मुन्ना बजरंगी ने कभी BJP विधायक कृष्णानंद राय को किया था AK-47 से छलनी

कृष्णानंद राय (बाएं), मुन्ना बजरंगी Photo: File

कृष्णानंद राय (बाएं), मुन्ना बजरंगी Photo: File

आरोप है कि इस हत्याकांड के पीछे मुख्तार अंसारी का हाथ था. मुख्तार के ही कहने पर मुन्ना बजरंगी ने कृष्णानंद राय पर एके-47 से 400 गोलियां दागीं.

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बागपत जेल में माफिया डॉन मुन्ना बजरंगी की गोली मारकर हत्या के बाद उत्तर प्रदेश में एक बा​र फिर गैंगवार शुरू होने की आशंका जताई जा रही है. उत्तर प्रदेश में अपराध की दुनिया में मुन्ना बजरंगी एक खूंखार हत्यारा माना जाता रहा. मुन्ना बजरंगी का नाम भाजपा विधायक कृष्णानंद राय हत्याकांड के बाद भी सुर्खियां में आया. आरोप है कि इस हत्याकांड के पीछे माफिया मुख्तार अंसारी का हाथ था. मुख्तार के ही कहने पर मुन्ना बजरंगी ने कृष्णानंद राय पर एके-47 से 400 गोलियां दागीं. इस हत्याकांड ने पूरे पूर्वांचल को दहला कर रख दिया था.

आरोप है कि 90 के दशक के आखिर में पूर्वांचल में सरकारी ठेकों और वसूली के कारोबार पर मुख्तार अंसारी का कब्जा था, लेकिन इसी दौरान तेजी से उभरते बीजेपी के विधायक कृष्णानंद राय उनके लिए चुनौती बनने लगे. कहा जाता है कि कृष्णानंद राय और मुख्तार के दुश्मन माफिया डॉन ब्रजेश सिंह काफी करीबी थे. कृष्णानंद राय की अगुवाई में ब्रजेश तेजी से अपना गैंग की ताकत बढ़ा रहा था. यही नहीं इनकी धमक मुंबई अंडरवल्र्ड भी महसूस करने लगा था. आरोप है कि मुख्तार अंसारी धीरे-धीरे कृष्णानंद राय को बड़ी चुनौती मानने लगा. इसी के बाद उसने कृष्णानंद राय को खत्म करने की जिम्मेदारी मुन्ना बजरंगी को सौंप दी.

7 शवों से बरामद हुई थीं 67 गोलियां!

गाजीपुर मे 29 नवंबर 2005 की शाम भांवरकोल क्षेत्र के बसनिया पुलिया के पास अपराधियों ने स्वचालित हथियारों से भाजपा विधायक कृष्णानंद राय व उनके छह साथियों मुहम्मदाबाद के पूर्व ब्लाक प्रमुख श्यामाशंकर राय, भांवरकोल ब्लाक के मंडल अध्यक्ष रमेश राय, अखिलेश राय, शेषनाथ पटेल, मुन्ना यादव व उनके अंगरक्षक निर्भय नारायण उपाध्याय की हत्या कर दी.
मुहम्मदाबाद विधानसभा क्षेत्र के भांवरकोल ब्लॉक के सियाड़ी गांव में आयोजित क्रिकेट प्रतियोगिता का उद्घाटन करने के बाद सियाड़ी से बसनिया के लिए निकलते समय भाजपा विधायक कृष्णानंद राय व उनके साथ को लोगों ने भी यह नहीं सोचा था कि अपने ही इलाके में लट्ठूडीह-कोटवा मार्ग पर मौत खड़ी है.



जब राय का काफिला बसनिया चट्टी से आगे बढ़ा. उसी समय घात लगाकर बैठे अपराधियों ने अचानक उनके काफिले पर अंधाधुंध गोलियों की बौछार कर दी. कहते हैं कि हमलावरों ने 6 एके-47 राइफलों से 400 से ज्यादा गोलियां चलाई थीं. मारे गए सातों लोगों के शरीर से 67 गोलियां बरामद की गईं. यही नहीं मुखबिरी इतनी सटीक थी कि अपराधियों को पता था कि कृष्णानंद राय अपनी बुलेट प्रूफ वाहन में नहीं हैं.

