मुख्तार अंसारी से कुलदीप सेंगर तक: क्या दागी नेताओं के बगैर राजनीति संभव नहीं?

कुलदीप सिंह सेंगर अकेले ऐसे दबंग छवि के नेता नहीं हैं, जिनपर गंभीर आरोप लगा हो और वे राजनीति कर रहे हों. ऐसे कई नेता हैं जो समय के अनुसार राजनीतिक दलों से समर्थन प्राप्त करते हैं और अपनी उपयोगितानुसार सेवा देते रहे हैं.

Pranshu Mishra | News18 Uttar Pradesh
Updated: August 2, 2019, 1:26 PM IST
मुख्तार अंसारी से कुलदीप सेंगर तक: क्या दागी नेताओं के बगैर राजनीति संभव नहीं?
कुलदीप सिंह सेंगर अकेले ऐसे दबंग छवि के नेता नहीं हैं, जिनपर गंभीर आरोप लगा हो और वे राजनीति कर रहे हों. ऐसे कई नेता हैं जो समय के अनुसार राजनीतिक दलों से समर्थन प्राप्त करते हैं और अपनी उपयोगितानुसार सेवा देते रहे हैं.
Pranshu Mishra | News18 Uttar Pradesh
Updated: August 2, 2019, 1:26 PM IST
बहुचर्चित उन्नाव रेप केस के मुख्य आरोपी कुलदीप सिंह सेंगर लगभग दो साल से सलाखों के पीछे है. हाल के समय तक बीजेपी सेंगर से अपना नाता नहीं तोड़ पाई थी. यह स्थिति तब थी जब एक रोड एक्सीडेंट में विधायक कुलदीप सेंगर की संदिग्ध भूमिका को लेकर लोगों में भारी आक्रोश था. इस दुर्घटना में रेप पीड़िता के परिजनों की मौत हो गई जबकि वो खुद लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर जिंदगी और मौत से जूझ रही है.

कुलदीप सिंह सेंगर अकेले ऐसे दबंग छवि के नेता नहीं हैं, जिनपर गंभीर आरोप लगा हो और वे राजनीति कर रहे हों. ऐसे कई नेता हैं जो समय के अनुसार राजनीतिक दलों से समर्थन प्राप्त करते हैं और अपनी उपयोगितानुसार सेवा देते रहे हैं.

सपा सरकार में गायत्री प्रजापति मामला
हाल के समय तक कुलदीप सिंह सेंगर को लेकर बीजेपी की जो स्थिति थी, वहीं स्थिति एक समय में भ्रष्टाचार और रेप के आरोपी गायत्री प्रजापति को लेकर समाजवादी पार्टी और तब के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की थी. अभी अखिलेश यादव और मायावती दोनों उन्नाव रेप पीड़िता के परिवार के साथ हैं और बीजेपी पर कुलदीप सिंह सेंगर को बचाने का आरोप लगा रहे हैं. लेकिन एक सच्चाई ये भी है कि किसी समय में दोनों दलों से कुलदीप सिंह सेंगर के संबंध रहे हैं.

2003 में एएसपी पर सेंगर के भाई ने चलाई थी गोली
2017 में बीजेपी में शामिल होने से पहले सेंगर बीएसपी और एसपी दोनों की टिकट पर विधानसभा चुनाव जीत चुके हैं. हालांकि इसमें भी कोई शक नहीं है कि रेप का मामला 2017 में ही सामने आया. लेकिन एक तथ्य यह भी है कि कैसे दो दशक में सेंगर ने अपनी ताकत का विस्तार किया है. 2003 में सेंगर के भाई ने एएसपी पर गोली भी चला दी थी लेकिन एफआईआर दर्ज होने के बाद भी इस केस में कुछ नहीं हुआ.

पीड़ित युवती इसी कार में अपने परिजनों के साथ रायबरेली से उन्नाव लौट रही थी. रास्ते में सामने से आ रहे ट्रक ने उसे टक्कर मार दी जिसमें उसकी मौसी और चाची की मौत हो गई थी. दुर्घटना में पीड़ित युवती और उसका वकील गंभीर रूप से घायल हो गए थे.

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उन्नाव से जीतने के बाद जेल में मिलने पहुंचे थे साक्षी महाराज
बीजेपी दावा करती है कि वह पार्टी विद डिफरेंस है लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही है. सिर्फ सेंगर ही नहीं, पिछले कुछ वर्षों में बीजेपी ने चुनाव जीतने के लिेए स्थानीय बाहुबलियों पर खूब भरोसा दिखाया है और ऐसे नेताओं को जमकर पार्टी में शामिल किया गया है. सेंगर के प्रभाव और मतदाताओं पर पकड़ को आप इस बात से समझ सकते हैं कि आम चुनाव में जीत हासिल करने के बाद उन्नाव सांसद साक्षी महाराज उनसे मिलने के लिए खुलेआम जेल पहुंचे थे.

रेप आरोपी गायत्री प्रजापति का अखिलेश ने किया था समर्थन
फिलहाल कुलदीप सिंह सेंगर की करतूत लोगों की नजरों में है. लेकिन कुछ ही साल पहले बीजेपी ने एक जागरूक विपक्ष का कर्तव्य निभाया था जब रेप आरोपी गायत्री प्रजापति को तब के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव लगातार समर्थन कर रहे थे. प्रजापति एक मात्र उदाहरण नहीं है. सपा सरकार मंत्री राम मूर्ति वर्मा का भी जमकर समर्थन की. वर्मा पर शाहजहांपुर में एक पत्रकार को जिंदा जलाने का आरोप लगा था. तमाम राजनीतिक हमलों के बाद भी वर्मा अखिलेश सरकार में मंत्री बने रहे.

मुख्तार अंसारी और अफजाल अंसारी की कहानी
राजनीतिक दलों के चयनित आक्रोश का उदाहरण बाहुबली और हत्या आरोपी विधायक मुख्तार अंसारी भी हैं. मुख्तार अंसारी और उनके सांसद भाई अफजाल अंसारी बीजेपी एमएलए कृष्णानंद राय हत्या मामले में आरोपी रहे. 2016 में इन दोनों को सपा में शामिल करने के खिलाफ अखिलेश यादव ने मोर्चा खोल दिया था. स्थिति यहां तक आ गई कि वे अपने चाचा शिवपाल से बगावत भी कर ली. लेकिन इसी अखिलेश को तब दिक्कत नहीं हुई जब लोकसभा चुनाव में अफजाल अंसारी एसपी-बीएसपी के गाजीपुर से संयुक्त उम्मीदवार बने.

(इस लेख को अंग्रेजी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)

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First published: August 2, 2019, 1:12 PM IST
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