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AIMPLB बैठक: मंत्री मोहसिन रजा ने पूछा- जब कहा था मानेंगे SC का हर फैसला तो अब मीटिंग क्यों?

News18 Uttar Pradesh
Updated: November 17, 2019, 10:57 AM IST
AIMPLB बैठक: मंत्री मोहसिन रजा ने पूछा- जब कहा था मानेंगे SC का हर फैसला तो अब मीटिंग क्यों?
योगी सरकार में मंत्री मोहसिन रजा ने ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की अयोध्या फैसले को लेकर हो रही बैठक पर सवाल उठाए हैं. (फाइल फोटो)

अयोध्‍या मामले में सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) के फैसले के खिलाफ अपील करने की बात कही जा रही है. इस बीच, योगी सरकार में राज्यमंत्री मोहसिन रजा ने कहा कि पर्सनल लॉ बोर्ड (AIMPLB) सिर्फ राजनीतिक रोटियां सेंकने के लिए इस तरह की मीटिंग करता है.

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लखनऊ. अयोध्‍या पर सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court Of India) के फैसले (Ayodhya Verdict) को लेकर ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (AIMPLB) की अहम बैठक रविवार को लखनऊ में हो रही है. इस बैठक में बोर्ड फैसले को लेकर अपना रुख स्पष्ट करेगा. माना जा रहा है कि फैसले के खिलाफ अपील की जा सकती है. इसका कारण यह है कि बैठक से पहले शनिवार को मामले में अधिकतर पक्षकारों ने दोबारा अपील की मंशा जाहिर की है. उधर, योगी सरकार में मंत्री मोहसिन रजा ने बोर्ड की बैठक पर ही सवाल खड़े कर दिए हैं. मोहसिन रजा के अनुसार, जब बोर्ड के सदस्य फैसले से पहले कह चुके थे कि जो भी सुप्रीम कोर्ट का निर्णय होगा, उसे मानेंगे तो अब इस मीटिंग का मतलब क्या है?

मोहसिन रजा ने कहा कि दरअसल बोर्ड सिर्फ अपनी राजनीतिक रोटियां सेंकने के लिए इस तरह की मीटिंग करता है. जब सुप्रीम कोर्ट के फैसले को देशभर ने माना तो यह क्यों माहौल बिगाड़ने की कोशिश कर रहे हैं? उन्होंने आरोप लगाया कि देश में अशांति फैलाने के लिए इस तरह की मीटिंग ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड कर रहा है. उन्होंने कहा कि ये जांच का विषय है कि बोर्ड को फंड कौन करता है? एक छोटी सी संस्था पूरे देश के मुसलमानों की रहनुमाई नहीं कर सकती. इन्होंने खुद कहा था कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले को माना जाएगा. फिर इस तरह की मीटिंगों का क्‍या मतलब है? उन्होंने कहा कि जान-बूझकर लखनऊ में मीटिंग रखी जाती हैं. इससे समाज में माहौल बिगड़ने की कोशिश है.

इन पक्षकारों ने दोबारा अपील की जताई है मंशा
इससे पहले पर्सनल लॉ बोर्ड के सचिव जफरयाब जिलानी ने बताया कि मौलाना रहमानी ने रविवार को नदवा में ही होने वाली बोर्ड की वर्किंग कमेटी की महत्‍वपूर्ण बैठक से पहले राम जन्‍मभूमि-बाबरी मस्जिद मामले से जुड़े विभिन्‍न मुस्लिम पक्षकारों को राय जानने के लिए बुलाया था. उन्‍होंने बताया कि मामले के मुद्दई मुहम्‍मद उमर और मौलाना महफूजुर्रहमान के साथ-साथ अन्‍य पक्षकारों हाजी महबूब, हाजी असद और हसबुल्‍ला उर्फ बादशाह ने मौलाना रहमानी से मुलाकात के दौरान कहा कि सुप्रीम कोर्ट का निर्णय समझ से परे है. लिहाजा, इसके खिलाफ अपील की जानी चाहिए. इसके अलावा एक अन्‍य पक्षकार मिसबाहुद्दीन ने भी फोन पर बात करके यही राय जाहिर की. जिलानी ने बताया कि इन पक्षकारों ने यह भी कहा कि मुसलमानों को बाबरी मस्जिद के बदले कोई जमीन नहीं लेनी चाहिए.

बोर्ड की बैठक से स्पष्ट होगा रुख
बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने राम जन्‍मभूमि-बाबरी मस्जिद मामले में गत 9 नवम्‍बर को फैसला सुनाते हुए विवादित जमीन पर राम मंदिर का निर्माण कराने और मुसलमानों को मस्जिद निर्माण के लिए अयोध्‍या में किसी प्रमुख स्‍थान पर पांच एकड़ जमीन देने का आदेश दिया था. मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के सचिव जिलानी ने इस निर्णय में अनेक विरोधाभास बताते हुए कहा था कि वह इससे संतुष्‍ट नहीं हैं. अब रविवार को नदवा में बोर्ड की वर्किंग कमेटी इस निर्णय के खिलाफ अपील करने या न करने और मस्जिद के लिए जमीन के मसले पर कोई फैसला लिया जाना है.

इनपुट: मोहम्मद शबाब
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First published: November 17, 2019, 10:40 AM IST
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