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जब 1998 में महाराष्ट्र जैसा ही कुछ यूपी में भी हुआ था, फिर सुप्रीम कोर्ट के आदेश से बदल गई थी बाजी

Amit Tiwari | News18 Uttar Pradesh
Updated: November 25, 2019, 12:08 PM IST
जब 1998 में महाराष्ट्र जैसा ही कुछ यूपी में भी हुआ था, फिर सुप्रीम कोर्ट के आदेश से बदल गई थी बाजी
पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह को बेदखल कर जगदंबिका पाल को दिलवाई गई थी शपथ

दरअसल, 1998 में तत्कालीन राज्यपाल रोमेश भंडारी (Governor Romesh Bhandari) ने कल्याण सिंह (Kalyan Singh) सरकार को बर्खास्त करते हुए जगदंबिका पाल (Jagdambika) को मुख्यमंत्री पद की शपथ दिलवा दी थी.

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लखनऊ. महाराष्ट्र (Maharashtra) में पल-पल बनते बिगड़ते सियासी समीकरण (Political Equation) उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) में हुए उस सियासी उथल-पुथल की याद दिलाते हैं जब रातों-रात कल्याण सिंह (Kalyan Singh) सत्ता से बेदखल हो गए थे और जगदंबिका पाल (Jagdambika Pal) ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी. दरअसल, 1998 में तत्कालीन राज्यपाल रोमेश भंडारी (Governor Romesh Bhandari) ने कल्याण सिंह सरकार को बर्खास्त करते हुए जगदंबिका पाल को मुख्यमंत्री पद की शपथ दिलवा दी थी. जिसके बाद बीजेपी इस मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट पहुंची थी. मामले की सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कम्पोजिट फ्लोर टेस्ट का आदेश दिया था. जिसमें कल्याण सिंह को 225 मत हासिल हुए थे और जगदंबिका पाल को 196 वोट मिले थे.

कल्याण ने किया था बहुमत साबित
इस मामले में तत्कालीन स्पीकर केसरी नाथ त्रिपाठी द्वारा 12 सदस्यों को दल-बदल कानून के तहत अयोग्य करार देने पर उनकी भूमिका की भी काफी आलोचना हुई थी. हालांकि जब 12 सदस्यों ने कल्याण सिंह के समर्थन में वोट किया और उनके वोटों को अंत में घटाया गया तब भी कल्याण सिंह के पास सदन में पूर्ण बहुमत था. इससे पहले कल्याण सिंह के बहुमत परीक्षण के ऑफर को राज्यपाल ने पहले खारिज कर दिया था. हालांकि वह दोबारा राज्य के मुख्यमंत्री बने.

सुप्रीम कोर्ट में हो रही सुनवाई

महाराष्ट्र में शनिवार को देवेंद्र फडणवीस के मुख्यमंत्री और एनसीपी के अजित पवार के उपमुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के बाद अब ऐसा ही कुछ माहौल बना है जैसा 1998 में उत्तर प्रदेश में था. राज्यपाल ने देवेंद्र फडणवीस को 30 नवंबर तक बहुमत साबित करने को कहा है. जिसके बाद एनसीपी, कांग्रेस और शिव सेना रविवार को सुप्रीम कोर्ट पहुंच गईं. इस मामले में अहम सुनवाई सोमवार को भी हो रही है. दिलचस्प ये है कि एनसीपी, कांग्रेस और शिव सेना की तरफ से दाखिल याचिका में 1998 में सुप्रीम कोर्ट के आदेश का हवाला दिया गया. तीनों ही दलों की तरफ से दाखिल याचिका में दावा किया गया है कि उनके पास बहुमत है और मौजूदा सरकार अल्पमत में है. लिहाजा ऐसी स्थित में जब एक से अधिक दावेदार हों तो बहुमत परीक्षण ही एकमात्र विकल्प हो सकता है.

कल्याण सरकार में ही मंत्री थे जगदंबिका पाल
बता दें जगदंबिका पाल उस वक्त कल्याण सिंह सरकार में ट्रांसपोर्ट मिनिस्टर थे. उन्होंने विरोधियों के संग मिलकर तख्ता पलट कर दिया था. उस समय केंद्र में कांग्रेस समर्थित यूनाइटेड फ्रंट की सरकार थी और इंद्र कुमार गुजराल देश के प्रधानमंत्री थे. भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के उत्तर प्रदेश की सत्ता से बेदखल होने के बाद दिग्गज नेता अटल बिहारी वाजपेयी आमरण अनशन पर बैठ गए थे.यह भी पढ़ें :

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First published: November 25, 2019, 11:33 AM IST
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