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'बीडीएम' फैक्टर के सहारे बीजेपी का विकल्प पेश करने की रणनीति पर मायावती!

Amit Tiwari | News18 Uttar Pradesh
Updated: June 24, 2019, 11:26 AM IST
'बीडीएम' फैक्टर के सहारे बीजेपी का विकल्प पेश करने की रणनीति पर मायावती!
बसपा सुप्रीमो मायावती की फाइल फोटो

बसपा की रणनीति का संकेत साफ है कि वह यूपी में बसपा को बीजेपी के मुकाबले अकेले मोर्चा लेने वाली पार्टी के रूप में भी पेश करना चाहती हैं.

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सपा-रालोद से गठबंधन के बावजूद लोकसभा चुनाव में अपेक्षा के अनुरूप सफलता न मिलने के बाद संगठन में बड़ा फेरबदल कर बसपा सुप्रीमो मायावती ने आगामी उपचुनाव और 2022 के लोकसभा चुनाव में अपने बलबूते कामयाबी के लिए रणनीति बनायी है. इसके लिए उनका फोकस ब्राह्मण-दलित-मुस्लिम (बीडीएम) गठजोड़ पर केन्द्रित होगा. बसपा की रणनीति का संकेत साफ है कि वह यूपी में बसपा को बीजेपी के मुकाबले अकेले मोर्चा लेने वाली पार्टी के रूप में भी पेश करना चाहती हैं.

रविवार को बसपा में हुए संगठनात्मक फेरबदल को देखते हुए मायावती की आगामी रणनीति के संकेत मिल रहे हैं. यह ठीक वैसा ही है जैसा कि उन्होंने 2007 में किया था. गठबंधन की असफलता के बाद मायावती संगठन को मजबूत कर अकेले बीजेपी से लोहा लेता हुआ दिखना चाहती हैं. इसकी एक वजह ये है कि कांग्रेस यूपी में हाशिए पर है और समाजवादी पार्टी अभी तक हार की समीक्षा भी नहीं कर सकी है. लिहाजा बीजेपी को मिले करीब 50 प्रतिशत वोट के बाद बाकी के वोटों पर मायवती की निगाहें हैं. बसपा ने इसी रणनीति पर आगे बढ़ते हुए संगठन में लोगों को अलग-अलग जिम्मेदारी दी गई है.

बीजेपी का विकल्प दिखाने की कोशिश

बसपा के एक वरिष्ठ नेता कहते हैं कि पार्टी अपनी रणनीति पर काम कर रही है. यूपी में कांग्रेस अपना वजूद तलाश रही और सपा हार से उबर नहीं पाई है. ऐसे में बसपा ही बीजेपी का विकल्प है यही दिखाने की कोशिश की जा रही है. बसपा उस वोट बैंक को एकजुट करने की कोशिश में है जो बीजेपी के खिलाफ पड़े. वे कहते हैं कि लोकसभा चुनाव में बीजेपी को मिले वोट करीब 50 फ़ीसदी थे. बाकी के 50 फ़ीसदी वोट को बसपा साधने की कोशिश में है. इसी रणनीति पर आगे बढ़ने के निर्देश भी पार्टी सुप्रीमो की तरफ से दिए गए हैं.

सोशल इंजीनियरिंग में 'बीडीएम' को तवज्जो

अपने सोशल इंजीनियरिंग को धार देने के लिए मायावती ने राज्यसभा में बसपा नेता की जिम्मेदारी पार्टी के ब्राह्मण चेहरा सतीश चंद्र मिश्रा को सौंपी है. अमरोहा से बसपा सांसद दानिश अली लोकसभा में पार्टी के नेता होंगे. उनकी जिम्मेदारी सुरक्षित सीटों पर मुस्लिम और दलित वोटों को एकजुट करने की होगी. इसी तरह विधानसभा में बसपा विधानमंडल दल के नेता की जिम्मेदारी पिछड़े वर्ग के लालजी वर्मा के पास है. विधान परिषद में दल के नेता एससी वर्ग के दिनेश चंद्र के पास है. मायावती की रणनीति साफ़ है कि वे सभी वर्गों की भागीदारी वाले फ़ॉर्मूले पर आगे बढ़ रही हैं.

बसपा के बेस वोट में मुस्लिमों के शामिल होने का संदेश2012 से यूपी में मिल रही शिकस्त के बावजूद मायावती यह दावा करती रही हैं कि दलित वोट आज भी उनके साथ खड़ा है. इस बार के लोकसभा चुनाव में बसपा को मुस्लिमों का भी साथ मिला है. मुसलमान अब तक सपा का बेस वोट माना जाता रहा है. मायावती इसे बा बसपा के बेस वोट में शामिल होने का सन्देश भी देना चाहती हैं.

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First published: June 24, 2019, 11:26 AM IST
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