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एकता और भाईचारे की मिसाल बने ये मुस्लिम परिवार, वर्षों से बना रहे राम मंदिर

News18Hindi
Updated: November 11, 2019, 8:46 AM IST
एकता और भाईचारे की मिसाल बने ये मुस्लिम परिवार, वर्षों से बना रहे राम मंदिर
एकता और भाईचारे की मिसाल बने ये मुस्लिम परिवार

आरिफ ने बताया कि हम बड़े गर्व के साथ आज कह सकते है कि हम भगवान को उसकी तरह मानते है जैसे की हम अल्लाह की इबादत करते है. क्योकि हमारे घर का चूल्हा इसी मंदिर की कृपा से चल रही है.

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  • Last Updated: November 11, 2019, 8:46 AM IST
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लखनऊ. अयोध्या (Ayodhya) मामले पर सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) का फैसला आने के बाद लगभग 500 वर्षों से चला आ रहा विवाद 9 नवंबर 2019 को खत्म हो गया. लेकिन आज आपको बताते हैं राजधानी लखनऊ के एक ऐसे मुस्लिम परिवार की कहानी जो कई वर्षों से राम के मंदिर को बनाता चला आ रहा है. इस परिवार में अकरम, हुसैन, आरिफ और साहिल सब लोगों ने हिंदू मुस्लिम एकता का मिसाल पेश करते हुए सुप्रीम कोर्ट से फैसले का दिल से स्वागत किया. उन्होंने कहा कि अयोध्या पर फैसला आने के बाद अब देश में सांप्रदायिक सौहार्द बरकरार रहेगा.

 मंदिर की कृपा से जलता है घर का चूल्हा

लखनऊ के निशातगंज इलाके में स्थित ऐसे कई मुस्लिम परिवार रहते है, जिनकी रोजी रोटी लकड़ी का मंदिर बनाकर चली आ रही है. हमारी मुलाकात 52 साल के आरिफ उर्फ गुड्डू से हुई, उन्होंने न्यूज18 से बातचीत में बताया कि हम लोगों सुप्रीम कोर्ट के फैसले से बहुत खुश है. आरिफ कहते हैं कि हमारे पूर्वज कई सालों से मंदिर बनाने का काम करते आए है. हम लोग मंदिर को भव्य रूप देकर उसे बाजार में बेचते है. आरिफ ने बताया कि हम बड़े गर्व के साथ आज कह सकते है कि हम भगवान को उसकी तरह मानते है जैसे की हम अल्लाह की इबादत करते है. क्योकि हमारे घर का चूल्हा इसी मंदिर की कृपा से चल रही है.

मंदिर को अंतिम रूप देते आरिफ
मंदिर को अंतिम रूप देते आरिफ


खत्म हो गई मंदिर-मस्जिद की लड़ाई 

लकड़ी का मंदिर बनाकर बेचने वाले साहित युवा हैं. 22 साल के साहिल कहते हैं कि मंदिर-मस्जिद की लड़ाई अब हमारे मुल्क में खत्म हो गई है. अब देश में अमन चैन कायम रहेगा. एक हादसे में पिता की मौत के बाद साहिल मंदिर का दूकान चला रहे है. बेहद खूबसूरत और डिजाइनर मंदिरों को देखकर ग्राहक मुंह मांगा दाम देते है, लेकिन हमारी भी ईश्वर में आस्था हैं. इसलिए हमारी जो लागत आती है, उससे थोड़ा मुनाफा लेकर मंदिर को बेच देते है. क्या करें ये मेरा पुरखों का पेशा है.

विवादित जमीन रामलला विराजमान को दी गई
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बता दें कि 9 नवंबर सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में अयोध्या रामजन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद में विवादित जमीन रामलला विराजमान को देने की बात कही है. वहीं, सुन्नी वक्फ बोर्ड को पांच एकड़ जमीन अयोध्या में कहीं भी देने का आदेश दिया गया है.

सुप्रीम कोर्ट में 40 दिन तक चली थी सुनवाई
बता दें कि सीजेआई रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय संविधान पीठ ने अयोध्या विवाद पर लगातार 40 दिन तक सुनवाई के बाद 16 अक्टूबर को फैसला सुरक्षित रख लिया था. फैसला पढ़ते हुए सीजेआई गोगोई ने निर्मोही अखाड़ा और शिया वक्फ बोर्ड के दावे को खारिज कर दिया. साथ ही उन्होंने कहा कि हिंदू पक्ष ने जिरह के दौरान ऐतिहासिक साक्ष्य (सबूत) पेश किए. उन्होंने यह भी साफ कर दिया कि आस्था के आधार पर जमीन के मालिकाना हक पर फैसला नहीं किया जाएगा.

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First published: November 11, 2019, 8:36 AM IST
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