मुन्ना बजरंगी ने 20 साल में किए 40 कत्ल, ज्यादातर शिकार हुए BJP के नेता

माफिया डॉन मुन्ना बजरंगी  (फाइल फोटो)

माफिया डॉन मुन्ना बजरंगी (फाइल फोटो)

वैसे तो मुन्ना बजरंगी ने रंगदारी, दुश्मनी और वर्चस्व के लिए कई हत्याएं की, लेकिन उसकी दहशत के चर्चे तब शुरू हुए जब उसने राजनीतिक हत्याएं करनी शुरू कर दीं.

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माफिया डॉन मुन्ना बजरंगी की हत्या 9 जुलाई की सुबह बागपत जेल में हुई. सुनील राठी ने पूरी की पूरी मैगजीन मुन्ना बजरंगी के सिर में उतार दी. गौर करने वाली बात है कि मुन्ना बजरंगी की गोलियों के शिकार ज्यादातर बीजेपी केे नेता ही बने. वैसे तो मुन्ना बजरंगी ने रंगदारी, दुश्मनी और वर्चस्व के लिए कई हत्याएं कीं, लेकिन उसकी दहशत के चर्चे तब शुरू हुए, जब उसने राजनीतिक हत्याएं करनी शुरू कींं.

मुन्ना बजरंगी पर 40 हत्याओं से जुड़े केस दर्ज हैं. इनमें छात्रसंघ अध्यक्ष, जिला पंचायत सदस्य, ब्लॉक प्रमुख, विधानसभा प्रत्याशी और विधायक भी उसकी गोलियों के शिकार हुए. इनमें ज्यादातर बीजेपी से जुड़े लोग थे.

इन हत्याओं ने पूर्वांचल की राजनीति में भूचाल ला दिया. नवंबर 2005 में गाजीपुर जिले के मोहम्मदाबाद विधानसभा सीट से बीजेपी विधायक कृष्णानंद राय की हत्या में मुख्य भूमिका निभाकर वह मुख़्तार अंसारी का खास बन गया. यहीं से शुरू हुई पूर्वांचल की राजनीति में अपराधियों की घुसपैठ.



कृष्णानंद राय की हत्या से पहले मुन्ना तत्कालीन वाराणसी के डिप्टी मेयर अनिल सिंह का खास था. अनिल सिंह के ही इशारे पर मुन्ना उसके राजनीतिक दुश्मनों को साफ करने में जुट गया. वाराणसी में तत्कालीन बीजेपी विधायक अजय राय के भाई अवधेश राय, काशी विद्यापीठ छात्रसंघ अध्यक्ष रामप्रकाश त्रिपाठी और पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष सुनील राय की हत्या में भी मुन्ना बजरंगी का नाम सामने आया.
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इससे पहले बजरंगी ने 1993 में जौनपुर के लाइन बाजार थाना क्षेत्र में कचहरी रोड पर ब्लॉक प्रमुख बीजेपी नेता रामचंद्र सिंह, भानुप्रताप सिंह, और रामचंद्र के सरकारी गनर की हत्या कर दी थी. इसके बाद मुन्ना ने रामपुर थाना क्षेत्र के जमालपुर में बीजेपी के ब्लॉक प्रमुख कैलाश दुबे, जिला पंचायत सदस्य राजकुमार सिंह और एक अमीन की हत्या की. इसके बाद से राजनेताओं में खासकर बीजेपी के नेताओं में बजरंगी की दहशत बढ़ती गई.

मुन्ना बजरंगी उर्फ़ प्रेम प्रकाश सिंह के बारे में कहा जाता है कि उसने 20 साल में 40 हत्याएं की हैं. 17 साल की उम्र में पहला मुकदमा दायर किया गया था. 1984 में लूट के लिए व्यापारी की हत्या कर दी थी.

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