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हाइटेक होती यूपी पुलिस के ये हैं साइबर कॉप आॅफ इंडिया

हाइटेक होती यूपी पुलिस के ये हैं साइबर कॉप आॅफ इंडिया

दक्षिण कोरिया मं वीजा सिक्योरिटी सम्मेलन में सम्मानित होते डॉ​ त्रिवेणी सिंह. Image : News 18 Hindi News

दक्षिण कोरिया मं वीजा सिक्योरिटी सम्मेलन में सम्मानित होते डॉ​ त्रिवेणी सिंह. Image : News 18 Hindi News

यूपी एसटीएफ के एक पुलिस अफसर देश ही नहीं अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर यूपी पुलिस की शान बन चुके हैं.

    उत्तर प्रदेश पुलिस बदल रही है. ट्विटर से लेकर फेसबुक तक उत्तर प्रदेश पुलिस के सक्रियता देश भर में अपनी अलग पहचान बना रही है. इसी क्रम में यूपी एसटीएफ के एक पुलिस अफसर देश ही नहीं अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर यूपी पुलिस की शान बन चुके हैं.

    इस अधिकारी ने अकेले दम पर देश के 100 से ज्यादा बड़े साइबर अपराधों का खुलासा किया. 600 से ज्यादा अपराधियों को जेल भेजा. यही नहीं सीबीआई जैसे संस्थानों में ये साइबर से जुड़े गुर सिखाने जाते हैं. इन्हें नैसकॉम व डीएससीआई द्वारा साइबर कॉप ऑफ इंडिया के खिताब से नवाजा भी जा चुका है.

    उत्तर प्रदेश स्पेशल टास्क फोर्स के सुपर कॉप एडिशनल एसपी डॉ त्रिवेणी सिंह को पिछले दिनों दक्षिण कोरिया में वीजा सिक्योरिटी सम्मेलन में सम्मानित किया गया. सम्मेलन में डॉ त्रिवेणी सिंह को लॉ एंड इनफोर्समेंट अवार्ड से सम्मानित किया गया.

    यह अवार्ड यूपी एसटीएफ को साइबर क्राइम के क्षेत्र में महत्वपूर्ण कार्य करने के लिए दिया गया. डॉ त्रिवेणी सिंह बैंक फ्रॉड से लेकर साइबर क्राइम में पिछले कई वर्षों से काम कर रहे हैं. उन्होंने 3700 करोड़ रुपए की एब्लेज इंफो सॉल्यूशन फ्रॉड से लेकर 100 से ज्यादा बड़े साइ​बर अपराध की घटनाओं का खुलासा किया है.

    डॉ त्रिवेणी सिंह हाइटेक होती उत्तर प्रदेश पुलिस का वह चेहरा हैं, जो न सिर्फ उत्तर प्रदेश बल्कि राष्ट्रीय व अंतराष्ट्रीय स्तर पर न्यायिक सेवा, पुलिस सेवा से लेकर सीबीआई एकेडमी में साइबर क्राइम पर व्याख्यान देते हैं.

    उनकी इसी उपलब्धि पर उन्हें नैसकॉम व डीएससीआई द्वारा साइबर कॉप ऑफ इंडिया से सम्मानित कर चुके हैं. डॉ त्रिवेणी सिंह इस समय यूपी एसटीएफ, लखनऊ में एएसपी हैं और प्रदेश में होने वाले साइबर क्राइम की घटनाओं की मॉनिटरिंग करते हैं. डॉ त्रिवेणी सिंह देश के पहले पुलिस अधिकारी हैं, जिन्होंने साइबर क्राइम में पीएचडी की डिग्री हासिल की है.

    देश में साइबर फ्रॉड के मामले तेजी से बढ़ने और उन्हें रोकने की कोशिशों पर डॉ त्रिवेणी सिंह कहते हैं कि इसकी मुख्य वजह पढ़े लिखे लोगों द्वारा भी अपने बैंक खातों की जानकारी दूसरे को दे देना है. छोटी-छोटी सावधानियों से लोग बड़े फ्रॉड से आसानी से बच सकते हैं. मसलन फोन पर किसी को खाते की जानकारी साझा न करें. ओटीपी किसी को न बताएं. जैसे ही फ्रॉड का शक हो, तुरंत साइबर सेल को सूचित करें.

    उत्तर प्रदेश में साइबर अपराधों की रोकथाम पर ​डॉ त्रिवेणी सिंह ने बताया कि पश्चिम उत्तर प्रदेश में साइबर थाना बनाए जाने को लेकर प्रयास चल रहा है. इससे काफी सुधार होने की उम्मीद है. दूसरे राज्यों में तो साइबर सेल के लिए अलग से डीजीपी तक तैनात किए गए हैं.

