यूपी की जेलों में जल्द ही मोबाइल पकड़े जाने पर 100 गुना से ज्यादा जुर्माना

यूपी की जेलों (Prisons) में अंधेरगर्दी चलाने वाले जल्द ही ख़ुद घने अंधेरे में होंगे. यूपी के कारागार प्रशासन ने जेलों में प्रतिबंधित वस्तुओं के इस्तेमाल पर सख़्त सज़ा के कानून का ख़ाका तैयार कर लिया है.

News18 Uttar Pradesh
Updated: September 5, 2019, 3:45 PM IST
यूपी की जेलों में जल्द ही मोबाइल पकड़े जाने पर 100 गुना से ज्यादा जुर्माना
योगी सरकार ने यूपी की जेलों की व्यवस्था दुरुस्त करने के लिए बड़े बदलाव की तैयारी की है.
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Updated: September 5, 2019, 3:45 PM IST
लखनऊ. यूपी की जेलों (Prisons) में अंधेरगर्दी चलाने वाले जल्द ही ख़ुद घने अंधेरे में होंगे. यूपी के कारागार प्रशासन ने जेलों में प्रतिबंधित वस्तुओं के इस्तेमाल पर सख़्त सज़ा के कानून का ख़ाका तैयार कर लिया है. प्रशासकीय और कानून मंत्रालय की मंजूरी के बाद कैबिनेट की हरी झंडी मिलते ही यूपी की जेलों के लिए सख़्त कानून लागू हो जाएगा.

नए प्रस्ताव के मुताबिक जेलों में मोबाइल के इस्तेमाल पर 3 साल तक की सज़ा और 25 हज़ार रुपए का जुर्माना लगेगा, अभी तक 6 महीने की कैद और 200 के जुर्माने का प्रावधान था. प्रस्ताव के मुताबिक जेलकर्मियों पर भी ये सज़ा लागू होगी. यही नहीं कोई भी जेलकर्मी यदि जेल के किसी बंदी को मोबाइल मुहैया कराएगा या उसमें मदद करेगा तो उसके खिलाफ भी 3 साल की सज़ा और 25 हज़ार रुपये के जुर्माने का प्रावधान किया गया है. कारागार प्रशासन के प्रस्ताव पर सरकार सवा सौ साल पुराने प्रिजन एक्ट 1894 की धारा 42 और 43 में बदलाव करने जा रही है.

माना जा रहा है कि सरकार इस प्रस्ताव को जल्द ही कैबिनेट में लाकर इसे अमली जामा पहनाएगी. नए कानून के तहत जेल के अंदर फोन का इस्तेमाल कर बाहर किसी घटना को अंजाम दिलाने या साज़िश रचने पर कम से कम 3 साल और अधिकतम 5 साल की सज़ा और जुर्माना 50 हज़ार रुपये हो जाएगा, ये सज़ा जेलकर्मियों पर भी लागू होगी. नए प्रस्ताव के मुताबिक यदि कोई फ़र्ज़ी नाम से जेल में किसी बंदी से मिलने आता है तो उसके लिए भी 3 साल की सज़ा और 25 हज़ार रुपये के जुर्माने का प्रस्ताव है.

इस संबंध में डीजी जेल आनंद कुमार ने कहा कि दरअसल यूपी की जेलों पर 1894 का प्रिजन एक्ट लागू होता है. जब ये प्रिजन एक्ट बना था, तब मोबाइल या वायरलेस कम्युनिकेशन की कोई भी चीज मौजूद नहीं थी. लिहाज़ा एक्ट में प्रतिबंधित वस्तु जैसे शब्द का इस्तेमाल हुआ था, जिसके इस्तेमाल पर मात्र 6 महीने की सज़ा और 200 रुपये के जुर्माने का प्रावधान था. 1894 के प्रिजन एक्ट के चलते बंदियों और जेलकर्मियों में सज़ा का खौफ़ नहीं था लेकिन नए ज़माने के साथ नया जेल कानून यूपी की जेलों में क्रांतिकारी बदलाव लाएगा.

(रिपोर्ट- ऋषभ मणि त्रिपाठी)

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First published: September 5, 2019, 3:45 PM IST
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