियल ग्रुप ऑफ प्रोफेशनल कॉलेजेस में अर्थशास्त्र के प्रोफेसर भूपेंद्र बहादुर तिवारी के मुताबिक यह बजट संतुलित बजट है लेकिन, कोरोना काल में लोगों की अपेक्षाएं बहुत बढ़ गयी हैं. रोजगार सृजन की बात करें तो मनरेगा और एमएसएमई (MSME) को छोड़कर सरकार ने स्किल्ड लेबर और पढ़े-लिखे लोगों के लिए बजट में ज्यादा ध्यान नहीं दिखाई दे रहा है. किसान और महिला वर्ग यह सोच रहा था कि गैस और तेल के दिनों दिन बढ़ते दामों से सरकार थोड़ा राहत देगी. उम्मीद थी कि सरकार शायद वैट में थोड़ी कटौती कर देगी जिससे दाम कुछ कम हो जायेंगे लेकिन, ऐसा नहीं हुआ. डीजल की बढ़ती कीमतों का सीधा असर खेती पर पड़ता है. वैट के साथ-साथ पेट्रोलियम पदार्थों पर इण्ट्री टैक्स में थोड़ी कटौती कर के भी राहत दी जा सकती थी.

'बजट संतुलित है लेकिन, कोरोना काल में लोगों की अपेक्षाएं बहुत बढ़ गयीं' 



सरकार ने स्वच्छता मिशन पर जितना खर्च करने की सोची है वो वाकई गौर करने लायक है. स्वच्छता मिशन के लिए सरकार ने भारी बजट का इंतजाम किया है. दूसरी चीज यह है कि शिक्षा पर सरकार ने बहुत पैसे खर्च करने का प्लान बनाया है. कोरोना काल में बच्चों की पढ़ाई बहुत प्रभावित हुई है. ऐसे में नये-नये माध्यमों से बच्चों का भला हो सके, इसके लिए सरकार ने दिल खोलकर पैसा दिया है.
युवाओं को टारगेट करने के लिए फ्री कोचिंग की व्यवस्था के साथ टैबलेट का दिया जाना निश्चित तौर पर काबिले तारीफ है. इसके अलावा पहली बार सामान्य वर्ग के छात्रों के लिए अलग से 1,430 करोड़ रूपये की छात्रवृत्ति का इंतजाम किया गया है. किसानों के लिए भी सरकार ने बड़ा कदम उठाते हुए किसान दुर्घटना बीमा में 600 करोड़ का प्रावधान किया है. खास बात यह है कि अब यह व्यवस्था की गयी है कि किसान के परिवार में किसी भी कमाऊ सदस्य की मौत पर बीमा की रकम मिलेगी.

डॉ. तिवारी ने बताया कि सरकार से यह उम्मीद थी कि इस आखिरी बजट को थोड़ा बढ़ायेंगे. बजट को तो बढ़ाया गया लेकिन, पारंपरिक रूप से ही. हर बार 12-13 प्रतिशत बढ़ाते थे. अबकी बार बजट बहुत बढ़ाया नहीं गया है. 2018-19 की तुलना में 2019-2020 के बजट में 51 हजार करोड़ रूपये की बढ़ोतरी की गयी थी लेकिन, कोरोना काल में ज्यादा की उम्मीद के बीच सरकार ने सिर्फ 37 हजार करोड़ ही बढ़ाया है. दूसरी बड़ी बात यह है कि राजस्व घाटा मात्र चार हजार करोड़ का हुआ है. बजट की बेहतरीन बात यह है कि केन्द्र सरकार का राजकोषीय घाटा आठ प्रतिशत के आसपास है जबकि योगी सरकार का घाटा सिर्फ 4.17 प्रतिशत ही रखा गया है.

'अपेक्षा से बिल्कुल हटकर ग्रोथ ओरिएण्टेड है बजट' 

दूसरी तरफ लखनऊ विश्वविद्यालय में अर्थशास्त्र विभाग के हेड डॉ. अरविंद मोहन ने कहा कि कई मायनों में यह बजट अहम है और अपेक्षा से बिल्कुल हटकर ग्रोथ ओरिएण्टेड बजट है. पहला सच तो यह है कि सारी दुनिया में कोविड 19 का असर है. यहां तक कि केन्द्र सरकार का घाटा भी बढ़ा है क्योंकि टैक्स से पैसे नहीं आ पाये. ऐसी सूरत में राज्य सरकार ने बिल्कुल अलग कहानी लिखी है. जितने भी अहम टैक्स हैं उन सबमें बढ़ोतरी है. अर्थव्यवस्था की हालत जितनी गिरती दिख रही थी उतनी हुई नहीं. बल्कि कई करों में तो बहुत अच्छी आमदनी हुई है. नयी योजनाओं के लिए अलग से हजारों करोड़ का प्रावधान करना बहुत बड़ी बात है. इससे पता चलता है कि राज्य की आर्थिक रीढ़ को सुधारने के लिए कोशिशें की गयी हैं.

उन्होंने कहा कि भले ही इसे लोकलुभावन बजट न कहा जाये लेकिन, इन्फ्रास्ट्रक्चर और लोगों के जीवन यापन को सहज बनाने की कोशिशें दिख रही हैं. इस मुश्किल वक्त में एक अर्थशास्त्री के नाते मैं बिल्कुल नहीं मानता कि पेट्रोलियम पदार्थों पर वैट कम कर के दाम घटाये जायें. कोरोना की मार के बीच जो ठप हो गया है उसे फिर से रिस्टार्ट करने के लिए पैसे तो चाहिए ही.
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