कृष्णानंद राय की हत्या के विरोध में जल उठा पूर्वांचल

विधायक कृष्णानंद राय समेत सात लोगों की एक साथ हत्या से गाजीपुर जनपद दहल उठा था. इस हत्याकांड से पूरे यूपी सहित बिहार में भी हड़कंप मच गया था. हत्याकांड के विरोध में लगभग एक सप्ताह तक गाजीपुर, बलिया, आजमगढ़, वाराणसी के साथ ही आगजनी, तोड़फोड़ आंदोलनों का दौर चलता रहा. उस समय पूरा पूर्वांचल सहमा हुआ दिख रहा था. आंदोलन की कमान पूर्व मुख्यमंत्री राजनाथ सिंह संभाले हुए थे. तत्कालीन सपा सरकार प्रदेश की जांच एजेंसी की रिपोर्ट को सही ठहरा रही थी, जबकि भाजपा पूरे मामले की जांच सीबीआई से कराने पर अड़ी थी.

कोर्ट ने सीबीआई जांच के दिए आदेश

वहीं कृष्णानंद राय की पत्नी अलका राय की ओर से हाईकोर्ट में दाखिल याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने पूरे प्रकरण की सीबीआई जांच का आदेश दिया गया था. बाद में अलका राय की ओर से सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की गई. उन्होंने आशंका व्यक्त करते हुए कहा गया था कि अपराधियों को सत्ता का संरक्षण प्राप्त है. ऐसे में सुनवाई के दौरान गवाहों के जान का भय बना हुआ है. इसलिए पूरे मामले की सुनवाई गैर प्रदेश की कोर्ट में की जाए. अलका राय के वकील की दलीलों से सहमत होते हुए सुप्रीम कोर्ट की ओर से पूरे प्रकरण की सुनवाई गैर प्रदेश की कोर्ट में करने की मंजूरी दे दी गई.

बीजेपी हर साल मनाती है बलिदान दिवस

वहीं उत्तर प्रदेश भाजपा द्वारा अपने विधायक कृष्णानंद राय के बलिदान को याद करने के लिए हर साल 29 नवंबर को शहादत दिवस मनाने का निर्णय लिया गया. तब से अब तक स्व. कृष्णानंद राय व उनके सहयोगियों को याद करने के लिए शहीद पार्क मुहम्मदाबाद में श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया जाता है. स्व.कृष्णानंद राय की प्रथम पुण्यतिथि उनके पैतृक गांव गोड़उर में मनाई गई थी, जिसमें भाजपा के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण अडवाणी, राजनाथ सिंह सहित कई दिग्गजों ने शिरकत की थी.

हत्यारोपी अताउर रहमान अब तक फरार, इंटरपोल से ली जा रही मदद

इस हत्याकांड में पूर्व सांसद अफजाल अंसारी, मउ के बाहुबली विधायक मुख्तार अंसारी, माफिया डॉन मुन्ना बजरंगी, अताउर रहमान उर्फ बाबू, संजीव महेश्वरी उर्फ जीवा, फिरदौस, राकेश पांडेय उर्फ हनुमान, मुहम्मदाबाद नगर पालिका चेयरमैन एजाजुल हक सहित अन्य लोगों को आरोपी बनाया गया है. मामले की सुनवाई दिल्ली की सीबीआई कोर्ट में चल रही है. केस में अफजाल अंसारी को कोर्ट से जमानत मिल चुकी है, जबकि फिरदौस मुंबई में पुलिस मुठभेड़ में मारा जा चुका है. वहीं अताउर रहमान उर्फ बाबू खां अभी भी फरार चल रहा है, उस पर सीबीआई ने ईनाम घोषित कर रखा है. साथ ही अताउर रहमान की तलाश करने की जिम्मेदारी इंटरपोल को भी दी गई है. बाकी सभी आरोपी जेल में बंद हैं.

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