मायावती ने क्यों की अखिलेश यादव की तारीफ, ये है वजह

सूत्र ने कहा, 'मायावती ने उपचुनाव लड़ने का ऐलान किया है. इसका मतलब यह तो नहीं कि वो गठबंधन तोड़ रही हैं. उनका कहने का मकसद यह रहा होगा कि पुरानी परंपरा को तोड़कर वो खुद के पार्टी सिंबल पर उपचुनाव लड़ना चाहती हों.'


Updated: June 3, 2019, 9:46 PM IST
मायावती ने क्यों की अखिलेश यादव की तारीफ, ये है वजह
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Updated: June 3, 2019, 9:46 PM IST
उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री और बहुजन समाज पार्टी (BSP) प्रमुख मायावती ने लोकसभा चुनाव में हुई पार्टी की हार पर समीक्षा बैठक की. इस बैठक में समाजवादी पार्टी (SP) और राष्ट्रीय लोक दल (RLD) के साथ गठबंधन में चुनाव लड़ने के बाद भी मनमाफिक नतीजे नहीं मिलने पर भी मंथन किया गया. वहीं खबर आई कि मायावती गठबंधन से रिश्ता खत्म कर सकती हैं. लेकिन बीएसपी की इस बैठक में मौजूद रहे लोगों से बात करने वाले समाजवादी पार्टी के एक सूत्र ने बताया कि मायावती ने अखिलेश यादव और समाजवादी पार्टी की जमकर तारीफ की है.

सूत्र ने कहा, 'मायावती ने उपचुनाव लड़ने का ऐलान किया है. इसका मतलब यह तो नहीं कि वो गठबंधन तोड़ रही हैं. उनका कहने का मकसद यह रहा होगा कि पुरानी परंपरा को तोड़कर वो खुद के पार्टी सिंबल पर उपचुनाव लड़ना चाहती हैं.'

आम तौर पर देखा गया है कि बीएसपी उपचुनाव में हिस्सा नहीं लेती है. उन्होंने कहा, 'बीएसपी के एक विधायक सांसद बन गए हैं. इसके अलावा कई सीट पर बीएसपी को एसपी से ज्यादा वोट मिले हैं तो ऐसे में हो सकता है कि कुछ सीटों पर बीएसपी चुनाव लड़े और कुछ पर एसपी.'

'बीएसपी की बैठक में क्या हुआ, इसकी जानकारी नहीं'

तमाम अटकलों के बीच अभी तक बीएसपी की तरफ से कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है. वहीं इस मामले पर एसपी प्रमुख अखिलेश यादव ने कहा कि अभी मुझे मायावती की समीक्षा बैठक में क्या हुआ, इसकी कोई जानकारी नहीं है. लेकिन मैं एक बात कह सकता हूं कि जमीन पर काम करके ही बीजेपी को हराया जा सकता है. मैं अभी आजमगढ़ में हूं, कार्यकर्ताओं से मिल रहा हूं.

ऐसा रहा गठबंधन का हाल
हाल ही में हुए लोकसभा चुनावों में उत्‍तर प्रदेश की 80 सीटों पर समाजवादी पार्टी, बहुजन समाज पार्टी और राष्‍ट्रीय लोक दल ने मिलकर चुनाव लड़ा था. इस दौरान एसपी ने 37, बीएसपी ने 38 और आरएलडी ने तीन सीटों पर चुनाव लड़ा था.
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बहरहाल, 2014 के लोकसभा चुनावों में अपना खाता खोलने में नाकाम रही बीएसपी ने इस बार दस सीटें जीती हैं तो सपा को पांच सीटें मिली हैं. समाजवादी पार्टी को पिछले लोकसभा चुनाव में भी पांच सीटों पर जीत मिली और इस लिहाज से उसे गठबंधन का कोई फायदा नहीं हुआ. वहीं, उसे बदायूं, कन्‍नौज और फिरोजाबाद में हार मिली है, जिसे समाजवादी गढ़ माना जाता है. अगर आरएलडी की बात करें तो पिछली बार भी उसका खाता नहीं खुला था और इस बार भी हालात ज्‍यों के त्‍यों रहे.

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First published: June 3, 2019, 8:52 PM IST
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