यह मानसिक दिव्यांग नहीं हैं किसी से कम, हुनर जानकर चौंक जाएंगे आप
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यह मानसिक दिव्यांग नहीं हैं किसी से कम, हुनर जानकर चौंक जाएंगे आप
मानसिक रूप से पीड़ित दिव्यांग बच्ची की फोटो.

27 साल के पल्लव मानसिक और शारीरिक दिव्यांग होने के बावजूद लॉस एंजेल्स, ऑस्ट्रेलिया और बांग्लादेश में बेस बॉल और क्रिकेट के खेल में भारत के लिए गोल्ड व सिल्वर मेडल जीत चुके हैं.

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राजधानी लखनऊ के आशा ज्योति केंद्र में ऐसे कई मानसिक दिव्यांग मिलेंगे जो अब समाज की मुख्य धारा से जुड़ रहे हैं. इनमें काई ऑटिज्म का शिकार है तो कोई डाउन सिंड्रोम या ब्रेन डैमेज का. बावजूद इसके यह मानसिक दिव्यांग आज खेल, संगीत और गायन के क्षेत्र में अपना हुनर दिखा रहे हैं. यहां रहने वाले 27 साल के पल्लव मानसिक और शारीरिक दिव्यांग होने के बावजूद लॉस एंजेल्स, ऑस्ट्रेलिया और बांग्लादेश में बेस बॉल और क्रिकेट के खेल में भारत के लिए गोल्ड व सिल्वर मेडल जीत चुके हैं.

अब वह इस केंद्र के बाकी दिव्यांगों को खेलों की ट्रेनिंग भी देते हैं. इनकी ट्रेनिंग से यहीं के दिव्यांग निशांक मिश्रा ने नेशनल लेवल पर वेट लिफ्टिंग में दो सिल्वर मेडल जीत चुके है. यहां अपने बच्चों में आ रहे बदलाव को देखने के बाद अब अभिभावकों की सोच भी उन्हें लेकर बदलने लगी है.

आशा ज्योति केंद्र की प्रिंसिपल स्वाति शर्मा की फोटो.




आशा ज्योति केंद्र की प्रिंसिपल स्वाति शर्मा खुद एक ऐसे स्पेशल चाइल्ड की मां भी हैं जो रेयर केस में आता है. इस केंद्र पर 7 साल के बच्चों से लेकर 59 साल से अधिक उम्र तक के मानसिक दिव्यांग हैं. इन्हें बेसिक एजुकेशन से लेकर स्पोर्ट्स, योगा, म्यूजिक, डांस, कैंडल मेकिंग, सिलाई, बुनाई, सब सिखाया जाता है. यहां ड्राइंग और क्राफ्ट में बच्चों का हुनर देखते ही 'तारे जमीं पर' फिल्म के दर्शिल सफारी की याद ताजा हो जाती है. खास बात यह भी है कि आज यहां रहने वाले मानसिक दिव्यांग दूसरों के लिए हौसला बन रहे हैं.



(रिपोर्ट: शैलेश अरोड़ा/लखनऊ)
First published: March 27, 2018, 5:14 PM IST
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