गैंगस्टर विकास दुबे से पहले UP के ये 3 माफिया डॉन भी रहे चर्चा में, पुलिस भी खाती थी खौफ
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गैंगस्टर विकास दुबे से पहले UP के ये 3 माफिया डॉन भी रहे चर्चा में, पुलिस भी खाती थी खौफ
तभी जब बृजेश सिंह और माफिया डॉन मुख्तार अंसारी ठेकेदारी को लेकर आमने-सामने आ गए.

कानपुर शूटआउट कांड (Kanpur Shootout) ने यूपी में माफिया राज की यादों को फिर से जिंदा कर दिया है. कभी UP समेत अन्य राज्यों में सक्रिय रहे श्रीप्रकाश शुक्ला, मुन्ना बजरंगी और ब्रजेश सिंह की जुर्म की कहानी.

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लखनऊ. कानपुर में 8 पुलिसवालों की हत्या (Kanpur Shootout) कर सुर्खियों में आए गैंगस्टर विकास दुबे (Vikas Dubey) को ढूंढने के लिए यूपी पुलिस और एसटीएफ उत्तर प्रदेश के अलावा देश के कई राज्यों में उसकी तलाश कर रही है. विकास दुबे के हरियाणा में छिपे होने और नोएडा कोर्ट में सरेंडर करने की खबरें चल रही हैं. इस बीच यूपी पुलिस ने उसके गुर्गों पर शिकंजा कसते हुए आज उसके राइट-हैंड अमर दुबे को मार गिराया है. लेकिन विकास अभी तक पुलिस के शिकंजे में नहीं आया है. कानपुर शूटआउट कांड ने यूपी में माफिया राज की यादों को फिर से जिंदा कर दिया है. प्रदेश में कई ऐसे माफिया हुए थे जिन्होंने यूपी पुलिस को परेशान कर के रख दिया था. आइए देखते हैं विकास दुबे से पहले यूपी में किन माफियाओं ने अपने आतंक से कानून-व्यवस्था को चुनौती देने की कोशिश की थी.

यूपी के माफियाओं में सबसे पहला नाम श्रीप्रकाश शुक्ला (Shree Prakash Shukla) का आता है. उसने उत्तर प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री कल्याण सिंह को मारने तक की सुपारी ले ली थी. लेकिन पुलिस ने उसे एनकाउंटर में मार गिराया. हालांकि श्रीप्रकाश शुक्ला पर नकेल कसने के दौरान ही देश में पहली बार पुलिस के भीतर स्पेशल टास्क फोर्स यानी STF का कॉन्सेप्ट आया, जिसकी मदद से माफिया डॉन को मार गिराया गया. पुलिस के मुताबिक श्रीप्रकाश शुक्ला के एनकाउंटर में तीन चीजें पहली बार हुई थीं. पहला किसी बदमाश की तरफ से पहली बार एके-47 (AK-47) का इस्तेमाल किया गया था. दूसरा बदमाश को पकड़ने के लिए पुलिस ने पहली बार मोबाइल सर्विलांस (Mobile surveillance) का इस्तेमाल किया था. आखिरी सबसे बड़ी बात यह है श्रीप्रकाश शुक्ला को पकड़ने के लिए ही स्पेशल टास्क फोर्स (STF) बनाई गई थी. इस एनकाउंटर को लेकर बॉलीवुड (Bollywood) में फिल्म भी बनाई गई थी.

