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आजम की भी बात नहीं माने मुलायम, अखिलेश से नाराजगी की वजह कहीं ये तो नहीं!

आजम की भी बात नहीं माने मुलायम, अखिलेश से नाराजगी की वजह कहीं ये तो नहीं!

File Photo

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जब अखिलेश यादव लखनऊ में समाजवादी पार्टी के घोषणापत्र के बारे में लोगों को बता रहे थे, मंच पर मुलायम सिंह यादव और शिवपाल यादव नदारद थे.

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    उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री और समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने लखनऊ में पार्टी का घोषणापत्र जारी कर दिया है. इस घोषणापत्र में स्मार्टफोन देने, लोहिया आवास योजना को बढ़ाने, लैपटॉप, कन्याधन जैसी योजनाओं को मजबूती से लागू करने, एक करोड़ लोगों को मानसिक पेंशन, समाजवादी किसान कोष, गरीबों को मुफ्त चावल-गेहूं देने से लेकर कई अहम चीजें हैं.

    दिलचस्प बात यह है कि जब अखिलेश यादव समाजवादी पार्टी के घोषणापत्र का एलान कर रहे थे, मंच पर पार्टी के संरक्षक मुलायम सिंह यादव और शिवपाल यादव नदारद थे. मुलायम को मनाने के लिए पार्टी के वरिष्ठ नेता आजम खां उनके आवास पर पहुंचे, लेकिन मुलायम मंच पर नहीं आए.

    अखिलेश यादव के लिए बड़ा झटका
    कार्यक्रम के दौरान अखिलेश यादव ने मुलायम से फोन पर आने का आग्रह किया. इसके ​बाद आजम खान को मुलायम आवास रवाना किया. करीब 20 मिनट तक आजम खान ने मुलायम सिंह को कार्यक्रम में पहुंचने के लिए मान-मनौव्वल की. इसके बाद भी मुलायम नहीं पसीजे. ऐसे में अखिलेश को डिंपल यादव और अन्य नेताओं के साथ ही पार्टी का घोषणापत्र जारी करना पड़ा.

    दरअसल, समाजवादी पार्टी में अपने करीबियों की अनदेखी से मुलायम सिंह यादव काफी नाराज हैं. ऐसे में चर्चा है कि मुलायम सिंह यादव समाजवादी पार्टी के लिए यूपी विधानसभा चुनाव में प्रचार नहीं करेंगे. यदि ऐसा होता है तो यह मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के लिए बड़ा झटका होगा.

    दरअसल, मुलायम खेमे के अंबिका चौधरी समाजवादी पार्टी से इस्तीफा देकर बहुजन समाज पार्टी में शामिल हो गए हैं. कुछ और मुलायम समर्थकों के समाजवादी पार्टी छोड़ने की अटकले हैं.

    यूपी में सात चरणों में चुनाव
    उत्तर प्रदेश में 11 फरवरी से 8 मार्च के बीच सात चरणों में विधानसभा चुनाव हो रहे हैं. कांग्रेस, राष्ट्रीय लोक दल और समाजवादी पार्टी के अखिलेश धड़े के बीच गठबंध के बावजूद बहुकोणीय मुकाबला देखने को मिलेगा.

    केंद्र में पूर्ण बहुमत की सरकार बनाने के बाद जिस तरह से बीजेपी को दिल्ली और बिहार में करारी शिकस्त का सामना करना पड़ा है, वैसे में उत्तर प्रदेश का चुनाव प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के लिए किसी चुनौती से कम नहीं है.

    मुख्यमंत्री चेहरे को सामने न लाकर एक बार फिर बीजेपी ने पीएम मोदी के चेहरे पर दांव खेला है. इसका कितना फायदा उसे इन चुनावों में मिलेगा वह 11 मार्च को सामने आ ही जाएगा.

    ये होंगे चुनावी मुद्दे
    इस बार उत्तर प्रदेश चुनावों में समाजवादी पार्टी में मचे घमासान के अलावा प्रदेश की कानून व्यवस्था, सर्जिकल स्ट्राइक, नोटबंदी और विकास का मुद्दा प्रमुख रहने वाला है. जहां एक ओर बीजेपी और बसपा प्रदेश की कानून व्यवस्था को लेकर अखिलेश सरकार को घेर रही हैं, वहीँ विपक्ष नोटबंदी के फैसले को भी चुनावी मुद्दा बना रहा है.

    यूपी विधानसभा में कुल 403 सीटें हैं. 2012 के विधानसभा चुनावों में समाजवादी पार्टी ने 224 सीट जीतकर पूर्ण बहुमत की सरकार बनाई थी. पिछले चुनावों में बसपा को 80, बीजेपी को 47, कांग्रेस को 28, रालोद को 9 और अन्य को 24 सीटें मिलीं थीं.

    Tags: Akhilesh yadav, Mulayam Singh Yadav, Samajwadi party

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