ANALYSIS: मैनपुरी के मंच पर माया-मुलायम, तारीफों के पुल और अतीत होता गेस्ट हाउस कांड!

मैनपुरी के मंच पर मुलायम सिंह यादव ने साथ देने के लिए मायावती का अहसान न भूलने की बात कही तो मायावती भी मुस्कराती रही. अखिलेश यादव ने इन चुनावों को को दलितों और पिछड़ों के भाग्य से जोड़ा.

रंजीव | News18 Uttar Pradesh
Updated: April 19, 2019, 5:54 PM IST
ANALYSIS: मैनपुरी के मंच पर माया-मुलायम, तारीफों के पुल और अतीत होता गेस्ट हाउस कांड!
मंच पर मायावती और मुलायम
रंजीव | News18 Uttar Pradesh
Updated: April 19, 2019, 5:54 PM IST
अभिवादन में जुड़े हुए हाथ, चेहरे पर दमकती हुई मुस्कान, जुबां पर एक-दूसरे की तारीफों के पुल और सियासी गठबंधन की बातें! मैनपुरी के क्रिश्चियन कॉलेज मैदान में शुक्रवार को जब समाजवादी पार्टी-बहुजन समाज पार्टी-राष्ट्रीय लोकदल की साझा रैली में मुलायम सिंह यादव और मायावती करीब ढाई दशक बाद एक साथ दिखे तो ऐसा ही खुशनुमा नजारा था.

करीब 25 साल पहले जब यूपी में सपा-बसपा ने मिलकर चुनाव लड़ा था, तब इसी मैदान पर मुलायम और कांशीराम ने साझा रैली की थी. उसके बाद लखनऊ का बहुचर्चित गेस्ट हाउस कांड हुआ तो दोनों दलों के रास्ते जुदा हो गए थे. आज उसी मैदान पर सपा-बसपा का शीर्ष नेतृत्व साथ आया तो मुलायम और अखिलेश ने अपने भाषणों में मायावती के प्रति सम्मान दिखाने की अपने कार्यकताओं से बार-बार अपील कर परोक्ष रूप से गेस्ट हाउस कांड पर अफसोस जताया तो वहीं मायावती ने गेस्ट हाउस कांड को भुलाकर आगे बढ़ जाने का संदेश देते हुए कहा कि जिनके मन में सवाल है कि गेस्ट हाउस कांड के बावजूद मैं यहां मुलायम सिंह यादव के लिए वोट मांगने क्यों आई हूं तो वे जान लें कि देश, जनता और बहुजन मूवमेंट के हित में गठबंधन किया है और यह बीजेपी को सत्ता से हटाएगा.



रैली की एक खास बात यह भी रही कि इसके मंच पर सपा-बसपा की दो पीढ़ियों का संगम भी दिखा. मायावती ने सपा संस्थापक मुलायम सिंह के उत्तराधिकारी और सपा के मौजूदा प्रमुख अखिलेश यादव के साथ पहले ही सियासी दोस्ती कर ली है. ये दोनों नेता पहले भी मंच साझा कर चुके हैं और उनके साथ बसपा प्रमुख के भतीजे आकाश आनंद भी मंचों पर लगातार दिख रहे हैं, जिन्हें मायावती का राजनीतिक उत्तराधिकारी माना जा रहा है जबकि सपा के संस्थापक मुलायम सिंह यादव पहली बार इन तीनों के साथ मंच पर थे.

भाषणों का दौर खत्म हुआ और सभी नेता वापस जाने के लिए खड़े हुए तो अखिलेश लपक कर आकाश के पास गए और उनका हाथ पकड़कर पिता मुलायम सिंह से परिचय करवाने लाए. आकाश ने हाथ जोड़कर अभिवादन किया तो मुलायम ने उनके सिर पर हाथ रखकर आशीर्वाद दिया. बगल में खड़ीं मायावती के चेहरे पर गदगद भाव खिल गए. यूपी में मंडल के दौर के उभार के बाद मजबूत हुईं इन दोनों पार्टियों के भविष्य के नेतृत्व और संभवत: सियासी साथ बनाए रखने की ललक का गवाह भी बना मैनपुरी का मंच.

मैनपुरी की रैली के जरिए मुलायम, मायावती और अखिलेश ने यूपी के बाकी बचे पांच चरणों के लोकसभा चुनाव के लिए अपने वोटर समूह को स्पष्ट और सधा हुआ संदेश भी दिया. इन पांच चरणों में बड़ा हिस्सा अवध और पूर्वांचल का भी है जहां दलित और पिछड़े ज्यादातार सीटों पर निर्णायक स्थिति में हैं. लिहाजा मायावती ने अपने भाषण में मुलायम की जमकर तारीफ करते हुए कहा कि मुलायम ही पिछड़े वर्ग के 'जन्मजात, वास्तविक और असली नेता हैं.' वहीं मुलायम ने कहा- 'आज मायावती आई हैं. उनका हम स्वागत करते हैं, आदर करते हैं. मायावती जी का बहुत सम्मान करना हमेशा, क्योंकि समय जब भी आया है तो मायावती जी ने हमारा साथ दिया है. मैं उनका एहसान कभी नहीं भुलूंगा.'

खास बात यह कि जब मुलायम बोल रहे तो मायावती उनकी बातों को सुनकर लगातार मुस्कुरा रहीं थीं वहीं जब मायावती भाषण दे रहीं थीं तो मुलायम अपनी जगह से भीड़ को तालियां बजाने के लिए लगातार प्रोत्साहित कर रहे थे. वहीं अखिलेश ने यह कहकर संकेत और साफ कर दिया कि यह चुनाव दलितों और पिछडों के भाग्य से जुड़ा है और गठबंधन नई इबारत लिखने जा रहा है.

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