    फेसबुक आदि पर महिलाओं के उत्पीड़न की बातें सामने आती रहती हैं. इस पर ​डॉ त्रिवेणी सिंह कहते हैं कि फर्जी आईडी बनाना कानूनी अपराध है. लेकिन इसके लिए महिलाओं का जागरूक होना पड़ेगा. जैसे ही उनके साथ उत्पीड़न आदि की घटना हो, वह तुरंत इसकी शिकायत दर्ज कराएं. एसटीएफ ने कई ऐसे मामलों में सफल कार्रवाई की है.

    त्रिवेणी सिंह मूल रूप से बलिया के रहने वाले हैं. 1994 बैच के उत्तर प्रदेश पुलिस सेवा के अधिकारी हैं और प्रदेश के कई जनपदों में इनकी तैनाती रही है. नोएडा में साइबर क्राइम सेल में एएसपी रहे हैं और बरेली जैसे बड़े शहर में एसपी सिटी के रूप में बेहतरीन काम किया है.

    डॉ. त्रिवेणी सिंह भारत के राष्ट्रपति द्वारा गैलेंट्री अवार्ड से सम्मानित किए जा चुके हैं. उनकी कुछ प्रमुख उपलब्धियों की बात करें तो 3700 करोड़ रुपए के पांजी स्कैम, रेलवे एक्जाम पेपर लीक, जॉब पोर्टल, इंश्योरेंस फ्रॉड जैसे 100 से अधिक बड़े क्राइम की घटनाओं का खुलासा किया है.
    डा. त्रिवेणी सिंह
    - देश में साइबर क्राइम में पीएचडी करने वाले पहले पुलिस अधिकारी
    - इथिकल हैकर, फॉरेंसिक एक्सपर्ट
    - साइबर लॉ में एमबीए, वित्त में विशेषज्ञ

    सम्मान
    - भारत के राष्ट्रपति से गैंलेंट्री अवार्ड से सम्मानित
    - नैसकॉम व डीएससीआई द्वारा साइबर कॉप ऑफ इंडिया से सम्मानित
    - एमिटी विश्वविद्यालय द्वारा लाइफ टाइम एचीवमेंट पुरस्कार
    - सीबीआई डायरेक्टर द्वारा सर्टिफिकेट ऑफ ऑनर
    - डीजीपी उत्तर प्रदेश द्वारा सर्टिफिकेट ऑफ ऑनर
    - डिजीटल इनवेस्टिगेटर्स एसोसिएशन द्वारा लाइफ टाइम एचीवमेंट पुरस्कार
    - एमिटी विश्वविद्यालय द्वारा मानद प्रोफेसर की उपाधि

    इन संस्थानों में सिखाते हैं साइबर फ्रॉड से बचने से गुर
    - सीबीआई एकेडमी, गाजियाबाद
    - नेशनल पुलिस एकेडमी, हैदराबाद
    - इंस्टीट्यूट ऑफ चार्टर्ड एकाउंटेंट ऑफ इंडिया
    - उत्तर प्रदेश पुलिस कंप्यूटर सेंटर
    - डा. भीमराव अंबेडकर पुलिस एकेडमी, मुरादाबाद
    - इंस्टीट्यूट ऑफ कंपनी सेक्रेट्री ऑफ इंडिया
    - नॉर्थ इस्टर्न पुलिस एकेडमी, मेघालय
    - डाटा सिक्योरिटी काउंसिल ऑफ इंडिया
    - सेंट्रल डिटेक्टिव ट्रेनिंग स्कूल, गाजियाबाद
    - ज्यूडिशियल ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट, महाराष्ट्र
    - आईआईएम, लखनऊ
    - ज्यूडिशियल ट्रेनिंग रिसर्च इंस्टीट्यूट, लखनऊ
    - गुजरात फॉरेंसिक साइंस यूनीवर्सिटी, गांधीनगर

    इन बड़ी घटनाओं का किया खुलासा
    डा. त्रिवेणी सिंह ने देश भर में 100 से अधिक साइबर फ्रॉड की घटनाओं का खुलासा किया हैं. इनमें उत्तरप्रदेश, दिल्ली, बिहार, राजस्थान शामिल हैं.
    - नोएडा में 3700 करोड़ रुपये का एब्लेज इंफो सॉल्यूशन फ्रॉड का खुलासा
    - जयपुर में रेलवे पेपर लीक मामला, 105 की गिरफ्तारी
    - नोएडा में इंश्योरेंस फ्रॉड, 121 गिरफ्तार
    - दिल्ली में फेक कंपनियों कर ख्ुालासा, 87 गिरफ्तार
    - नोएडा में फेक वेबसाइट चलाने वालों का खुलासा, 59 गिरफ्तार
    - नोएडा में फेक जॉब वेबसाइट चलाने वालों का खुलासा

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    Tags: लखनऊ

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