क्या हथियारों से रुक सकती है मॉब लिंचिंग, कानून के जानकारों की ये है राय

पिछले कुछ दिनों से देश में अल्पसंख्यकों और दलितों को मॉब लिंचिंग की घटनाओं के खिलाफ हथियारों का लाइसेंस देने की वकालत शुरू हो गई है. लेकिन क्या अब हथियारों से ही रुकेंगी ऐसी घटनाएं?

Ravishankar Singh | News18Hindi
Updated: July 23, 2019, 5:23 PM IST
क्या हथियारों से रुक सकती है मॉब लिंचिंग, कानून के जानकारों की ये है राय
देश में मॉब लिंचिंग को लेकरअब एस-एसटी और अल्पसंख्यकों को हथियार देने की वकालत हो रही है
Ravishankar Singh
Ravishankar Singh | News18Hindi
Updated: July 23, 2019, 5:23 PM IST
पिछले कई दिनों से देश में अल्पसंख्यकों और दलितों को मॉब लिंचिंग की घटनाओं के खिलाफ हथियारों का लाइसेंस देने की वकालत शुरू हो गई है. इस मुद्दे को लेकर अब देश में राजनीति भी शुरू हो गई है. कांग्रेस के राज्यसभा सांसद पीएल पुनिया का कहना है कि हथियार का लाइसेंस देने से दुर्बल वर्ग को शक्ति और मजबूती मिलेगी. सुप्रीम कोर्ट के एक वकील महमूद प्राचा और शिया धर्मगुरु मौलाना कल्बे जव्वाद ने भी कहा है कि मुस्लिम और दलित समाज के लोगों को आत्मरक्षा के लिए हथियार रखना चाहिए. इसके लिए  26 जुलाई को लखनऊ में हजारों अल्पसंख्यकों और एससी समाज के लोगों के साथ मौलाना कल्बे जव्वाद हथियार रखने से जुड़ी ट्रेनिंग देंगे.

26 जुलाई को लखनऊ में कैंप लगेगा

बता दें कि हाल ही में लखनऊ में सुप्रीम कोर्ट के वकील महमूद प्राचा और शिया धर्मगुरु मौलाना कल्बे जव्वाद ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर एससी-एसटी के साथ अल्पसंख्यकों को हथियार खरीदने के लिए लाइसेंस देने की वकालत की थी. इसके लिए बाकायदा लखनऊ में 26 जुलाई को एक कैंप भी लगाया जाएगा. इस कैंप में हथियार खरीदने के तरीके की जानकारी दी जाएगी.

ऐसे में सवाल यह उठता है कि क्या आपको मॉब लिचिंग से हथियार बचा सकता है? क्या मॉब लिंचिंग धर्म और जाति देख कर ही की जाती है? क्या मॉब लिंचिंग के खिलाफ हथियार रखने के लिए उकसाना सही है? क्या ये हिंसा का जवाब हिंसा से देने जैसा नहीं है? क्या इससे देश में हथियार कल्चर को बढ़ावा नहीं मिलेगा? क्या कानून के जानकार महमूद प्राचा जैसे लोगों को भी कानून पर भरोसा नहीं है?

क्या मॉब लिंचिंग धर्म और जाति देख कर ही की जाती है?


कानून के जानकारों की क्या है राय

न्यूज 18 हिंदी से बात करते हुए देश के वरिष्ठ वकील एमपी सिंह कहते हैं, ‘देखिए यह देश को बदनाम करने की साजिश है. यह एक स्थानीय मुद्दा है, लेकिन इसको एक एजेंडा की तरह देश में चलाया जा रहा है. मौलना कल्बे जव्वाद क्या कर रहे हैं? क्या क्लबे जव्वाद हथियारों की ट्रेनिंग देंगे? अगर आपको हथियार का लाइसेंस लेना है तो देश के किसी भी कचहरी में चले जाएं 10 रुपए का फॉर्म भर कर हथियार के लिए लाइसेंस अप्लाई कर सकते हैं. इसके लिए ट्रेनिंग देनी की क्या जरूरत है? नेता अपनी नेतागिरी चमका रहे हैं. मौलाना कल्बे जव्वाद जैसे लोगों को ट्रेनिंग देने की इजाजत किसने दी है? इस देश का कानून बहुत मजबूत है और वह किसी धर्म या जाति के खिलाफ नहीं है. कानून की नजर में हर गुनाह के लिए सजा का प्रावधान है. मैं महमूद प्राचा जैसे लोगों को कानून का जानकार नहीं मानता.’
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पीएम मोदी संसद में मॉब लिंचिंग पर बयान देते हुए


पीएम मोदी और राष्ट्रपति कोविंद कर चुके हैं निंदा

सुप्रीम कोर्ट के एक और वरिष्ठ वकील रविशंकर कुमार न्यूज 18 हिंदी के साथ बातचीत में कहते हैं, 'संविधान में सबके लिए राइट टू लाइफ का अधिकार है. संविधान सबको साथ लेकर चलने के लिए कहता है. सरकार को चाहिए कि कानून व्यव्यस्था दुरुस्त करे. किसी को जाति या संप्रदाय के नाम पर हथियार देना गलत है. हथियार देने की एक प्रक्रिया होती है. कोई भी जरूरतमंद आदमी हथियार हासिल कर सकता है. इसको आप दबाव बना कर हासिल नहीं कर सकते. भीड़ की कोई जाति-धर्म और संप्रदाय नहीं होता. भीड़ का केवल एक ही मजहब होता है हिंसा करना. भीड़ जब बेकाबू हो जाती है तो वह सिर्फ और सिर्फ हिंसा करना ही जानती है. अगर आप भीड़ का बहाना बना कर हथियार खरीदेंगे तो स्थिति और भयावह हो सकती है.'

मॉब लिंचिंग को लेकर कानून में भी सख्त सजा का प्रावधान है

पिछले कुछ सालों से या यूं कहें कि साल 2014 के बाद से ही देश में मॉब लिंचिंग को लेकर बवाल मचा हुआ है. पीएम तक ने मॉब लिंचिंग पर अपना रुख स्पष्ट कर दिया है. इसके बावजूद ऐसी घटनाओं में कोई खास कमी नहीं आई है. अंग्रेजी के दो शब्द मॉब और लिंचिंग ने भारतीयों के दिलो दिमाग में गहरा असर किया है. इन दो शब्दों ने हाल के दिनों में भारतीय लोकतंत्र को शर्मसार करने में भी कोई कसर नहीं छोड़ी है.

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First published: July 23, 2019, 5:12 PM IST
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