लखनऊ: बढ़ते कोरोना संक्रमण और लॉकडाउन की आहट के डर से प्रवासी मजदूरों का पलायन शुरू

लखनऊ के पॉलिटेक्निक चौराहे पर प्रवासियों की बड़ी संख्या घरों को लौटती दिखाई दे रही है.

लखनऊ के पॉलिटेक्निक चौराहे पर प्रवासियों की बड़ी संख्या घरों को लौटती दिखाई दे रही है.

Lucknow News: राजधानी लखनऊ में कोरोना संक्रमण की बढ़ती रफ्तार और लॉकडाउन की आहट के डर से लखनऊ से पलायन शुरू कर दिया है. इनमें कई ऐसे भी हैं, जो विभिन्न राज्‍यों से लखनऊ आए हैं और यहां से अपने-अपने घरों के लिए रवाना हो रहे हैं.

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लखनऊ. कोरोना के बढ़ते संक्रमण के बीच प्रवासी मजदूरों ने विभिन्‍न राज्‍यों से अपने-अपने घरों के लिए पलायन शुरू कर दिया है. राजधानी लखनऊ से भी बड़ी संख्या में मजदूरों ने पलायन शुरू कर दिया है. पूर्वांचल की बसों में खचाखच भर के मजदूर अपने-अपने गांव लौटना शुरू कर चुके हैं. राजधानी लखनऊ के पॉलिटेक्निक चौराहे पर बड़ी संख्या में मजदूरों का रेला लगा है. बड़ी संख्या में मजदूर अपने परिवार के साथ बसों का इंतजार करते नजर आ रहे हैं. वैसे कोरोना के बढ़ते मामलों के अलावा यूपी में चल रहे पंचायत चुनाव को भी इस पलायन की वजह माना जा रहा है.

बता दें यूपी के अपर मुख्य सचिव (स्वास्थ्य) अमित मोहन प्रसाद ने मजदूरों के लिए नई क्वारेंटाइन गाइडलाइन जारी भी जारी की हैं. प्रवासी मजदूरों अब अपने घर लौटने लगे हैं. कोरोना वायरस की दूसरी लहर ने पूरे देश में कोहराम मचा रखा है. इस बीच कई राज्‍यों ने लॉकडाउन और नाइट कर्फ्यू जैसे कदम उठाए हैं. उत्तर प्रदेश में संडे लॉक डाउन व नाईट कर्फ्यू को लेकर मजदूरों में डर साफ देखने को मिल रहा है. राजधानी लखनऊ में कोरोना की विद्युत गति से बढ़ती रफ्तार के साथ लॉकडाउन की आहट के बाद प्रवासी मजदूरों ने विभिन्‍न राज्‍यों से लखनऊ आकर अपने-अपने घरों के लिए पलायन शुरू कर दिया है.

प्रवासी मजदूरों के लिए जारी की गई गाइडलाइन

इस बीच उत्‍तर प्रदेश सरकार ने भी प्रवासी मजदूरों के लिए गाइडलाइन जारी कर दी है. उत्तर प्रदेश के अपर मुख्य सचिव (स्वास्थ्य) ने प्रदेश में प्रवासी मजदूरों के लौटने पर उन्हें क्वारेंटाइन करने को लेकर गाइडलाइन जारी की है. गाइडलाइन के मुताबिक, लक्षण वाले जो व्यक्ति संक्रमित नहीं पाए जाते उन्हें 14 दिन और बिना लक्षण वाले लोगों को 7 दिन के लिए होम क्वारेंटाइन में भेजा जाएगा.
यही नहीं, इस गाइडलाइन में साफ कहा गया है कि प्रवासी मजदूर के अपने जिले में पहुंचने पर जिला प्रशासन उसकी न सिर्फ स्‍क्रीनिंग करे बल्कि उसका नाम, पता और मोबाइल नंबर समेत अहम जानकारियों की लिस्‍ट भी तैयार करे.
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