Auraiya : जवान बेटे का शव लेने के लिए रात भर बारिश में भीगते रहे शोक में डूबे परिजन
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Auraiya : जवान बेटे का शव लेने के लिए रात भर बारिश में भीगते रहे शोक में डूबे परिजन
अंधेरी रात और बारिश का मौसम. अपने बच्चे की लाश लेने के लिए तीन जोड़ी आंखें रात भर इंतजार करती रही पुलिस कार्यवाही के पूरे होने का.

नियमतः कानूनी कार्यवाही (legal proceeding) के बाद ही परिजनों को शव सौंपा जाता. लेकिन परिजन पूरी रात बारिश में पुलिस के आने का इंतजार करने रहे, पर पुलिस नहीं आई.

  • News18Hindi
  • Last Updated: September 3, 2020, 6:24 PM IST
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औरैया. औरैया (Auraiya) जिले की कोतवाली पुलिस की लापरवाही से जुड़ा एक वीडियो वायरल (Video viral) होने के बाद पुलिस की किरकिरी हो रही है. पुलिस की संवेदनहीनता से जुड़े इस वीडियो में दिख रहे परिजनों का आरोप है कि उनके 26 वर्षीय बेटे की मौत (Death) इलाज के दौरान जिला अस्पताल (District Hospital) में हो गई. नियमतः कानूनी कार्यवाही (legal proceeding) के बाद ही परिजनों को शव सौंपा जाता. लेकिन परिजन पूरी रात बारिश में पुलिस के आने का इंतजार करने रहे, पर पुलिस नहीं आई. परिजनों का आरोप है कि उन्होंने इस बाबत कई बार पुलिसवालों से गुजारिश की कि आकर कानूनी कार्यवाही पूरी कर दें. पर सूचना दिए जाने के बाद भी पुलिस रात भर नहीं आई. रात भर शव के साथ बारिश और अंधेरे में परिजन बैठे रहे. इस मामले ने स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही भी उजागर होती दिखी. स्वास्थ्य विभाग ने शव को मोर्चरी में न रख कर पूरी रात खुले में टीन शेड के नीचे रखा.

इलाज के दौरान हुई थी बेटी की मौत

यह मामला अयाना थाना क्षेत्र से जुड़ा है. इस थाना क्षेत्र में रहने वाले लालमन के 26 वर्षीय बेटे जीतू का इलाज सीएचसी आयाना में हो रहा था. लेकिन डॉक्टरों ने जीतू की गंभीर हालत देखते हुए उसे जिला अस्पताल रेफर कर दिया. जिला अस्पताल पहुंचते ही युवक को डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया. परिजनों ने डॉक्टरों पर लापरवाही का आरोप लगाया है. उससे बड़ी लापरवाही पुलिस प्रशासन पर लगाई कि सूचना दिए जाने के बावजूद भी कानूनी कार्यवाही नहीं की गई. पूरी रात बारिश में लालमन और उनकी पत्नी अपने बेटे के शव के साथ जिला अस्पताल परिसर में बैठे रहे. परिजनों का आरोप है कि रात 9:30 बजे कोतवाली को सूचना दी गई. लेकिन कोई पुलिसकर्मी मौके पर नहीं आया.



अधिकारियों ने ओढ़ रही है चुप्पी
फिलहाल जिम्मेदार अधिकारी इस पूरे मामले में चुप्पी साधे हुए हैं. इसे नियति कहें या कुदरत की मार कि पहले तो लालमन ने अपना बेटा खोया और फिर उस बेटे के शव को पाने के लिए रात भर पुलिस प्रशासन की लापरवाही का दंश झेलते रहे. क्या यह वही पुलिस है जो हमेशा सुख-दुख में आम आदमी के साथ खड़े रहने का दावा करती है. फिर वह शोकग्रस्त इस परिवार की मदद के लिए सामने क्यों नहीं आई?
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