 



 
मोस्ट वॉन्टेड माफिया डॉन मुन्ना बजरंगी


मुन्‍ना बजरंगी: साल 2018 में जेल के अंदर ही उसकी हत्या कर दी गई

उत्तर प्रदेश के मोस्ट वांटेड माफिया डॉन की सूची में दूसरा नाम मुन्ना बजरंगी का आता है. पुलिस के लिए सिर दर्द बने बजरंगी की साल 2018 में जेल के अंदर ही हत्या कर दी गई. बताया गया कि सुनील राठी गैंग ने बागपत जेल में गोली मारकर उसकी हत्या कर दी थी. मुन्ना बजरंगी पर 40 हत्याओं, लूट, रंगदारी की घटनाओं में शामिल होने के केस थे. वह भी यूपी पुलिस और एसटीएफ के लिए सिरदर्द बना हुआ था. पुलिस के मुताबिक, लखनऊ, कानपुर और मुंबई में उसके खिलाफ कई केस दर्ज हुए थे. बजरंगी पर सरकारी ठेकेदारों से रंगदारी और हफ्ता वसूलने का भी आरोप था.

17 साल की उम्र में जरायम की दुनिया में कदम रखने वाले मुन्ना बजरंगी के खिलाफ पहली बार अवैध हथियार रखने को लेकर मामला दर्ज किया गया था. जौनपुर में जन्मे मुन्ना को हथियार रखने का शौक था. फिल्मों की तरह वह डॉन बनना चाहता था. अपराध की दुनिया में उसकी मुलाकात मुख्तार अंसारी से हुई, जिसके कहने पर उसने 2005 में भाजपा विधायक कृष्णानंद राय को दिनदहाड़े लखनऊ हाईवे पर गोलियों से भून डाला. मुन्ना बजरंगी ने अपने साथियों के साथ मिलकर कृष्णानंद राय की दो गाड़ियों पर AK 47 से 400 गोलियां बरसाई थीं. मुन्ना बजरंगी ने इसके बाद राजनीति में भी किस्मत आजमाने की कोशिश की, लेकिन सफल नहीं हो सका. 29 अक्टूबर 2009 को दिल्ली पुलिस ने उसे मुंबई से गिरफ्तार कर लिया.

बृजेश सिंह और माफिया डॉन मुख्तार अंसारी ठेकेदारी को लेकर आमने-सामने आ गए.


ब्रजेश सिंह भी बड़ा डॉन

यूपी में जुर्म की दुनिया की बात ब्रजेश सिंह की चर्चा के बगैर अधूरी है. पिता की हत्या का बदला लेने के लिए अपराध जगत में कदम रखने वाला ब्रजेश, बाद के दिनों में रंगदारी, कोयला-रेशम और रेलवे की ठेकेदारी का डॉन बन गया. पिता की हत्या का बदला लेने के लिए उसने एक-एक कर सभी आरोपियों को मौत के घाट उतार दिया. इसी कारण गिरफ्तार हुआ और उसे गाजीपुर की जेल में भेजा गया, जहां उसकी मुलाकात एक अन्य अपराधी त्रिभुवन से हुई. कोयला ठेकेदारी के विवाद में ब्रजेश की भिड़ंत माफिया डॉन मुख्तार अंसारी से भी होती रहती थी. इसी क्रम में एक बार वह मुंबई गया, जहां इंटरनेशनल डॉन दाऊद इब्राहिम के करीबी से उसकी मुलाकात हुई.

ब्रजेश सिंह ने दाऊद के कहने पर इब्राहिम कास्कर की हत्या का बदला लेने के लिए मुंबई के जेजे हॉस्पिटल में खूनी खेल खेला. इससे दाऊद के साथ उसकी नजदीकियां बढ़ीं, लेकिन 1993 के मुंबई ब्लास्ट के बाद दोनों में मतभेद हो गए. वर्ष 2008 में दिल्ली पुलिस ने उसे गिरफ्तार किया और इसके बाद का समय वह अलग-अलग जेलों में बिताता रहा. इस दौरान वह महाराष्ट्र, गुजरात की जेलों के साथ-साथ वाराणसी सेंट्रल जेल और बाद में दिल्ली के तिहाड़ जेल भेजा गया. 2012 में ब्रजेश सिंह ने राजनीति में कदम रखा और वाराणसी से यूपी विधान परिषद का चुनाव जीतकर विधायक भी बना. (फर्स्ट पोस्ट से साभार)
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